किसान क्रेडिट कार्ड: यूपी में खेती के लिए आसान कर्ज और आर्थिक सहारा

लखनऊ

खेती में खर्चों का सिलसिला फसल बेचने से पहले शुरू हो जाता है। किसान को बीज खरीदने होते हैं। खाद और सिंचाई का इंतजाम करना होता है। मजदूरी और मशीन का खर्च भी कई बार तुरंत आ जाता है। ऐसे समय में किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को समय पर कर्ज़ लेने में मदद करता है। इससे उन्हें महंगे कर्ज़ पर निर्भर रहने की जरूरत कम होती है और गांव की कमाई और खेती से जुड़ी गतिविधियां मजबूत होती हैं।

किसानों तक पहुंच रही कर्ज़ की सुविधा
वर्ष 2017 से 2025 तक उत्तर प्रदेश में खेती के लिए 13,42,978.3 करोड़ का कर्ज़ दिया गया। इसके साथ ही नवंबर 2025 तक 492.46 लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। यह दिखाता है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में किसानों तक खेती के लिए कर्ज़ की सुविधा पहुंची है।

किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए कर्ज़लेने में मदद करता है। यह सुविधा बुवाई, फसल की देखभाल और कटाई की तैयारी के समय बहुत काम आती है। कई बार किसान को फसल बेचने से पहले ही पैसों की जरूरत पड़ती है। किसान क्रेडिट कार्ड इसी जरूरत को पूरा करता है।

गांवों के लिए क्यों जरूरी है किसान क्रेडिट कार्ड
गांव में खेती रुकती है तो कई छोटे काम भी रुक जाते हैं। किसान बीज खरीदता है तो दुकान चलती है। मजदूरी देता है तो गांव में आमदनी बढ़ती है। मशीन किराए पर लेता है तो स्थानीय कामकाज को भी सहारा मिलता है।

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किसान क्रेडिट कार्ड अचानक आने वाली खेती की जरूरतों में भी मदद करता है। किसान को फसल बिकने का इंतजार नहीं करना पड़ता। वह जरूरी खर्च के लिए कर्ज़ का उपयोग कर सकता है। इससे खेती का काम बिना रुकावट आगे बढ़ता है।

किसान क्रेडिट कार्ड की मुख्य जानकारी
ये आंकड़े बताते हैं कि किसान क्रेडिट कार्ड और फसल ऋण उत्तर प्रदेश की गांव की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन रहे हैं।

छोटे और सीमांत किसानों को मदद
किसान क्रेडिट कार्ड छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत उपयोगी है। ऐसे किसानों के पास अक्सर बचत कम होती है। खेती का खर्च फसल से होने वाली कमाई से पहले आ जाता है। किसान को बीज, सिंचाई, डीजल, खाद या मजदूरी के लिए तुरंत पैसों की जरूरत पड़ सकती है। कर्ज़ की सुविधा मिलने से किसान बिना समय गंवाए खेती का काम जारी रख पाते हैं।

प्रदेश में किसानों के लिए दूसरे कदम भी उठाए गए हैं। वर्ष 2017 के बाद 86 लाख से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को पुराने कर्ज़ का बोझ कम करने में मदद मिली। पीएम-किसान के तहत 3.12 करोड़ किसानों को 22 किस्तों में 99,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली। इन कदमों से किसानों को सीधी आर्थिकमदद मिली और खेती की जरूरतों में सहारा मिला।

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फसल नुकसान पर मदद
खेती में कर्ज़ सुविधा तब और उपयोगी होती है जब फसल नुकसान के समय भी किसानों को सहायता मिले। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2017-18 से 2025-26 के बीच 353.14 लाख बीमा वाले किसानों को 5,660.33 करोड़ रुपये की मदद राशि मिली। इससे फसल खराब होने पर किसानों पर आर्थिक दबाव कम होता है।

किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसानऔर फसल बीमा मिलकर किसानों को मजबूत सहारा देते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड खेती से पहले और खेती के दौरान पैसों की सुविधा देता है। पीएम-किसान सीधी आर्थिक मदद देता है। फसल बीमा नुकसान के समय सहारा देता है।

सहकारी बैंकों से बढ़ी कर्ज़ की सुविधा
गांवों में ककर्ज़ सुविधा को सहकारी बैंकों से भी मजबूती मिलती है। वर्ष 2017 से 2025 के बीच उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक का कर्ज़ वितरण 9,190 करोड़ रुपये से बढ़कर 23,061 करोड़ रुपये हो गया। बैंक का शुद्ध लाभ 32.82 करोड़ रुपये से बढ़कर 100.24 करोड़ रुपये हो गया। जिला सहकारी बैंकोंका कुल कारोबार भी 28,349 करोड़ रुपये से बढ़कर 41,234 करोड़ रुपये हो गया।

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सहकारी बैंक गांवों और किसानों से सीधे जुड़े होते हैं। जब ये बैंक मजबूत होते हैं, तो किसानों और गांव के छोटे कारोबारों को कर्ज़ लेना आसान होता है। इससे खेती, छोटे व्यापार और स्थानीय कामकाज को मदद मिलती है।

बीज और खेती की जरूरतों में मदद
खेती के लिए कर्ज के साथ अच्छे बीज और जरूरी सामग्री भी समय पर मिलनी चाहिए। वर्ष 2017-18 से 2025 तक किसानों को 546.85 लाख क्विंटल अच्छी गुणवत्ता वाले बीज बांटे गए। इससे किसानों को बेहतर बीज की सुविधा मिली।

जब किसानों को कर्ज और खेती की सामग्री दोनों समय पर मिलते हैं, तो खेती की तैयारी बेहतर होती है। किसान बुवाई और फसल की देखभाल की योजना सही तरीके से बना पाते हैं।

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