दुनिया में तेल संकट के बीच भारत को मिला खजाना, 42.5 टन सोने का भंडार, डॉलर की बारिश अगले माह से

नई दिल्‍ली
 भारत में सोने के प्रति दीवानगी सदियों पुरानी है. भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ताओं में से एक है. हम हर साल 800 टन से अधिक सोना विदेशों से आयात (Import) करते हैं. सोने के मामले में देश को आत्‍मनिर्भर बनाने के प्रयास कई सालों से हो रहे हैं. इसमें सफलता भी मिली है. इसी कड़ी में अब आंध्र प्रदेश के कर्नूल (Kurnool) जिले में देश की पहली प्राइवेट गोल्‍ड माइन मई में शुरू होने वाली है. जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Geomysore Services India Pvt Ltd) की जोन्नागिरी गोल्ड परियोजना भारत की पहली बड़े पैमाने की निजी सोने की खान है। 

इस परियोजना का प्रोसेसिंग प्लांट (Processing Plant) मई के पहले सप्ताह में पूरी तरह सक्रिय होने जा रहा है. वर्तमान में यहां प्री-कमर्शियल ऑपरेशंस चल रहे हैं. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किए जाने की उम्मीद है. राज्य के खनन एवं भूविज्ञान विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मीना ने इसे भारत की व्यापक स्वर्ण खनन महत्वाकांक्षाओं के लिए एक ‘ऐतिहासिक क्षण’ करार दिया है। 

See also  रिपोर्ट :भारत में 2075 तक एक तिहाई आबादी 60 वर्ष की होगी, जो वर्तमान 11% से काफी अधिक

42.5 टन सोना होने का अनुमान
एक रिपोर्ट के अनुसार, जोन्नागिरी, एर्रागुडी (Erragudi) और पागिदिरायी (Pagidirayi) गांवों में 598 हेक्टेयर क्षेत्र में सोने का 13.1 टन प्रमाणित भंडार (Certified Reserves) है. यहां कुल 42.5 टन तक होने सोना होने की संभावना जताई गई है. जब यह खदान अपनी पीक क्षमता (Peak capacity) पर होगी, तब यहां से हर साल करीब 1,000 किलोग्राम शुद्ध सोना निकाला जा सकेगा. यह सिलसिला अगले 15 वर्षों तक निरंतर जारी रहने की उम्मीद है। 

400 करोड़ का निवेश
इस पूरे प्रोजेक्ट में 400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है. इसे त्रिवेणी अर्थमूवर्स एंड इंफ्रा (Thriveni Earthmovers & Infra) और डेक्कन गोल्ड (Deccan Gold) जैसी दिग्गज कंपनियों का समर्थन प्राप्त है. जोन्नागिरी परियोजना अकेले इस विशाल आयात को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती, लेकिन यह घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक बहुत बड़ा संरचनात्मक बदलाव है। 

हुट्टी गोल्ड माइंस (Hutti Gold Mines) जैसे वर्तमान सरकारी संयंत्र सालाना केवल 1.5 टन उत्पादन कर पाते हैं, जबकि प्रसिद्ध कोलार गोल्ड फील्ड्स (Kolar Gold Fields – KGF) साल 2000 में ही बंद हो चुके हैं. ऐसे में जोन्नागिरी जैसी निजी परियोजनाओं का सफल होना एक सकारात्मक संदेश है। 

See also  उन्नाव में 570 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, सीएम योगी ने किया लोकार्पण और शिलान्यास

अत्याधुनिक तकनीक से खनन
जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स में इन दिनों आधुनिक मशीनों और नियंत्रित विस्फोटों की गूंज सुनाई देती है. महज 13 महीनों के रिकॉर्ड समय में इस प्रोसेसिंग प्लांट को तैयार किया गया है. त्रिवेणी अर्थमूवर्स के प्रबंध निदेशक बी. प्रभाकरन का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारत में ‘जिम्मेदार और प्रतिस्पर्धी खनन’ का एक वैश्विक मॉडल पेश करता है. जियोमैसूर के निदेशक हनुमा प्रसाद मोदाली का कहना है कि इस सफलता से भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी निजी निवेश का रास्ता साफ होगा।