खरना पर क्यों आम की लकड़ी से बनता है प्रसाद? जानें इसका धार्मिक महत्व और परंपरा

छठ पूजा का महापर्व आज से शुरू हो गया है. आज छठ पूजा का पहला दिन है. आज नहाय-खाय है. 28 अक्टूबर को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही ये महापर्व संपन्न हो जाएगा. छठ के दूसरे दिन को खरना कहा जाता है. ये कल मनाया जाने वाला है. खरना के दिन गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाए जाने की परंपरा है.

ये प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाया जाता है. इतना ही नहीं प्रसाद बनाने के लिए चूल्हे में लगाने के लिए सिर्फ आम की लकड़ी का उपयोग किया जाता है. किसी दूसरी लकड़ी से यह प्रसाद नहीं बनाया जाता, लेकिन ऐसा करने के पीछे की वजह क्या है? आइए जानते हैं इसके पीछे की परंपरा और धार्मिक कारण.

खरना का महत्व

छठ का दूसरा यानी खरने के दिन का खास महत्व धर्म शास्त्रों में बताया गया है. खरना का अर्थ होता है. ‘शुद्धता’. खरने के दौरान व्रतियों के द्वारा स्वच्छता और पवित्रता का पूरा ध्यान रखा जाता है. मान्यताओं के अनुसार, वो खरने का दिन होता है, जब छठी का घर में प्रवेश होता है. खरना का दिन पूर्ण रूप से भक्ति और समर्पण का माना जाता है. इस दिन सूर्य देव और छठी मैया का आशीर्वाद मिलता है.

See also  शारदीय नवरात्र 2025: 27 साल बाद बना दुर्लभ योग, पूजा का मिलेगा विशेष फल

प्रसाद बनाने के लिए आम की लकड़ी का उपयोग क्यों?

खरना की शाम मिट्टी का चूल्हा बनाया जाता है. इस चूल्हे में आम की लकड़ियां उपयोग की जाती हैं. आम की लकड़ी शुद्ध और सात्विक मानी जाती है. मान्यता है कि आम की लकड़ी छठी मैया को बहुत प्रिय है, इसलिए छठ के अवसर पर प्रसाद बनाने के लिए आम की लकड़ियों का उपयोग होता है. इस लकड़ी से प्रसाद बानने पर घर में सकारात्मक उर्जा आती है.

खरना की विधि

    खरना के दिन व्रती महिलाओं द्वारा मिट्टी के नए चूल्हे पर गुड़ और चावल की खीर बनाई जाती है.
    ये खीर पीतल के बर्तन में गुड़, चावल और दूध से तैयार की जाती है.
    साथ ही गेहूं के आटे से बनी रोटी, पूड़ी या ठेकुआ बनाया जाता है.
    इस खीर का भोग छठी मैया को लगता है.
    इसके बाद इसे सभी लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.
    फिर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है.

See also  इतिहास में है रूचि तो यह फील्ड होगी आपके लिए सबसे बेस्ट