छत्तीसगढ़ : भीम आर्मी का हथियार बंदूक नहीं संविधान और कलम है, माओवाद से जोड़ने पर भड़के प्रदेश अध्यक्ष, कहा पत्रकार माफी मांगे वरना होगा आंदोलन

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद माओवाद को लेकर एक राष्ट्रीय चैनल में एक स्थानीय पत्रकार विकास तिवारी उर्फ रानू तिवारी ने भीम आर्मी को माओवाद के तौर पर पेश करने से प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद ने कड़ा विरोध जताया है। साथ ही तत्काल उसे पत्रकार से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की बात कही है माफी नहीं मांगने पर प्रदेश भर में आंदोलन करने की चेतावनी की है।

 

छत्तीसगढ़ के धुर नक्सली क्षेत्र बस्तर में दोबारा माओवाद खड़ा होने को लेकर एक राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल के पत्रकार ने जब स्थानीय स्तर के पत्रकार विकास तिवारी उर्फ रानू तिवारी से जब सवाल किया तो उसने भीम आर्मी का नाम लिया। जिससे भीम आर्मी के प्रदेश इकाई ने नाराजगी जताई है। भीम आर्मी छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद ने भीम आर्मी को माओवाद से जोड़ने पर अपने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भीम आर्मी का हथियार बंदूक नहीं है बल्कि संविधान और कलम है | इसे से भीम आर्मी हर जगह लड़ाई लड़ती है। प्रदेश अध्यक्ष ने तत्काल पत्रकार विकास तिवारी से सार्वजनिक माफी मांगने की बात कही है।

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प्रदेश अध्यक्ष का कहना है लगातार भीम आर्मी को बदनाम करने की कोशिश कुछ तथाकथित लोगों द्वारा की जा रही है। बस्तर क्षेत्र में लगातार बहुत सारे सामाजिक संगठन कार्य कर रहे हैं लेकिन केवल भीम आर्मी को ही टारगेट करके भीम आर्मी के प्रति लोगों में नकारात्मकता फैलाने की एक सोची समझी साजिश है, जो सही नहीं है। भीम आर्मी ने कभी हथियार उठाने की बात नहीं कही है। भीम आर्मी कभी संविधान के खिलाफ काम करने की बात नहीं कही है।

 

भीम आर्मी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान, शिक्षा, संगठन और शांतिपूर्ण संघर्ष के विचारों पर चलने वाला सामाजिक संगठन है। हमारा उद्देश्य शोषित, वंचित, आदिवासी, दलित और दबे-कुचले समाज को संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना और कानूनी तरीके से न्याय दिलाना है। उन्होंने बताया की बस्तर क्षेत्र में भी भीम आर्मी की टीम लगातार शिक्षा और हक के लिए कार्य करने में लगा है। भीम आर्मी उन जगहों पर पहुंच रही है जहां पर विकास केवल कागजों तक ही सीमित है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा की आदिवासी और मूलनिवासी लोग शिक्षित हो गए और संवैधानिक बात करने लगे तो कांग्रेस और बीजेपी के लिए खतरा हो जाएगा। क्योंकि कांग्रेस और बीजेपी बस्तर को बेचने का काम कर रही है।

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पत्रकार विकास तिवारी उर्फ रानू तिवारी द्वारा दिया गया बयान समाज में भ्रम और वैमनस्य फैलाने वाला है। इसलिए हम मांग करते हैं कि वे #24_घंटे के अंदर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और अपने बयान को वापस लें। संविधान विरोधी सोच और दलित-आदिवासी युवाओं को बदनाम करने की कोशिश कभी सफल नहीं होगी।