राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव तय समय पर कराना मुश्किल, आयोग ने मांगे 90 दिन

जयपुर
 राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव तय समय पर कराना अब संभव नहीं लग रहा। राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से 31 जुलाई तक चुनाव कराने की समय-सीमा में अब सिर्फ 25 दिन बाकी है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को साफ बता दिया है कि आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी चुनाव कराने के लिए कम से कम 90 दिन चाहिए। यानी, कोर्ट की मौजूदा समय-सीमा में चुनाव कराना लगभग असंभव है।

दिलचस्प यह भी है कि इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट के 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश का भी पालन नहीं हो पाया था और अब दूसरी बार अदालत की तय समय-सीमा पर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका के बाद सरकार और आयोग दोनों सक्रिय हो गए हैं और हाईकोर्ट से समय-सीमा बढ़ाने की रणनीति पर मंथन शुरू हो गया है।

14 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजारः पंचायती
राज विभाग ने निर्वाचन आयोग को बताया है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अपनी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट 14 अगस्त तक सौंप सकता है। इसके बाद विभाग 31 अगस्त तक सभी वर्गों का आरक्षण तय करने की तैयारी में है। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा।

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दो चरण में निकाय, चार चरण में पंचायत चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि आरक्षण निर्धारण पूरा होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकेगा। आयोग के अनुसार पंचायत चुनाव में करीब 50 दिन और नगरीय निकाय चुनाव में 40 दिन लगेंगे। नगरीय निकाय चुनाव 2 चरणों में और पंचायत चुनाव 4 चरणों में कराए जाएंगे।

आयोग का तर्क है कि नई पंचायत समितियों, ग्राम पंचायतों और वार्डों की संख्या बढ़ने से चुनावी प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि 31 जुलाई की समय-सीमा का पालन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिख रहा। ऐसे में हाईकोर्ट में समय सीमा बढ़ाने के लिए आवेदन करने की जरूरत है। मंगलवार को स्वायत्त शासन विभाग और विधि विभाग के अधिकारियों ने इसी मुद्दे पर बैठक कर अदालत में सरकार का पक्ष रखने की रणनीति पर चर्चा की।

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