उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला को यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन ने मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया

 लंदन

देश के दिग्गज उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला को यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन ने मानद उपाधि से सम्मानित किया है. इस उपाधि से नवाजे गए चार अन्य विशिष्ट व्यक्तियों में प्रोफेसर सर हिलरी बेकल्स, सर टेरी वेट, सुज़ाना स्कोफील्ड MBE और रेवरेण्ड फिलिप गोफ के साथ वे भी इस सम्मान की लिस्ट में शामिल हो गए हैं.

कुमार मंगलम बिड़ला आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन हैं. यह सौ साल पुराना लीडिंग भारतीय मल्टीनेशनल ग्रुप विदेश में कदम रखने वाला पहला भारतीय बिज़नेस हाउस भी माना जाता है. आज यह समूह छह महाद्वीपों के 41 देशों में सक्रिय है, जिसकी वार्षिक कमाई लगभग 67 अरब डॉलर और मार्केट कैपिटलाइजेशन 110 अरब डॉलर से ज्यादा है.

बिड़ला परिवार की छठी पीढ़ी से आने वाले कुमार मंगलम बिड़ला के परदादा जी.डी. बिड़ला महात्मा गांधी के करीबी थे और उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी. शिक्षा के बड़े समर्थक बिड़ला, BITS पिलानी के चांसलर हैं और IIM अहमदाबाद व IIT दिल्ली का भी नेतृत्व कर चुके हैं. वह लंदन बिजनेस स्कूल के गवर्निंग बोर्ड में भी शामिल हैं, जहां उन्होंने 15 मिलियन पाउंड की स्कॉलरशिप दी है- जो यूरोप की सबसे बड़ी स्कॉलरशिप में से एक है.

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इन हस्तियों को मिला सम्मान

कुमार मंगलम बिड़ला को Doctor of Science (Economics) की उपाधि प्रदान की गई है. यह पुरस्कार यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की चांसलर, हर रॉयल हाइनेस द प्रिंसेस रॉयल की ओर से 19 नवंबर को लंदन स्थित सीनेट हाउस में आयोजित फाउंडेशन डे समारोह में प्रदान किया गया. फाउंडेशन डे पर जिन्हें मानद डिग्री और फेलोशिप दी गई, वे हैं-

-कुमार मंगलम बिड़ला, चेयरमैन, आदित्य बिड़ला समूह- Doctor of Science (Economics)

-प्रोफेसर सर हिलरी बेकल्स, प्रोफेसर ऑफ इकोनॉमिक हिस्ट्री और वाइस-चांसलर, यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज- Doctor of Science (Social Sciences)

-सर टेरी वेट KCMG CBE, ट्रिनिटी हॉल कैंब्रिज के मानद फेलो और मानवीय कार्यों से जुड़े कई चैरिटी संगठनों के संरक्षक- Doctor of Science (Social Sciences)

-सुज़ाना स्कोफील्ड MBE, जिन्होंने अपने पति जॉन स्कोफील्ड (जो क्रोएशिया में रिपोर्टिंग करते समय मारे गए) की स्मृति में John Schofield Trust की स्थापना की- Doctor of Literature

-रेवरेण्ड फिलिप गोफ, अकादमिक ड्रेस पर विशेषज्ञ- Honorary Fellowship

'उन्होंने लाखों लोगों के जीवन में सुधार किया'

यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ की चेयर कविता रेड्डी ने कहा, 'हमें बेहद खुशी है कि हम कुमार मंगलम बिड़ला को उद्योग और परोपकार में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद डिग्री से सम्मानित कर रहे हैं. उनकी सामाजिक पहलों ने लाखों लोगों के जीवन में सुधार किया है. भारत और यूके में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक लोगों तक पहुंचाने के उनके प्रयास यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के मूल्यों से मेल खाते हैं- दूसरों की मदद करने का जज्बा, शिक्षा का महत्व और विभाजन के बजाय एकता का संदेश.'

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उन्होंने कहा, 'हमारे सभी सम्मानित व्यक्तियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और वे इन मूल्यों को आगे बढ़ाते हैं. फाउंडेशन डे पर उन्हें सम्मानित करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है.'

'यह मेरे लिए गर्व की बात है'

कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा, 'यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से यह सम्मान पाकर मैं बेहद कृतज्ञ महसूस कर रहा हूं. विशेष रूप से यह मेरे लिए गर्व की बात है कि यह सम्मान हर रॉयल हाइनेस, प्रिंसेस ऐन, द प्रिंसेस रॉयल की ओर से प्रदान किया गया. लंदन बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र के रूप में मैंने देखा है कि यह विश्वविद्यालय कैसे महत्वाकांक्षा को उपलब्धियों में बदलता है. मेरा परिवार हमेशा मानता आया है कि शिक्षा प्रगति का सबसे सशक्त साधन है, जो अवसरों का विस्तार करती है और समाज को बदलने की क्षमता रखती है. ऐसी संस्था की ओर से सम्मानित होना, जो इन मूल्यों को जीती है और नई पीढ़ियों को अप्रत्याशित दुनिया का सामना करने के लिए तैयार करती है, मेरे लिए प्रेरणादायक है.'

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हर साल यूनिवर्सिटी मनाती है फाउंडेशन डे

हर साल यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन फाउंडेशन डे मनाती है. यह दिन विश्वविद्यालय के वार्षिक कैलेंडर की एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो 28 नवंबर 1836 को किंग विलियम IV की ओर से दिए गए संस्थान के पहले रॉयल चार्टर की याद दिलाती है. इस समारोह का मुख्य हिस्सा मानद उपाधियों और फैलोशिप प्रदान करना होता है. इस परंपरा की शुरुआत 1903 में हुई थी. इसके शुरुआती सम्मानित व्यक्तियों में वेल्स के प्रिंस और प्रिंसेस (जो बाद में किंग जॉर्ज V और क्वीन मैरी बने) शामिल थे.

फाउंडेशन डे 2025 के कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के छात्र और स्टाफ, इसकी 17 फेडरेशन मेंबर संस्थाओं के प्रतिनिधि, दुनिया भर में बने इसके रीजनल टीचिंग सेंटर्स के सदस्य और विश्वविद्यालय से लंबे समय से जुड़े लोग शामिल हुए.