किस्मत जब मारती है, तो संभलने का एक मौका तक नहीं देती. जिस घर में कल तक चार मासूम भाइयों की हंसी और किलकारियां गूंजती थीं, आज वहां सिर्फ सन्नाटा और बिखरी हुई चीखें हैं. मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी थाना क्षेत्र का विक्रमपुर गांव सोमवार को एक ऐसे खौफनाक और दर्दनाक मंजर का गवाह बना, जिसे सुनकर हर किसी की रूह कांप उठी. चार सगे मासूम भाई खेलते-खेलते कुएं में जा गिरे और फिर कभी वापस नहीं लौटे.
बदकिस्मत पिता बलवीर कुशवाहा के लिए दुखों का यह पहाड़ किसी बज्रपात से कम नहीं है. कुछ समय पहले ही पत्नी साथ छोड़कर मायके चली गई थी. चार-चार मासूमों के सिर से मां का साया उठ चुका था, लेकिन मजदूर पिता अपनी बूढ़ी मां के सहारे दिन-रात मेहनत मजदूरी कर अपने जिगर के टुकड़ों को पाल रहा था. उसे क्या पता था कि जिस जिंदगी को वह तिनका-तिनका जोड़कर संवार रहा था, वजूद का वह आशियाना एक ही झटके में पूरी तरह तबाह हो जाएगा. शाम तक जब एक-एक कर चारों मासूमों के शव कुएं से बाहर निकाले गए तो गांव में चीख-पुकार मच गई. जिस घर में चार भाइयों की किलकारियां गूंजती थीं वहां अब मातम पसरा है.
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मृतकों की पहचान 9 वर्षीय देव, 7 वर्षीय त्रिदेव, 6 वर्षीय महादेव और 4 वर्षीय प्रियंश के रूप में हुई है. चारों बलवीर कुशवाहा के बेटे थे. बलवीर मजदूरी कर परिवार का पेट पालते हैं. बताया गया कि बच्चों की मां कुछ समय से मायके में रह रही हैं, जबकि चारों भाई अपनी दादी के साथ रहते थे. सोमवार की सुबह चारों भाई घर से खेलने के लिए निकले थे. दादी को भरोसा था कि बच्चे खेलकर वापस लौट आएंगे. लेकिन समय बीतता गया और मासूम घर नहीं लौटे. दादी ने गांव में बच्चों को तलाशना शुरू किया. उन्हें अंदाजा तक नहीं था कि चारों भाई करीब डेढ़ किलोमीटर दूर खेत की तरफ चले गए हैं. गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक निजी खेत में कुआं है. इसी जगह परिवार का पुराना मकान भी बताया जा रहा है.
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ग्रामीणों के मुताबिक बच्चे पहले भी दादी के साथ यहां आया करते थे. आशंका है कि सोमवार को खेलते-खेलते चारों भाई खेत तक पहुंच गए और कुएं में जा गिरे. लेकिन हैरान कर देने बाली बात यह है कि कुएं में बच्चों के गिरने की जानकारी काफी देर तक किसी को नहीं हुई. बच्चे कब कुएं में गिरे और पानी में तड़पते रहे, किसी को भनक तक नहीं लगी. शाम को जब एक ग्रामीण की नजर कुएं पर पड़ी, तो पानी की सतह पर एक बच्चे का शव तैरता दिखा. यह खबर आग की तरह फैली और गांव के लोग सन्न रह गए. जब गोताखोरों और पुलिस ने कुएं के गहरे पानी में तलाश शुरू की, तो एक के बाद एक चारों सगे भाइयों के बेजान शरीर बाहर आने लगे.
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चार मासूमों के शव देखकर मौके पर मौजूद लोगों के होश उड़ गए. सूचना मिलते ही परिजन और चंदेरी पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से चारों बच्चों के शव कुएं से बाहर निकलवाए और चंदेरी सिविल अस्पताल भेजा. शाम को पोस्टमॉर्टम के बाद चारों बच्चों के शव परिजनों को सौंप दिए गए. चार मासूम बेटों की एक साथ मौत की खबर ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया. मां से दूर रह रहे चारों बच्चे अब कभी वापस नहीं आएंगे. परिवार के लिए यह दर्द इसलिए भी गहरा है क्योंकि एक साथ चार मासूमों की अर्थियां उठीं.
तहसीलदार दिलीप दरोगा ने बताया कि हादसा गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर निजी खेत में बने कुएं में हुआ है. प्रशासन की ओर से नियमानुसार मुआवजा देने की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है लेकिन किसी मुआवजे से उस बाप का खाली हुआ कोना नहीं भर सकता. जो पत्नी के जाने के बाद अपने चारों बेटों के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रहा था, आज उसकी गोद पूरी तरह खाली हो चुकी है. विक्रमपुर गांव में हर आंख नम है और चारों मासूमों की एक साथ उठी अर्थियों ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है.
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