योगी सरकार का सख्त एक्शन: लापरवाह बिल्डरों पर कसेगा शिकंजा

लखनऊ

 यूपी की योगी सरकार हाईटेक टाउनशिप योजनाओं में सुविधाओं के नाम पर खानापूर्ति करने वाले बिल्डरों के खिलाफ शिकंजा कसने जा रही है। टाउनशिप में सुविधाओं की जांच कराई जाएगी और देखा जाएगा कि आवंटियों को वादे के मुताबिक चीजें मिली हैं या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि विस्तार या क्षेत्रफल कम करने वाले बिल्डरों ने अब तक कितना काम कराया है। संशोधित डीपीआर देने की क्या स्थिति है। इसमें खामियां मिलने पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है।

हाईटेक टाउनशिप योजना में विकास प्राधिकरणों द्वारा 13 बिल्डरों को निजी क्षेत्र में टाउनशिप विकसित करने का लाइसेंस दिया गया था। इनमें से सात परियोजनाएं ही शुरू हुईं और शेष शुरू नहीं हो पाईं। आवास विभाग रुकी हुई परियोजनाओं को शुरू करने के लिए हाईटेक टाउनशिप नीति में संशोधन किया और बिल्डरों को एक बार फिर से काम करने का मौका दिया। टाउनशिप में 1500 एकड़ तक क्षेत्रफल करने की सुविधा बिल्डरों को दी गई। परियोजना अवधि में समय विस्तार शुल्क देकर संशोधित डीपीआर स्वीकृत कराने और पांच साल तक काम करने का मौका दिया गया।

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बिल्डरों को रुकी हुई टाउनशिप पूरी करने का पूरा मौका दिया गया। शासन को इसके बाद भी जानकारी मिल रही है कि कुछ बिल्डर इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं और रुकी हुई योजनाओं को पूरा करने व डीपीआर देने में हीला हवाली कर रहे हैं। पिछले दिनों बुलंदशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण द्वारा नोएडा में टाउनशिप लाने के लिए उत्तम स्टील्स एंड एसोसिट का लाइसेंस निरस्त किया गया है।

लाइसेंस निरस्त करने का कारण बताया गया कि कंपनी ने परियोजना की स्वीकृति के लगभग 17 वर्ष बाद टाउनशिप स्थल पर केवल 10 प्रतिशत ही विकास कार्य कराया। इसीलिए उच्च स्तर पर प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों से रिपोर्ट मांगी गई है। उनसे पूछा गया है कि उनके द्वारा हाईटेक टाउनशिप लाइसेंस लेकर कितने बिल्डरों ने काम कराया है। विस्तार करने या फिर संशोधित डीपीआर देने की क्या स्थिति है। इसके आधार पर गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।

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बताया जाता है कि हाईटेक टाउनशिप नीति के तहत निजी बिल्डरों को बड़े भूखंडों पर अत्याधुनिक सुविधाएं देने के लिए लाइसेंस दिए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। शासन के संज्ञान में आया है कि कई बिल्डरों ने टाउनशिप के क्षेत्रफल को 1500 एकड़ तक बढ़ाने की सुविधा तो ली, लेकिन इसके लिए आवश्यक संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अब तक जमा नहीं की है। बुलंदशहर में उत्तम स्टील्स एंड एसोसिएट्स का लाइसेंस रद्द होना एक बड़ी चेतावनी है, क्योंकि इस कंपनी ने 17 साल में केवल 10 प्रतिशत काम किया था।