Bhopal Garbage Law 2026: 900 से ज्यादा बड़ी सोसायटियों को खुद करना होगा कचरे का निपटारा, नहीं तो देना होगा भारी शुल्क

भोपाल
 भोपाल में 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए केंद्र सरकार के नए 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों' ने शहर के एक बड़े हिस्से की नींद उड़ा दी है। नगर निगम परिषद द्वारा स्वीकृत इस कड़े कानून का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला असर भोपाल की 900 से अधिक बड़ी कॉलोनियों, सोसायटियों और व्यावसायिक संस्थानों पर पड़ने जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि जो परिसर केवल अपने यहां होने वाली पानी की खपत के कारण 'बल्क वेस्ट जनरेटर' (बड़ा कचरा उत्पादक) के दायरे में आ गए हैं, उन्हें अब अपना कचरा खुद ठिकाने लगाना होगा। इस नियम के दायरे में नगर निगम को हैंडओवर हो चुकीं 1273 कॉलोनियों समेत खुद नगर निगम का 'तुलसी नगर' स्थित नया मुख्यालय भी शामिल हो गया है। इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए निगम के पास 18 महीने (डेढ़ साल) का समय है। 

बल्क वेस्ट के नियम: इन 4 शर्तों से तय होंगे 'बड़े कचरा उत्पादक'
यदि कोई भी परिसर नीचे दी गई चार शर्तों में से किसी एक को भी पूरा करता है, तो उसे अनिवार्य रूप से 'बल्क वेस्ट जनरेटर' माना जाएगा और पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा:
1. आवासीय परिसर: 5 एकड़ (20,000 वर्ग मीटर) या उससे अधिक फ्लोर एरिया वाली हाउसिंग सोसाइटी।

2. व्यावसायिक परिसर: 5,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले होटल, मॉल, अस्पताल, मैरिज गार्डन या बाजार।
3. कचरे की मात्रा: रोजाना 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकालने वाले संस्थान।
4. पानी की खपत : रोजाना 40,000 लीटर या अधिक पानी की खपत करने वाले परिसर (भोपाल में ऐसी 900 सोसायटियां हैं)।
सोसायटियों के पास कचरा निपटान के 3 विकल्प और 'निगम का चार्ज'
नए कानून के तहत सोसायटियों को कचरा प्रबंधन के लिए तीन रास्ते दिए गए हैं। यदि वे तीसरा विकल्प चुनकर कचरा नगर निगम के ग्लोबल ट्रांसफर स्टेशन भेजती हैं, तो उन्हें प्रति टन के हिसाब से यह चार्ज देना होगा:
विकल्प 1: वे अपने कैंपस के अंदर ही खुद का प्रोसेसिंग प्लांट लगाएं और गीले कचरे से खाद या बायोगैस बनाकर खुद निपटारा करें।

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बल्क वेस्ट के नियम: इन 4 शर्तों से तय होंगे 'बड़े कचरा उत्पादक'
यदि कोई भी परिसर नीचे दी गई चार शर्तों में से किसी एक को भी पूरा करता है, तो उसे अनिवार्य रूप से 'बल्क वेस्ट जनरेटर' माना जाएगा और पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा:
1. आवासीय परिसर: 5 एकड़ (20,000 वर्ग मीटर) या उससे अधिक फ्लोर एरिया वाली हाउसिंग सोसाइटी।

2. व्यावसायिक परिसर: 5,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले होटल, मॉल, अस्पताल, मैरिज गार्डन या बाजार।
3. कचरे की मात्रा: रोजाना 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकालने वाले संस्थान।
4. पानी की खपत : रोजाना 40,000 लीटर या अधिक पानी की खपत करने वाले परिसर (भोपाल में ऐसी 900 सोसायटियां हैं)।
सोसायटियों के पास कचरा निपटान के 3 विकल्प और 'निगम का चार्ज'
नए कानून के तहत सोसायटियों को कचरा प्रबंधन के लिए तीन रास्ते दिए गए हैं। यदि वे तीसरा विकल्प चुनकर कचरा नगर निगम के ग्लोबल ट्रांसफर स्टेशन भेजती हैं, तो उन्हें प्रति टन के हिसाब से यह चार्ज देना होगा:
विकल्प 1: वे अपने कैंपस के अंदर ही खुद का प्रोसेसिंग प्लांट लगाएं और गीले कचरे से खाद या बायोगैस बनाकर खुद निपटारा करें।

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विकल्प 2: वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को यह काम सौंपें।
विकल्प 3
(निगम को सौंपने पर प्रति टन दरें):
आवासीय सोसायटियां : 2,100 रुपये प्रति टन
सरकारी विभाग, स्कूल, कॉलेज: 2,400 रुपये प्रति टन
मॉल, होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन: 2,700 रुपये प्रति टन
जो सोसायटियां कचरा पूरी तरह से अलग-अलग (सूखा, गीला, सैनिटरी, ई-वेस्ट) छांटकर देंगी, उन्हें सिर्फ 922 रुपये प्रति टन देना होगा। मिक्स कचरा देने पर इन दरों का 150% जुर्माना लगेगा।

अब रखने होंगे 4 अलग डस्टबिन
शहर की कॉलोनियों में अब आगामी डेढ़ साल के भीतर 4-डस्टबिन मॉडल लागू करना अनिवार्य होगा। आम जनता को अब केवल गीला और सूखा नहीं, बल्कि कुल चार श्रेणियों में कचरा छांटना होगा:
1. गीला कचरा: रसोई का भोजन, फल-सब्जियों के छिलके।
2. सूखा कचरा: रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, कांच, कपड़े।
3. सैनिटरी कचरा: डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिशू पेपर, घरेलू मेडिकल वेस्ट।
4. घरेलू ई-वेस्ट:
पुराने मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां।
शादी-पार्टी के लिए नया नियम: घर या संस्थान में जन्मदिन, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में 100 से अधिक मेहमान शामिल होने पर आयोजन से 3 दिन पहले नगर निगम से अनुमति लेनी होगी। 

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वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को यह काम सौंपें।
विकल्प 3 (निगम को सौंपने पर प्रति टन दरें):
आवासीय सोसायटियां : 2,100 रुपये प्रति टन
सरकारी विभाग, स्कूल, कॉलेज: 2,400 रुपये प्रति टन
मॉल, होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन: 2,700 रुपये प्रति टन
जो सोसायटियां कचरा पूरी तरह से अलग-अलग (सूखा, गीला, सैनिटरी, ई-वेस्ट) छांटकर देंगी, उन्हें सिर्फ 922 रुपये प्रति टन देना होगा। मिक्स कचरा देने पर इन दरों का 150% जुर्माना लगेगा।

अब रखने होंगे 4 अलग डस्टबिन
शहर की कॉलोनियों में अब आगामी डेढ़ साल के भीतर 4-डस्टबिन मॉडल लागू करना अनिवार्य होगा। आम जनता को अब केवल गीला और सूखा नहीं, बल्कि कुल चार श्रेणियों में कचरा छांटना होगा:
1. गीला कचरा: रसोई का भोजन, फल-सब्जियों के छिलके।
2. सूखा कचरा: रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, कांच, कपड़े।
3. सैनिटरी कचरा: डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिशू पेपर, घरेलू मेडिकल वेस्ट।
4. घरेलू ई-वेस्ट: पुराने मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां।
शादी-पार्टी के लिए नया नियम: घर या संस्थान में जन्मदिन, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में 100 से अधिक मेहमान शामिल होने पर आयोजन से 3 दिन पहले नगर निगम से अनुमति लेनी होगी।