AI ने पकड़ी 70,000 करोड़ की ‘डिजिटल हेराफेरी’, हैदराबाद ‘बिरयानी कांड’ से देशव्यापी टैक्स चोरी का खुलासा

हैदराबाद 

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने रेस्टोरेंट उद्योग में अब तक के सबसे बड़े टैक्स चोरी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। हैदराबाद की तीन मशहूर बिरयानी चेन से शुरू हुई यह जांच अब एक ऐसे राष्ट्रव्यापी घोटाले में बदल गई है, जिसमें लगभग 70,000 करोड़ रुपये की आय छिपाने का अनुमान है।

इस हाई-प्रोफाइल जांच की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि टैक्स चोरी के इस "गड़बड़झाले" को पकड़ने के लिए विभाग को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत फोरेंसिक तकनीक का सहारा लेना पड़ा।
सॉफ्टवेयर में छिपा था 'बल्क डिलीट' का खुफिया बटन

जांच में खुलासा हुआ है कि देशभर के लगभग 1.7 लाख रेस्टोरेंट एक खास किस्म के बिलिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे। इस सॉफ्टवेयर को विशेष रूप से टैक्स चोरी के लिए डिजाइन किया गया था:

    रिकॉर्ड मिटाने की तकनीक: सॉफ्टवेयर में एक गुप्त 'बल्क डिलीट' फीचर था। इसकी मदद से रेस्टोरेंट मालिक एक ही क्लिक में पूरे महीने की बिक्री का डेटा गायब कर देते थे।
    बिल हेरफेर: पिछले 6 वर्षों में करीब 19,400 करोड़ रुपये के बिलों में संशोधन किया गया, जबकि 13,000 करोड़ रुपये के बिल पूरी तरह डिलीट कर दिए गए।
    बिक्री में गिरावट: अनुमान है कि रेस्टोरेंट्स ने अपनी वास्तविक बिक्री को 27% तक कम करके दिखाया ताकि जीएसटी और आयकर देनदारी से बचा जा सके।

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पूरा सॉफ्टवेयर का खेल

बता दें कि यह सॉफ्टवेयर बाजार के लगभग 10% रेस्तरां बिलिंग सॉफ्टवेयर मार्केट को नियंत्रित करता है. अधिकारियों ने इसकी मदद से 1.77 लाख रेस्टोरेंट की आईडी के ट्रांजेक्शन डेटा को खंगाला. इतने बड़े पैमाने पर डाटा का एनलिसिस करना आसान काम नहीं था. तब एआई टूल्स का इस्तेमाल किया गया. रेस्तरां के जीएसटी (GST) नंबरों को ओपन-सोर्स जानकारी और ऑनलाइन उपलब्ध डाटा से मैप किया गया ताकि चोरी का सटीक पता चल सके.

घोटाले का राज्य के हिसाब से ब्यौरा

अकेले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ₹5,141 करोड़ की बिक्री छिपाई गई. पूरे भारत में कर चोरी के मामले में शीर्ष 5 राज्य इस प्रकार हैं:

    कर्नाटक: सबसे अधिक ₹2,000 करोड़ की बिलिंग डिलीट की गई.
    तेलंगाना: ₹1,500 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर.
    तमिलनाडु: ₹1,200 करोड़ की हेराफेरी.
    महाराष्ट्र और गुजरात में भी भारी मात्रा में चोरी पकड़ी गई.

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60 टेराबाइट डेटा और AI का 'कमांडो एक्शन'

आयकर अधिकारियों ने इस केस में तकनीक का अभूतपूर्व इस्तेमाल किया है। जांच की भयावहता को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:

    विशाल डेटा: अधिकारियों ने लगभग 60 टेराबाइट (TB) डिजिटल डेटा और यूपीआई (UPI) लेनदेन का विश्लेषण किया है।

    संदिग्ध पैन और जीएसटी: डेटा माइनिंग के दौरान हजारों ऐसे पैन (PAN) और जीएसटी नंबर मिले हैं जिनका इस्तेमाल फर्जी तरीके से रिकॉर्ड छिपाने के लिए किया गया।

    AI की भूमिका: एआई ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और जीएसटी डेटा को आपस में जोड़कर उन विसंगतियों को पकड़ा जिन्हें सामान्य ऑडिट में पहचानना नामुमकिन था।

घोटाले का रिपोर्ट कार्ड (2019 से अब तक)

विवरण – आंकड़े

कुल छिपाई गई आय (अनुमानित) – ₹70,000 करोड़

आंध्र और तेलंगाना का हिस्सा – ₹5,000 करोड़ से अधिक

सॉफ्टवेयर से दर्ज कुल बिक्री – ₹2.4 लाख करोड़

डिलीट किए गए बिलों का प्रतिशत – 14% तक

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जांच के दायरे में रेस्टोरेंट – 1.7 लाख (देशभर में)

पैन कार्ड्स के जरिए रची गई साजिश

सूत्रों का कहना है कि यह केवल बिल डिलीट करने तक सीमित नहीं था। हजारों फर्जी या अनधिकृत पैन कार्ड्स के जरिए बिक्री को अलग-अलग खातों में बांट दिया जाता था ताकि किसी भी एक इकाई (Entity) का टर्नओवर टैक्स सीमा से अधिक न दिखे। फिलहाल, विभाग की आईटी टीम डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में जुटी है ताकि रिकवरी की सटीक राशि तय की जा सके।