भीषण गर्मी में बदला वन्यजीव गणना का समय, अब चित्तौड़गढ़ में शाम से होगी शुरुआत

चित्तौड़गढ़

राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी नियमों और परंपराओं पर भी दिखने लगा है. चित्तौड़गढ़ जिले के जंगलों में इस साल 1 मई से शुरू होने वाली वन्यजीव गणना (Wild Life Census) बेहद खास होने वाली है, क्योंकि वन विभाग ने दशकों से चली आ रही परंपरा को बदलते हुए गणना के समय में बड़ा बदलाव किया है.

सुबह नहीं, शाम से होगी शुरुआत
आमतौर पर वन्यजीवों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होती थी, लेकिन इस बार झुलसा देने वाली गर्मी को देखते हुए वन विभाग ने नया प्लान तैयार किया है. चित्तौड़गढ़ की जिला उप वन संरक्षक मृदुला सिन्हा ने बताया कि पहली बार यह गणना सुबह के बजाय 1 मई को शाम 5 बजे से शुरू होगी और अगले दिन 2 मई को शाम 5 बजे तक लगातार 24 घंटे चलेगी. यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण का सटीक डेटा मिल सके, क्योंकि गर्मी के कारण जानवर दिन में बाहर निकलने से कतरा रहे हैं.

See also  योगी सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया, विभाजन और व्यवस्थापन के लिए नई व्यवस्था शीघ्र होगी लागू

चांदनी रात में 'वॉटरहॉल' तकनीक का सहारा
यह गणना बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित की जा रही है. पूर्णिमा की दूधिया चांदनी में वन कर्मियों को बिना किसी कृत्रिम रोशनी या टॉर्च के वन्यजीवों को देखने में आसानी होती है. इसके लिए दो मुख्य तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पहली वॉटरहॉल तकनीक. चूंकि गर्मी में जानवर पानी पीने जलस्रोतों पर जरूर आते हैं, इसलिए सीतामाता सेंचुरी में 47 और बस्सी सेंचुरी में 24 पानी के कुंड चिह्नित किए गए हैं. वहीं दूसरी, हाई-टेक निगरानी तकनीक. रात के अंधेरे में सक्रिय रहने वाले पैंथर और दुर्लभ उड़न गिलहरी की सटीक पहचान के लिए सीतामाता में 22 और बस्सी में 14 अत्याधुनिक 'कैमरा ट्रैप' लगाए गए हैं.

मचान पर 24 घंटे 'पहरा'
जंगल के नालों और केनाल के पास विशेष मचान बनाए गए हैं, जहां वन विभाग की टीमें तैनात रहेंगी. एसीएफ राम मोहन मीणा और एसीएफ यशवंत कंवर के निर्देशन में कर्मचारियों को पदचिह्नों (Pugmarks) की पहचान और कैमरा ट्रैप प्रबंधन की विशेष ट्रेनिंग दी गई है. मचान पर बैठने वाले स्टाफ के लिए भोजन और पानी का इंतजाम भी विभाग द्वारा किया गया है.

See also  विजयन ने बैंकों से वायनाड में भूस्खलन में मरने वालों और प्रभावितों का कर्ज माफ करने का आग्रह किया