ईरान में 72 प्रदर्शनकारियों की मौत, राष्ट्रपति ने अल्लाह के खिलाफ युद्ध बताकर दी सजा-ए-मौत की चेतावनी

तेहरान.

ईरान में आर्थिक तंगी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब अपने दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुके हैं। इस बीच, ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। शनिवार को ईरान के अटॉर्नी जनरल ने प्रदर्शनकारियों को 'अल्लाह का शत्रु' घोषित करते हुए उन्हें फांसी की सजा देने की धमकी दी है।

ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवहेदी आजाद ने सरकारी टेलीविजन पर बयान देते हुए कहा कि जो कोई भी इन प्रदर्शनों में शामिल है या दंगाइयों की मदद कर रहा है, उसे 'मोहारेबेह' (अल्लाह के खिलाफ युद्ध) का दोषी माना जाएगा। ईरानी कानून के तहत इस अपराध की सजा सिर्फ मौत है। उन्होंने निर्देश दिए कि बिना किसी देरी और दया के इन लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाए जाएं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी संकेत दिए हैं कि देशव्यापी स्तर पर अब बड़ा क्रैकडाउन शुरू किया जा सकता है।

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ईरान ने बाहरी दुनिया से संपर्क काटने के लिए इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन लाइनों को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके बावजूद, मानवाधिकार संस्थाओं से मिली जानकारी के अनुसार हालात बेहद चिंताजनक हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) के अनुसार, अब तक कम से कम 72 लोग मारे गए हैं। प्रदर्शनों के दौरान 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, गचसरन में बासिज बल के 3 सदस्य मारे गए हैं और हमदान, बंदर अब्बास, गिलान और मशहद में भी सुरक्षा अधिकारियों की मौत की खबरें हैं।

ट्रंप सरकार की ईरान को सख्त चेतावनी

अमेरिका ने ईरान के प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, "अमेरिका ईरान के बहादुर लोगों के साथ खड़ा है।" वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के साथ खेल न खेलें। जब वे कुछ कहते हैं, तो उसका मतलब होता है।

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क्या है इस गुस्से की वजह?

प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को ईरान की गिरती अर्थव्यवस्था के कारण हुई थी। ईरानी मुद्रा रियाल अब तक के सबसे निचले स्तर 1.4 मिलियन (14 लाख) प्रति डॉलर पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम की वजह से आम जनता दाने-दाने को मोहताज है। अब यह आर्थिक गुस्सा सीधे तौर पर देश की धार्मिक सत्ता को चुनौती देने वाले राजनीतिक विद्रोह में बदल गया है।