दिल्ली की एक अदालत ने पॉक्सो मामले में 15 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को 7 साल की सजा सुनाई है। डीएनए रिपोर्ट सबूतों से अपराध साबित हुआ और कोर्ट ने नाबालिग की सहमति वाली बचाव पक्ष की दलील खारिज कर दी। दिल्ली की एक अदालत ने 15 साल की बच्ची के अपहरण, मारपीट और दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 7 साल के जेल की सजा सुनाई है।
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दिल्ली की द्वारका जिला अदालत ने साल 2019 में 15 साल की बच्ची के अपहरण, मारपीट और दुष्कर्म के मामले में दोषी विनोद उर्फ विक्की (33 वर्ष) को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता को पहुंचे मानसिक और शारीरिक आघात की भरपाई के लिए 10.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहित गुलिया की अदालत ने कहा कि मामले में प्रस्तुत वैज्ञानिक साक्ष्य और डीएनए रिपोर्ट आरोपी के अपराध को संदेह से परे साबित करते हैं। अदालत ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा चार, आईपीसी की धारा 363, 323 और 506 के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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जांच रिपोर्ट ने निभाई अहम भूमिका
विशेष लोक अभियोजक अनुराग कुमार ने बताया कि मामले में सबसे अहम भूमिका रोहिणी स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की डीएनए रिपोर्ट की रही। जब एफएसएल विशेषज्ञों ने पीड़िता के कपड़ों से मिले जैविक नमूनों का मिलान आरोपी के रक्त और वीर्य (सीमन) के नमूनों से कराया, तो डीएनए प्रोफाइलिंग पूरी तरह मैच हो गई। अदालत ने माना कि यह वैज्ञानिक साक्ष्य अपने आप में इतने पुख्ता और अकाट्य हैं, जो आरोपी को सीधे अपराध से जोड़ते हैं। यही रिपोर्ट आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने का मुख्य आधार बनी।
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दो मिनट बात करने का दिया था झांसा
घटना 23 जनवरी 2019 की है। पीड़िता के घर के नीचे कपड़ों के शोरूम में काम करने वाले आरोपी विनोद ने पीड़िता को धमकाकर उसका रास्ता रोका। फिर आखिरी बार दो मिनट बात करने का झांसा देकर जबरन उसे अपने घर ले गया। वहां आरोपी ने बच्ची के हाथ बांधकर रातभर उसे बंधक बनाया, बेरहमी से पीटा और दुष्कर्म किया। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर जनकपुरी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक अनुराग कुमार ने कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और ऐसे मामलों में कठोर सजा आवश्यक है ताकि समाज में सख्त संदेश जा सके।
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बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि आरोपी और पीड़िता के बीच संबंध सहमति से थे तथा आरोपी को झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र और परिवार में अनपढ़ पत्नी व दो छोटे बच्चों का हवाला दकर नरमी की अपील की थी। हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि घटना के समय पीड़िता की नाबालिग थी और पॉक्सो कानून के तहत किसी भी नाबालिग की कथित सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं है।
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