कई महिलाओं के साथ ऐसा होता है कि एक महीने पीरियड्स समय पर आते हैं, तो अगले महीने कुछ दिन पहले या देर से शुरू होते हैं। कभी पीरियड्स की तारीख आगे बढ़ जाती है, तो कभी लगता है कि पूरा मासिक चक्र ही बदल गया है। ऐसे में अक्सर मन में सवाल आता है कि क्या यह सामान्य है या शरीर में किसी तरह के बदलाव का संकेत है? हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हर महीने पीरियड्स की तारीख एक जैसी होना जरूरी नहीं है। हालांकि, अगर मासिक चक्र में बार-बार बड़ा बदलाव हो रहा है, तो इसकी वजह समझना जरूरी है।
पीरियड्स में दर्द, थकान और चिड़चिड़ापन? सही देखभाल से रहें फिट और एक्टिव
हर महीने एक ही तारीख पर पीरियड्स आना जरूरी नहीं
पीरियड्स के बीच के अंतर को समझने के लिए कैलेंडर की तारीख के बजाय मासिक चक्र की अवधि देखना जरूरी है। मासिक चक्र की गिनती एक पीरियड के पहले दिन से अगले पीरियड के पहले दिन तक की जाती है। वयस्क महिलाओं में सामान्य मासिक चक्र आमतौर पर 21 से 35 दिनों का होता है। औसतन यह लगभग 28 दिनों का हो सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी महिला को एक महीने की 5 तारीख को पीरियड्स शुरू हुए और अगले महीने 2 तारीख को शुरू होते हैं, तो जरूरी नहीं कि इसमें कोई परेशानी हो। इसी तरह, हर महीने की 5 तारीख को पीरियड्स आने के बजाय कभी 3 या 8 तारीख को भी शुरू हो सकते हैं। असल में तारीख बदलने से ज्यादा जरूरी यह देखना है कि दो पीरियड्स के बीच कितने दिन का अंतर है और क्या यह बदलाव लगातार हो रहा है।
महिलाओं में दर्दनाक पीरियड्स, जाने क्यों होता है और इसका क्या समाधान है
तनाव से लेकर हार्मोनल बदलाव तक हो सकती हैं वजहें
पीरियड्स का समय कई कारणों से बदल सकता है। रोजमर्रा की जिंदगी में तनाव, नींद की कमी, वजन में अचानक बदलाव और बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करना मासिक चक्र को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, हार्मोनल गर्भनिरोधक दवाओं या उनके तरीकों में बदलाव से भी पीरियड्स की नियमितता पर असर पड़ सकता है।
कुछ मामलों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं भी पीरियड्स को अनियमित कर सकती हैं। इसलिए अगर पहले पीरियड्स नियमित आते थे, लेकिन अब कई महीनों से उनकी तारीख में काफी बदलाव हो रहा है, तो इसे केवल तनाव या दिनचर्या का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पीरियड्स रोकने वाली गोलियों का साइड इफेक्ट: क्यों बढ़ जाता है ब्लड क्लॉट का खतरा?
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
- पीरियड्स बार-बार 21 दिनों से कम या 35 दिनों से ज्यादा के अंतर पर आ रहे हों।
- ब्लीडिंग सात दिनों से ज्यादा चल रही हो।
- पीरियड्स के बीच में भी ब्लीडिंग या स्पॉटिंग हो रही हो।
- ब्लीडिंग सामान्य से बहुत ज्यादा हो या इसके साथ चक्कर और कमजोरी महसूस हो।
- लगातार तीन महीने तक पीरियड्स न आएं और इसकी कोई स्पष्ट वजह न हो।
ऐसी स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। अगर पीरियड्स मिस हुए हैं और गर्भधारण की संभावना है, तो प्रेग्नेंसी टेस्ट करना भी जरूरी है। केवल तारीख बदलने के आधार पर किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
9 साल से कम उम्र की बच्चियों में शुरू हो रहे पीरियड्स, डॉक्टरों ने माता-पिता को किया अलर्ट
पीरियड्स को ट्रैक करना क्यों है जरूरी?
मासिक चक्र को समझने का एक आसान तरीका है कि हर महीने पीरियड्स शुरू होने की पहली तारीख नोट की जाए। इसके लिए कैलेंडर या पीरियड ट्रैकिंग ऐप की मदद ली जा सकती है। इससे पता चलता है कि चक्र कितने दिनों का है और उसमें कोई लगातार बदलाव तो नहीं हो रहा।
साथ ही, ब्लीडिंग कितने दिन चलती है, दर्द कितना होता है और दूसरे लक्षण क्या हैं, इसे भी नोट करना उपयोगी हो सकता है। इससे डॉक्टर को समस्या की वजह समझने में मदद मिलती है। पीरियड्स की तारीख में थोड़ा बदलाव होना हमेशा परेशानी का संकेत नहीं है। लेकिन अगर बदलाव लगातार हो रहा है या इसके साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो समय पर जांच कराना बेहतर है।