शादी से पहले शारीरिक संबंध क्यों, सुप्रीम कोर्ट ने एक विधवा के लिव-इन-रिलेशनशिप को लेकर सवाल उठाए, जाने जज ने क्या कहा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक विधवा के लिव-इन-रिलेशनशिप को लेकर सवाल उठाए हैं। लिव-इन-रिलेशनशिप पर यह सवाल उठाया है, सुप्रीम कोर्ट में एकमात्र महिला जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने। सर्वोच्च अदालत ने यह सवाल शादी के कथित झूठे वादे के नाम पर रेप के आरोप के मामले की सुनवाई के दौरान उठाया है।

 

शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट में जिस मामले की सुनवाई हो रही है, उसमें एक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने एक विधवा शिकायतकर्ता के साथ कथित रूप से शादी का वादा करके संबंध बनाए और उससे एक बच्चा भी हो गया। लाइवलॉ के मुताबिक इसी मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने यह टिप्पणी की है।

 

 

‘कहा जाता है कि हम पीड़ित को शर्मिंदा कर रहे हैं’

इस दौरान जस्टिस नागरत्ना ने यह टिप्पणी तक की कि, ‘देखिए, जब हम ऐसे सवाल पूछते हैं तो यह तक कहा जाता है कि हम पीड़ित को शर्मिंदा कर रहे हैं, यह क्या है?’

 

 

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुनवाई

  • दरअसल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ पूर्व लिव-इन-पार्टनर की ओर से शादी के वादे के नाम पर यौन शोषण को लेकर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया था।
  • सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देने वाली महिला शिकायतकर्ता की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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18 साल की विधवा को शादी का वादा कर फंसाया!

  • शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि आरोपी ने उसे यह बात छिपाकर बहुत कम उम्र में फंसा लिया कि वह पहले से शादीशुदा है।
  • सुनवाई के दौरान महिला के वकील ने कहा कि आरोपी शिकायतकर्ता के एक रिश्तेदार का दोस्त था और जब वह बहुत कम उम्र (18 साल) में विधवा हो गई, तो उसकी कमजोर स्थिति का फायदा उठाते हुए उसे अपनी बातों में फंसा लिया।
  • दलील दी गई कि आरोपी ने उससे शादी का वादा किया था,इसी भरोसे के साथ महिला रिलेशनशिप में गई, लेकिन उसका शारीरिक शोषण किया और बाद में उसे छोड़ दिया।

 

आरोपी और शिकायतकर्ता 15 साल साथ में रहे

इसपर जस्टिस नागरत्ना ने पूछा, ‘जब संबंध सहमति से हो, तो अपराध का प्रश्न कहां है? वे साथ में रह रहे हैं और उससे उसका एक बच्चा भी है और फिर शादी नहीं है और तब वह कहती है कि यौन शोषण? कितने दिनों तक दोनों साथ रहे? वे 15 वर्षों तक साथ में रहे…। ‘

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‘लिव-इन-रिलेशनशिप का यही जोखिम है’

जस्टिस नागरतन्ना ने आगे कहा कि ऐसे रिश्तों में जब दोनों पक्ष अलग होते हैं, तो अचानक अपराध का मामला नहीं बन जाता। उन्होंने कहा, ‘वह उसके साथ रही। उससे उसका एक बच्चा हुआ। वह इसलिए निकल गया, क्योंकि शादी का कोई बंधन नहीं था। वहां कानूनी बंधन नहीं है। वह निकल गया, क्योंकि यही लिव-इन-रिलेशनशिप का जोखिम है। इसलिए अगर एकबार निकल गया, यह आपराधिक मामला नहीं बन जाता।’

 

 

बच्चे के लिए मेंटेनेंस मांगने का सुझाव

जस्टिस नागरत्ना ने शिकायतकर्ता की ओर से केस दर्ज करने में हुई अप्रत्याशित देरी पर भी सवाल उठाया। हालांकि, उन्होंने शिकायतकर्ता को सुझाव दिया कि वह बच्चे का मेंटेनेंस मांग सकती है, क्योंकि उसे नाजायज नहीं माना जा सकता।

 

आपसी समझौते पर विचार करने का भी सुझाव

उन्होंने बच्चे की आर्थिक सहायता के लिए आपसी समझौते पर विचार करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा, ‘अगर उसे जेल के अंदर भी डाल दिया जाए, तो उसको (शिकायतकर्ता) क्या फायदा मिलेगा? हम बच्चे के लिए कुछ मेंटेनेंस के बारे में सोच सकते हैं। बच्चा अब सात साल का है। इसलिए उसने (आरोपी) इसे (शिकायतकर्ता) छोड़ दिया। क्या आप समझौते के लिए तैयार होंगे? कम से कम बच्चे को कुछ आर्थिक मुआवजा दिलाया जा सकता है।’

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सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई को जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है। इस दौरान यह पता लगाया जाएगा कि क्या याचिकाकर्ता और आरोपी के बीच कोई समझौता हो सकता है। जस्टिस नागरत्ना और उनकी बेंच इस साल फरवरी में एक और मामले में भी इस तरह से रिश्तों पर सवाल उठा चुकी हैं।