​डिजिटल क्रांति से बदली नारायणपुर के किसानों की तकदीर: एग्रीस्टेक पंजीयन ने दूर की खाद-बीज की चिंता

​रायपुर
   
छत्तीसगढ़ शासन की डिजिटल पहल 'एग्रीस्टेक किसान पंजीयन' बस्तर अंचल के किसानों के लिए खेती-किसानी को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। शुरुआत में तकनीकी दिक्कतों के कारण कुछ किसानों को पंजीयन में परेशानी जरूर हुई, लेकिन नारायणपुर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की तत्परता ने इस चुनौती को एक मिसाल में बदल दिया। प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण अब अंदरूनी क्षेत्रों के किसान बिना किसी बाधा के समय पर खाद-बीज और अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।

​चिंता के बादल छंटे, समय पर मिला खाद-बीज
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ग्राम कुकड़ाझोर के निवासी किसान बीरसिंह पिता माहरू के लिए इस साल का खरीफ सीजन शुरुआत में चिंताओं भरा था। तकनीकी कारणों से उनका एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं हो पा रहा था, जिसकी वजह से उन्हें सहकारी समिति से खाद और बीज मिलने में दिक्कत आ रही थी। खेती का समय निकला जा रहा था और बीरसिंह लगातार प्रयासों के बाद भी तकनीकी त्रुटि के कारण पंजीयन नहीं करा पा रहे थे।​परेशान होकर बीरसिंह ने नारायणपुर तहसील कार्यालय का दरवाजा खटखटाया।अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराकर त्रुटियों को दूर किया। कुछ ही समय में बीरसिंह का पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हो गया।  बीरसिंह ने कहा कि अगर प्रशासन समय पर मेरी मदद नहीं करता, तो इस साल मेरी पूरी खेती पिछड़ जाती। अधिकारियों की त्वरित पहल से मेरी चिंता दूर हो गई और अब मुझे समय पर खाद-बीज मिल गया है।

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​वीरू और सगराम की भी दूर हुई परेशानी
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यह राहत केवल बीरसिंह तक सीमित नहीं रही। डिजिटल पंजीयन की इस सुलभता का लाभ जिले के अन्य किसानों को भी मिला। ​ग्राम बोरण्ड के किसान वीरू भी इसी तरह की तकनीकी समस्या से जूझ रहे थे, जिसका प्रशासन ने त्वरित निराकरण किया। इसी तरह ​ग्राम कोचवाही के किसान सगराम पोटाई का पंजीयन भी प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराया गया, जिससे उन्हें समय पर कृषि इनपुट (खाद-बीज) मिल सका।

​प्रशासनिक तालमेल और संवेदनशीलता की मिसाल
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एग्रीस्टेक जैसी आधुनिक डिजिटल व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और सीधे किसानों तक लाभ पहुंचाना है। नारायणपुर जिले में तकनीकी समस्याओं का जिस तेजी से समाधान किया गया, वह यह साबित करता है कि यदि प्रशासन और किसानों के बीच बेहतर समन्वय हो, तो सुदूर वनांचल क्षेत्रों में भी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ जमीनी स्तर पर पहुँचाया जा सकता है।

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प्रशासन की इस मुस्तैदी से न केवल नारायणपुर के किसानों का डिजिटल प्रणालियों पर भरोसा बढ़ा है, बल्कि बस्तर में खेती को अधिक सशक्त, सरल और लाभकारी बनाने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।