दिल्ली में सीवर के पानी से दूर होगा जल संकट? रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा प्लान

नई दिल्ली

दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने राजधानी में जल संकट को दूर करने के लिए कई नए उपायों की घोषणा की है। भीषण गर्मी के बीच हो रही किल्लत को स्वीकार करते हुए दिल्ली सरकार ने पिछली सरकारों को इसके लिए कसूरवार ठहराया तो यह भी बताया कि अब स्थिति में बदलाव के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने मंगलवार को बताया कि उनकी सरकार सीवर के पानी को साफ करके भी पानी की कमी को पूरा करने पर विचार कर रही है। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे सीवर के पानी को ट्रीट करके टॉयलेट या गाड़ी धोने जैसे काम में लाया जा सकता है।

प्रवेश वर्मा ने बताया कि दिल्ली में रोजाना 1000 एमजीडी पानी घरों में सप्लाई हो रहा है। इसमें से 800 एमजीडी पानी प्रतिदिन सीवर में लौटता है, जबकि केवल 200 एमजीडी पानी का इस्तेमाल लोग पीने या अन्य उपभोग में लाते हैं। प्रवेश वर्मा ने कहा कि सीवर के पानी को एसटीपी प्लांट में इतना ट्रीट किया जाएगा कि वह पीने लायक बन जाएगा। लेकिन फिलहाल उन्हें टायलेट आदि में यूज किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'इस पानी को सबसे पहले सरकारी इमारतों में पहुंचाया जाएगा। इसके बाद कॉलोनियों में डबल पाइपलाइन से पानी पहुंचाया जाएगा। जो लोग डबल पाइपलाइन लगवाएंगे उन्हें बिल में छूट दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि एसटीपी में साफ किए गए पानी का इस्तेमाल लोग शौचालय, पौधे में डालने, गाड़ी धोने आदि कामों के लिए कर सकेंगे। इससे मीठे पानी की बचत होगी। प्रवेश वर्मा ने कहा कि कि इससे रोजाना करोड़ों लीटर पानी बचाया जा सकता है।

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कम हो रहा उत्पादन
प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली में पानी की कमी को लेकर जानकारी मिल रही है। जनसंख्या के आधार पर अगर सभी को पानी मिले तो कुल मांग 1250 एमजीडी की है। लेकिन इतना उत्पादन नहीं होता है। आज के दिन में हरियाणा सरकार से लगभगएक हजार क्यूसेक पानी मिल रहा है। वजीराबाद में पानी सूख गई है जिसके चलते वहां प्लांट में पानी नहीं आ रहा है। वहां 200 क्यूसेक पानी से ज्यादा खींचा जाता था जो अभी केवल 75 क्यूसेक ही मिल रहा है।

पिछली सरकारों पर फोड़ा ठीकरा
प्रवेश वर्मा ने कहा कि टैंकर के माध्यम से लोगों को पानी पहुंचाया जा रहा है। जहां पिछली सरकारों ने पानी की पाइपलाइन नहीं डाली तो वहां टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। पिछले साल के मुकाबले दोगुने टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। पिछली सरकार 200 नए बोरवेल लगाती थी जबकि हमारी सरकार ने 560 बोरवेल लगाए हैं। पानी की समस्या पिछले एक साल की नहीं है। पिछली सरकार ने अगर बंदोबस्त किया होता तो इतनी परेशानी नहीं आती। आप सरकार ने अपने अंतिम वर्ष में लगभग 1200 करोड़ इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया था जबकि इस वर्ष जल बोर्ड ने लगभग 2900 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

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पुरानी पाइपलाइन को बदला जाएगा
मंत्री ने कहा कि दिल्ली में दशकों पुरानी पाइप लाइन से पानी लीक होता है। इन सभी पाइपलाइंस को बदलने के लिए योजना बन चुकी है। दिल्ली को हमने आठ जोन में बांटा है। चंद्रावल का टेंडर हो चुका है जबकि आगामी वजीरगंज जोन नवंबर तक टेंडर कर कंपनी को सौंप दिया जाएगा। दिल्ली सरकार पानी लीकेज को कम करने के लिए प्रयास कर रही है। यह कंपनिया सभी पाइपलाइन को बदलेगी और पानी का रिसाव खत्म करेगी। पिछले सवा साल में हमारी सरकार की पांच उपलब्धियों में से एक इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क को कम करना है। दिल्ली की 52 फीसदी पुरानी पाइपलाइन को बदला जाएगा

कनाल का पानी पाइपलाइन से आएगा
हरियाणा से कैनाल के माध्यम से आने वाले पानी को पाइपलाइन के माध्यम से लाया जाएगा। रास्ते में किसान भाई निकाल लेते हैं। अन्य लोग भी पानी निकाल लेते हैं। इसलिए पाइपलाइन डालने की तैयारी की जा रही है। दिल्ली का पानी का कोटा तय है। हमने बांध के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार को पैसा दिया है जिससे 2032 से पानी मिलने लगेगा।

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