सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार के प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली में हरिजन शब्द का उपयोग, छत्तीसगढ़ के समाजसेवी युवाओं ने जताई आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के लिए हरिजन शब्द को लिखने और बोलने को अपमानजनक करार देते हुए इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत सरकार ने भी आधिकारिक रूप से दलितों के संबंध में हरिजन शब्द के उपयोग पर पाबंदी के निर्देश दे दिए गए हैं । आपको बता दें की अनुसूचित जाति के लोगों के लिये “हरिजन” शब्द का प्रयोग गांधी ने पहली बार 1933 में किया था । तब डॉ अंबेडकर ने इसका विरोध किया था|
इसके बावजूद देश की राजधानी दिल्ली में आज भी इस आपतिजनक नाम से संगठन संचालित है बल्कि अंतरराष्ट्रीय सेमिनार भी कराए जा रहे हैं| इसी दौरान छत्तीसगढ़ के समाजसेवी युवा दिल्ली पहुँचते हैं और उनको इसकी जानकारी होती है तो वे इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पहुँचते हैं और अपनी आपत्ति दर्ज़ करते हैं|
सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार के प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली में हरिजन शब्द का उपयोग, छत्तीसगढ़ के समाजसेवी युवाओं ने जताई आपत्ति
सामाजिक कार्यकर्त्ता संजीत बर्मन अपने सोशल मिडिया पर लिखते हैं की गांधी आश्रम किंग्सवे कैंप नई दिल्ली स्थित हरिजन सेवक संघ के केंद्रीय मुख्यालय में हम अपने 40 मित्रों के साथ हरिजन सेवक संघ के द्वारा स्थापना दिवस के अवसर में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में उपस्थित होकर “हरिजन और हरिजन सेवक संघ” नाम के पर आपत्ति दर्ज करवाए हैं। इस संगठन में गांधीवादी के नाम पर अधिकांश कांग्रेसी खासकर काबिज हैं। समाज में बढ़ते बाबा साहब के प्रभाव के कारण अब इन्हें अपने सेमिनार में बाबा साहब की आवश्यकता महसूस होने लगी है। आयोजन स्थल पर ऐसे-ऐसे हरिजन देखने को मिले जो जिन्हें हरिजन शब्द पर कोई आपत्ति नहीं है हरिजन उन्हें बेहद ही सामान्य शब्द लगता है लेकिन उनके अपने नाम के आगे हरिजन संबोधित करने से उनकी भौंहें तन जाती है।
भारत देश में जाति की समस्या बाबा साहब के दौर में भी गंभीर थी और आज भी गंभीर ही है सामाजिक असमानता की खाई खत्म होने के बजाय बढ़कर गिरोह में तब्दील होने लगी है। हरिजन सेवक संघ में न केवल‌ हमने आपत्ति दर्ज करवाए बल्कि आंबेडकर की तस्वीर राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो.डॉ‌ शंकर कुमार सन्याल को भेंट करते हुए हरिजन शब्द के प्रयोग पर विचार करने का आग्रह किए।
अगर गांधी और बाबा साहब के विचारों पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करते हुए चर्चा हो रही है और चर्चा के केंद्र बिंदु में हरिजन (अनुसूचित जाति) को ही रखा गया है फिर भी बाबा साहब की एक भी तस्वीर को फ्लेक्स में जगह नहीं दी गई है। इसलिए हमने बाबा साहब की तस्वीर भेंट किए। पूरे परिसर को शादी घर की तरह सजाया गया था लेकिन बाबा साहब को परिसर में कहीं जगह देने की लायक कोई सोच नहीं पाए।
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। अच्छे विचार और व्यवहार को सदैव आत्मसात करना चाहिए और गलत विचार और व्यवहार को त्याग करना चाहिए। हरिजन सेवक संघ के बजाए अनुसूचित जाति सेवक संघ या फिर सर्वजन सेवक‌ संघ बना दिया जाए जिससे समाज में कार्य करने के लिए व्यापक स्तर पर प्लेटफार्म मिलेगा जिससे अशिक्षा के शिकार नशा में बिमार गरीब किसान मजदूर सभी समाहित होकर प्रगति की राह पर आगे बढ़ेंगे। वैसे हरिजन सेवक संघ के 94 साल बाद भी हरिजन का विकास नहीं हो पाया है|
आपको बता दें की केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 10 फरवरी 1982 को राज्यों को निर्देश दिया था कि दलितों के लिए ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग न किया जाए। इसके बाद 2013 और अन्य अवसरों पर भी सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए गए। [1, 2, 3]
सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने इस शब्द को अपमानजनक और असंवैधानिक करार दिया है। अदालत के अनुसार, इस शब्द का प्रयोग किसी को नीचा दिखाने या अपमानित करने की श्रेणी में आता है।
संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति वर्ग के लिए केवल ‘अनुसूचित जाति’ (Scheduled Caste / SC) शब्द का ही उपयोग करने के निर्देश हैं।
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