महिला ने बेटे को दिया जन्म लेकिन गोद में दिया बेटी, परिजनों ने मचाया हंगामा, अस्पताल प्रबंधन में मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक निजी अस्पताल की ऐसी गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसने दो परिवारों को सकते में डाल दिया. अस्पताल कर्मचारियों ने दो नवजातों की पहचान में गड़बड़ी कर एक परिवार को बेटे की जगह बेटी सौंप दी, जबकि दूसरे परिवार को किसी और का बेटा दे दिया. दोनों परिवारों के बच्चों की अदला-बदली का मामला सामने आते ही अस्पताल में हंगामा खड़ा हो गया. परिजनों के विरोध और रिकॉर्ड की जांच के बाद अस्पताल प्रबंधन को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी. आनन-फानन में दूसरे गांव से नवजात को वापस लाकर दोनों बच्चों को उनके असली माता-पिता के सुपुर्द किया गया. लापरवाही के आरोप में संबंधित स्टाफ नर्स को नौकरी से हटा दिया गया है.

पामगढ़ में शराब पीने के बाद दो लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, एक पार्षद तो दूसरा क्लीनिक संचालक, क्षेत्र में मचा हड़कंप

रामपुर जिले के धमोरा गांव निवासी रेनू यादव पत्नी राजेंद्र को 31 अक्टूबर को प्रसव के लिए करुला स्थित मेडविन अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसी दिन उन्होंने बेटे को जन्म दिया. पहले से दो बेटियां होने के कारण परिवार में बेटे के जन्म पर खुशी का माहौल था. इसी अस्पताल में रामपुर के बड़ा खास गांव निवासी नाजमा ने भी बेटी को जन्म दिया था. दोनों परिवार अस्पताल में भर्ती थे और अपने नवजातों की छुट्टी होने का इंतजार कर रहे थे. आरोप है कि रविवार देर रात करीब दो बजे नाजमा के परिजनों को छुट्टी के दौरान रेनू यादव का नवजात बेटा सौंप दिया गया. परिजन बच्चे को लेकर गांव चले गए. इसके अगले दिन सोमवार शाम जब रेनू की छुट्टी हुई तो अस्पताल कर्मचारियों ने उनके परिवार को नाजमा की नवजात बेटी थमा दी. इस तरह अस्पताल की एक कथित चूक से दोनों परिवारों के बच्चे आपस में बदल गए.

CG : छात्रावास की बिल्डिंग पर चढ़कर छात्रा ने की आत्महत्या की कोशिश, मचा हड़कंप, बड़ी मुश्किल से बची छात्रा की जान

रेनू के परिजनों ने जब बेटे की जगह बेटी देखी तो उनके होश उड़ गए. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगते हुए विरोध शुरू कर दिया. रेनू के ससुर उनमान सिंह ने कहा कि अस्पताल के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज में बेटे के जन्म का पूरा ब्योरा मौजूद है. शुरुआत में कर्मचारियों ने गलती स्वीकार नहीं की, लेकिन परिजनों के दबाव के बाद रिकॉर्ड की जांच की गई तो नवजातों की अदला-बदली का मामला सामने आ गया. मामले का खुलासा होने के बाद अस्पताल प्रबंधन रेनू के परिजनों को साथ लेकर बड़ा खास गांव पहुंचा. वहां नाजमा के परिवार के पास मौजूद रेनू के बेटे को वापस लाया गया. इसके बाद दोनों नवजातों की पहचान कर उन्हें उनके वास्तविक माता-पिता को सौंप दिया गया. बच्चों की अदला-बदली सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे.

जांजगीर : करंट लगने से मोटर्स कर्मचारी की मौत, मचा हड़कंप, परिजनों का मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन

अस्पताल संचालक का कहना है कि वह किसी जरूरी काम से लखनऊ गए हुए थे. उनकी गैरमौजूदगी में स्टाफ नर्स से यह चूक हुई. प्रबंधन के मुताबिक दोनों नवजातों के जन्म और पहचान से जुड़े दस्तावेज अस्पताल में मौजूद हैं. गलती सामने आने के बाद संबंधित स्टाफ नर्स की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं. अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि रेनू के परिवार ने बच्चा वापस मिलने के बाद लिखित रूप में दिया है कि अब उन्हें कोई शिकायत नहीं है. वहीं नाजमा ने भी कहा कि छुट्टी के समय उनके परिजनों ने बच्चे की पहचान की पुष्टि नहीं की थी. हालांकि, इस घटना ने निजी अस्पतालों में नवजातों की सुरक्षा और पहचान सत्यापित करने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महज एक कर्मचारी की कथित चूक से दो परिवारों को जिस मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ा, उसने अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं.

See also  पति को दूसरी महिला के साथ देख बिफरी पत्नी, भाई को फोन कर कूदी नहर में, गोताखोर कर रहे हैं नवविवाहिता की तलाश

 

 

CG : भारी वजनी पत्थर से वारकर अधेड़ व्यक्ति की हत्या, लोगों में मचा हड़कंप, जाँच में जुटी पुलिस