मध्य प्रदेश विधानसभा में 18 सालों में पहली बार हुआ ऐसा, सत्र में नजर नहीं आए शिवराज सिंह चौहान

भोपाल

मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 1 जुलाई से जारी है. इस विधानसभा सत्र की खास बात यह है कि 18 साल तक सत्र में नजर आने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) इस सत्र में नजर नहीं आ रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा संसदीय सीट से चुनाव जीतने के बाद 18 जून को विधायकी पद से इस्तीफा दे दिया है. शिवराज सिंह चौहान अब केंद्र में कृषि मंत्री हैं.

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सांसद रहते वर्ष 2005 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थे. उनके सीएम बनने के बाद वर्ष 2006 में सीहोर जिले की बुदनी विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़कर विधायक बने थे. वर्ष 2006 के बाद से ही लगातार शिवराज सिंह चौहान बुदनी विधानसभा सीट से विधायक चुनते आ रहे थे. इस दौरान वह विधानसभा सत्र की कार्यवाही में मौजूद रहते थे, लेकिन अब शिवराज सिंह चौहान ने 18 जून को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है, नतीजतन 18 साल बाद अब विधानसभा में शिवराज सिंह चौहान नजर नहीं आ रहे हैं.

See also  एमपी कर्मचारियों के अवकाश में बड़ा बदलाव! सरकार ने बनाई कमेटी, जल्द हो सकता है ऐतिहासिक फैसला

विदिशा सीट से चुने गए सांसद शिवराज सिंह
मालूम हो कि 6 महीने पहले संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बंपर जीत मिली और 163 सीटों पर काबिज हुई. हालांकि चुनाव बाद प्रदेश में सीएम का चेहरा बदल गया. शिवराज सिंह चौहान के स्थान पर डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाया गया. इधर हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान को विदिशा संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया. शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा से रिकार्ड 8 लाख मतों से जीत दर्ज की. शिवराज सिंह चौहान को केंद्र में कृषि मंत्री बनाया गया है. सांसद बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने 18 जून को विधायकी पद से इस्तीफा दे दिया है.

जारी है विधानसभा का मानसून सत्र
मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र में विधायकों ने 4287 सवाल पूछे हैं. विधानसभा के मानसून सत्र में तारांकित प्रश्न 2108 पूछे गए हैं, जबकि अतारंकित प्रश्न 2179. इस तरह कुल 4287 प्रश्न पूछे गए हैं. इनमें 2386 ऑनलाइन और 1901 ऑफलाइन प्रश्न पूछे गए हैं. यह विधानसभा सत्र काफी हंगामेदार हो रहा है. विपक्षी पार्षद नर्सिंग घोटाले को लेकर सवाल जवाब कर रहे हैं.

See also  वाणिज्यिक हानियों को कम करने के साथ ही राजस्व संग्रहण बढ़ायें : एसीएस ऊर्जा मंडलोई