महादेव बेटिंग ऐप के संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार, फर्जी पासपोर्ट का आरोप

रायपुर.

महादेव ऑनलाइन सट्‌टा ऐप के संचालक सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार किया गया है। सौरभ की गिरफ्तारी के बाद अब उसका फर्जी पासपोर्ट वायरल हो रहा है, जिसमें तस्वीर तो सौरभ की है, लेकिन नाम श्रीलंकाई क्रिकेटर अजंता मेंडिस का दर्ज है।

ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि उसने प्रत्यर्पण से बचने के लिए ये साजिश रची थी। जांच एजेंसियों की माने को सौरभ चंद्राकर ने फर्जी पासपोर्ट के जरीए ओमान में एंट्री की थी। पासपोर्ट संख्या E3387986 पर जारी इस दस्तावेज में उसे 11 मार्च 1998 को जन्मा दक्षिण-पूर्व एशियाई नागरिक दर्शाया गया है।

जांच में जुटी जांच एजेंसियां
दस्तावेज के अनुसार, यह पासपोर्ट 21 जून 2024 को जारी हुआ और 21 जून 2034 तक वैध बताया गया है। अब एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इस फर्जी पहचान का उपयोग किस नेटवर्क के जरिए किया गया।

दस्तावेजों में मिली अलग पहचान और जन्मतिथि
जांच में यह भी सामने आया है कि सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने पहले वानूआतू की नागरिकता हासिल की थी। उस दस्तावेज में सौरभ की जन्मतिथि 13 जनवरी 1995 दर्ज है, जबकि फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट में जन्मतिथि 11 मार्च 1998 दिखाई गई है। अलग-अलग दस्तावेजों में अलग पहचान और अलग जन्मतिथि मिलने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह प्रत्यर्पण और कानूनी कार्रवाई से बचने की सुनियोजित रणनीति थी।

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सौरभ की याचिका खारिज
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय और CBI हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहे हैं। हाल ही में इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) ने चंद्राकर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी। चंद्राकर का दावा था कि भारत में उनके खिलाफ मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया है और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी, लेकिन CCF ने कहा कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है न कि राजनीतिक उत्पीड़न से इसलिए रेड नोटिस जारी रहेगा।

फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल गंभीर अपराध
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सौरभ चंद्राकर ने CCF में सुनवाई के दौरान ही UAE छोड़ दिया था। अधिकारियों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करना उसकी एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, ताकि भारत प्रत्यर्पण प्रक्रिया में देरी हो। ओमान के कानून के तहत फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल गंभीर अपराध माना जाता है, जिसकी सजा 3 से 5 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकती है। 2019 से फरार चल रहे सौरभ चंद्राकर को UAE से भारत लाने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। साल 2024 में दुबई में उसे कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया। उस समय इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर UAE अधिकारियों ने सौरभ चंद्राकर को हिरासत में लिया था और कुछ समय तक हाउस अरेस्ट में रखा था। भारत ने उसके प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध भी भेजा था, लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका।

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