इंदौर में 72 साल पुराने शास्त्री ब्रिज का होगा पुनर्निर्माण, 140 करोड़ में बनेगा आधुनिक पुल

इंदौर
72 साल पुराना लालबहादुर शास्त्री ब्रिज तोड़कर इसके स्थान पर रेलवे 140 करोड़ रुपये खर्च कर नया ब्रिज बनाएगा। नए ब्रिज की चौड़ाई वर्तमान के मुकाबले डेढ़ गुना और ऊंचाई दो मीटर अधिक होगी। शुक्रवार को नगर निगम, मेट्रो और रेलवे के अधिकारियों ने शास्त्री ब्रिज का दौरा किया। देर शाम सांसद शंकर लालवानी ने अधिकारियों की बैठक ली।

उन्होंने बताया कि ब्रिज निर्माण की लागत तो रेलवे वहन करेगा, लेकिन सीवेज, पानी की लाइन, बिजली के पोल इत्यादि मूलभूत सुविधाएं नगर निगम जुटाएगा। सांसद के अनुसार नया ब्रिज संभागायुक्त कार्यालय के पास से शुरू होकर खादीवाला पेट्रोल पंप के पास खत्म होगा। वर्तमान के मुकाबले इसकी लंबाई 38 मीटर अधिक होगी।
 
रेलवे तीसरा ट्रैक बिछा सकेगा
आमतौर पर जब भी किसी रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) को दोबारा बनाना होता है तो खर्च स्थानीय निकाय को वहन करना होता है, लेकिन नया शास्त्री ब्रिज बनने से रेलवे इंदौर से लक्ष्मीबाई नगर तक तीसरा ट्रैक बिछा सकेगा और प्लेटफार्म की लंबाई भी बढ़ जाएगी, यही वजह है कि रेलवे इस आरओबी को दोबारा बनाने का खर्चा वहन करने को तैयार हो गया है।

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शास्त्री ब्रिज की बिगड़ती स्थिति और इस पर यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए सांसद शंकर लालवानी ने पिछले दिनों रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से चर्चा की थी। इसके बाद रेलवे इस ब्रिज का खर्चा वहन करने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया।

शुक्रवार को नगर निगम, मेट्रो और रेलवे के अधिकारियों के शास्त्री ब्रिज के संयुक्त दौरे में इस बात का आकलन किया गया कि नया ब्रिज बनाने की स्थिति में किन-किन सीवेज लाइन, पानी की लाइन और बिजली के पोल की शिफ्टिंग करनी होगी और इस पर कितना खर्चा आएगा। नगर निगम अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने बताया कि निगम के इंजीनियरों ने रेलवे के इंजीनियरों को लाइनों की ड्राइंग दे दी है। जल्द ही निगम आर्थिक आकलन तैयार कर लेगा।

12 जनवरी 1953 को हुआ था शुरू
वर्तमान शास्त्री ब्रिज का लोकार्पण 12 जनवरी 1953 को हुआ था। तत्कालीन परिवहन मंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इसे लोकार्पित किया था। यह ब्रिज पिछले 72 वर्ष से पूर्व और पश्चिम इंदौर को जोड़ने के लिए रीढ़ की हड्डी बना हुआ है।

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टूटने पर आएगी आवागमन की परेशानी
इस ब्रिज से शहर के लगभग सभी मुख्य बाजार सीधे-सीधे जुड़े हैं। शास्त्री ब्रिज के टूटने से आवागमन की भारी परेशानी आएगी। एमजी रोड पर मेट्रो अंडर ग्राउंड प्रस्तावित है, इसलिए इस प्रोजेक्ट में कोई विशेष दिक्कत नहीं आएगी।

पिछले दिनों चूहों ने कुतर दिया था
वर्ष 1953 में जब यह ब्रिज शुरू हुआ था उस वक्त यह मध्य भारत का पहला टू-टू लेन रेलवे ओवरब्रिज था। हाल ही में शास्त्री ब्रिज को चूहों ने कुतर दिया था। इस वजह से बड़ा गड्ढा हो गया था।

जीर्ण-शीर्ण हो चुका है
रखरखाव के अभाव में शास्त्री ब्रिज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। हालांकि रेलवे ने इसे अब तक अनफिट घोषित नहीं किया है।

टेंडर में लगेंगे छह माह, 15 माह में होगा निर्माण
रेलवे सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित ब्रिज के लिए सर्वे, डिजाइन और ड्राइंग तैयार कर टेंडर होने में कम से कम छह माह लगेंगे। टेंडर तय होने के बाद रेलवे ने इस ब्रिज को 15 माह में तैयार करने का लक्ष्य रखा है।

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