‘हम 5 साल नहीं, शताब्दियों के हिसाब से चलते हैं’: RSS का लॉन्ग-टर्म प्लान क्या है?

नई दिल्ली
 राइजिंग भारत समिट 2026 में ‘स्ट्रेंथ विदइन’ थीम के साथ देश की बदलती तस्वीर पर चर्चा हुई. इस दौरान आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेडकर ने युवाओं और संघ के तालमेल पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि आज का युवा एस्पिरेशनल है और संघ उसके लिए सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह काम करता है. रुबिका लियाकत के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने साफ किया कि ‘भारत माता की जय’ किसी पर थोपी नहीं जाती, बल्कि ये आज के युवाओं के दिल से आती है. इस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज हस्तियां शामिल होंगी. पूरा मंच भारत की आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास को दुनिया के सामने रखने के लिए तैयार है. यह आयोजन भारत के भविष्य के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है, जहां देश की प्रगति का सटीक खाका तैयार किया जा रहा है.

क्या आरएसएस युवाओं की पसंद बन गया है?

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सुनील आंबेडकर का मानना है कि संघ आज के एस्पिरेशनल भारत की असली आवाज है. उन्होंने कहा कि देश के हर कोने में मौजूद लोग आज संघ से इसलिए जुड़ रहे हैं, क्योंकि उनकी आकांक्षाएं राष्ट्र निर्माण से गहराई से जुड़ी हैं. आज का युवा खुद को और अपने देश को तेजी से आगे देखना चाहता है. उनके लिए वंदे मातरम का नारा गर्व का विषय है, न कि किसी विवाद का मुद्दा.

क्या भारत माता का जयकारा जबरदस्ती है?

जब रुबिका लियाकत ने सवाल किया कि क्या ये नारे थोपे जा रहे हैं, तो आंबेडकर ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो संघ को 100 साल का लंबा सफर तय करने में बड़ी दिक्कत आती. संघ सालों और सदियों के हिसाब से काम करता है. यह निरंतर संवाद की एक ऑर्गेनिक प्रक्रिया है, जो जमीन पर लोगों के बीच से निकलकर सामने आती है.

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