‘पिंक सहेली कार्ड’ पर भरोसा कम: सिर्फ 6% महिलाओं ने किया इस्तेमाल

नई दिल्ली
दिल्ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ योजना फिलहाल उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने में करीब 5.56 लाख कार्ड जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल 5 से 6 प्रतिशत यानी करीब 6,000 से 8,000 महिलाएं ही इनका इस्तेमाल कर रही हैं।

पुरानी व्यवस्था से नए सिस्टम में बदलाव बना चुनौती
इस योजना की शुरुआत 2 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की थी। इसका उद्देश्य पिछली आप सरकार द्वारा 2019 में शुरू किए गए पिंक टिकट सिस्टम को खत्म कर केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन कार्ड’ (NCMC) प्रणाली लागू करना था। इसके जरिए यह सुनिश्चित करना भी मकसद था कि केवल दिल्ली में रहने वाली 12 साल से ऊपर की महिलाएं ही मुफ्त यात्रा का लाभ ले सकें। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर अब भी बड़ी संख्या में महिलाएं पुराने पिंक टिकट का ही इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे नई व्यवस्था का प्रभाव सीमित रह गया है।

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रोजाना 6-7 लाख महिला यात्री, फिर भी कार्ड का कम उपयोग
दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के अनुसार, राजधानी में रोजाना करीब 23 लाख लोग बसों में सफर करते हैं, जिनमें 6 से 7 लाख महिलाएं शामिल होती हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से आधी से भी कम महिलाएं पिंक स्मार्ट कार्ड का उपयोग कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अभी भी टिकट सिस्टम पर निर्भर हैं, जिससे योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा।

अब होगा सर्वे और फिर सख्ती
DTC अब इस कम उपयोग के पीछे के कारणों को समझने के लिए सर्वे कराने की तैयारी में है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि क्या महिलाओं के पास कार्ड नहीं है, क्या वे अन्य राज्यों से हैं या फिर बस कंडक्टर कार्ड इस्तेमाल के लिए प्रेरित नहीं कर रहे है। इसके अलावा, बसों में औचक निरीक्षण भी की जाएगी, ताकि यह देखा जा सके कि कार्ड का इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा।

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जुलाई से अनिवार्य हो सकता है कार्ड
अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई से पिंक सहेली कार्ड को अनिवार्य किया जा सकता है, और धीरे-धीरे पिंक टिकट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इससे पहले मई-जून में बसों के अंदर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

450 करोड़ का है बजट
महिलाओं की मुफ्त यात्रा योजना पहली बार 2019 में लागू की गई थी, जिसके तहत अब तक 150 करोड़ से ज्यादा पिंक टिकट जारी किए जा चुके हैं। वहीं, मौजूदा सरकार ने इस योजना को जारी रखते हुए 2026-27 बजट में 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे यह साफ है कि सरकार इस सुविधा को और मजबूत करना चाहती है।

कैसे बनता है पिंक सहेली कार्ड?
फिलहाल यह कार्ड दिल्ली के 58 केंद्रों पर जारी किया जा रहा है। इसके लिए दिल्ली का आधार कार्ड जरूरी है, आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए, 12 साल या उससे अधिक उम्र की कोई भी महिला आवेदन कर सकती है।

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