क्या बंद हो जाएंगे कागज के नोट? RBI गवर्नर ने प्लास्टिक करेंसी को लेकर दिया बड़ा अपडेट

मुंबई
 भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की मुद्रा को लेकर एक बहुत बड़ी जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि आरबीआई भारत में प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट चलाने के विचार पर काम कर रहा है. हालांकि, गवर्नर ने यह साफ किया कि यह योजना अभी बिल्कुल शुरुआती दौर में है और इस पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है. बैंक अभी इसके हर फायदे और नुकसान की अच्छे से जांच कर रहा है। 

पहले क्यों नहीं चल पाए थे प्लास्टिक के नोट?
भारत में प्लास्टिक के नोट चलाने की कोशिश पहले भी हो चुकी है. साल 2014 के आसपास सरकार ने देश के पांच शहरों—जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि में 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का एक छोटा सा टेस्ट (ट्रायल) किया था. लेकिन उस समय यह तरीका सफल नहीं हो पाया. इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि देश के ATM और बैंकों की नोट गिनने वाली मशीनें केवल कागजी नोटों के हिसाब से बनी थीं. प्लास्टिक के नोटों की वजह से मशीनें बार-बार जाम होने लगीं. साथ ही, भारत की तेज गर्मी में इन नोटों के आपस में चिपकने और सिकुड़ने का डर भी था. इसी वजह से तब इस काम को रोक दिया गया था. अब आरबीआई इन सभी पुरानी कमियों को दूर करने की तैयारी कर रहा है। 

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क्या होते हैं पॉलीमर नोट और इनके क्या फायदे हैं?
प्लास्टिक या पॉलीमर नोट किसी कड़क प्लास्टिक कार्ड (जैसे एटीएम कार्ड) की तरह नहीं होते. ये एक खास तरह के बहुत पतले और लचीले प्लास्टिक (BOPP) से बनते हैं. इन्हें आप आम कागजी नोटों की तरह ही आसानी से मोड़कर जेब या पर्स में रख सकते हैं. इन नोटों के कई बड़े फायदे हैं:

    ज्यादा मजबूती: ये नोट पानी या पसीने से गलते नहीं हैं और आसानी से फटते भी नहीं हैं. इसलिए ये बहुत लंबे समय तक चलते हैं। 

    गंदगी का असर नहीं: इन नोटों पर धूल, मिट्टी या पानी का असर नहीं होता, जिससे ये गंदे और काले नहीं पड़ते। 

    नकली नोटों पर रोक: प्लास्टिक के नोटों पर ऐसे सुरक्षा घेरे (सिक्योरिटी फीचर्स) लगाए जा सकते हैं, जिनकी नकल करना नामुमकिन होता है. इससे देश में नकली नोटों का धंधा पूरी तरह बंद हो जाएगा। 

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    पैसों की बचत: हालांकि इन्हें छापने का शुरुआती खर्च ज्यादा होता है, लेकिन लंबे समय तक चलने के कारण बार-बार नए नोट छापने का सरकारी खर्च बच जाता है। 

दुनिया के कई देशों में है यह व्यवस्था
दुनिया में सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने साल 1988 में प्लास्टिक के नोटों का इस्तेमाल शुरू किया था. आज के समय में ब्रिटेन (यूके), कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड समेत दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में प्लास्टिक के नोट बहुत कामयाबी से चल रहे हैं. आरबीआई गवर्नर ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि इस नए बदलाव के दौरान देश में पैसों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।