यूपी में खत्म होगा शॉप एक्ट, अब 10 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा

लखनऊ
यूपी में छह दशक से अधिक पुराना दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम (शॉप एक्ट) जल्द खत्म हो जाएगा। इसका स्थान व्यवसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य (ओएसएच) कोड लेगा। इस बदलाव का असर प्रदेश के लाखों दुकान, प्रतिष्ठान, ऑफिस, होटल, रेस्टोरेंट आदि पर पड़ेगा। इन सभी को नये ओएसएच कोड के तहत पंजीकरण कराना होगा। इसमें 10 कर्मचारियों वाले वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए श्रम विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। अभी शॉप एक्ट संशोधन के तहत 20 से कम कर्मचारी वाले प्रतिष्ठानों को पंजीकरण से छूट थी।

प्रदेश में शॉप एक्ट 1962 से लागू है। इसके तहत पहले ऐसे सभी दुकानों व प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य था, जहां कोई भी कर्मचारी काम करता हो। इसी साल दो जनवरी को एक्ट में संशोधन को मंजूरी देते हुए एक से 19 कर्मियों वाले प्रतिष्ठानों को श्रम विभाग में पंजीकरण से मुक्त कर दिया गया था। राज्य सरकार ने 20 या उससे अधिक कर्मचारी वाले प्रतिष्ठानों के लिए ही पंजीकरण की अनिवार्यता को मंजूरी दी थी। अब देश में नई श्रम संहिताएं लागू हो गई हैं। राज्यों को भी इन्हें लागू करना है।

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विरोधाभासी परिस्थिति के चलते फैसला
नये ओएसएच कोड और शॉप एक्ट संशोधन के बाद मौजूदा व्यवस्था में पंजीकरण की शर्तों को लेकर विरोधाभासी स्थितियां हैं। फिलवक्त 20 से कम कर्मियों पर पंजीकरण की छूट है, मगर ओएसएच एक्ट में 10 कर्मी वाले प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यापारी को दोहरा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में शॉप एक्ट को खत्म करने का फैसला किया गया है। श्रमायुक्त कार्यालय ने इस संबंध में प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया है। इसकी स्वीकृति होते ही प्रदेश में शॉप एक्ट खत्म हो जाएगा।

महिला मजदूरों के बच्चों की देखरेख होगी
लखनऊ (शैलेंद्र श्रीवास्तव)। वीबी जीरामजी योजना में काम करने वाली महिला मजदूरों को अब अपने छोटे बच्चों की देखभाल के लिए किसी के सहारे नहीं छोड़ना पड़ेगा। अब वे अपने बच्चों को कार्यस्थल पर लेकर आ सकेंगी और वहीं पर उनके देखभाल की सुविधा होगी। यह व्यवस्था न्यूनतम पांच साल से कम पांच बच्चों के होने पर की जाएगी। महिला मजदूरों में ही किसी को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी और उसके एवज में उसे पूरी दिहाड़ दी जाएगी।

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वीबी जीरामजी योजना में इसका प्रावधान कर दिया गया है। यूपी में मनरेगा के स्थान पर वीबी जीरामजी योजना शुरू की गई है। गांवों में अभी तक सबसे बड़ी समस्या महिला मजदूरों को लेकर हो रही थी। इसीलिए वीबी जीरामजी में यह सुविधा दी गई है कि पांच साल से छोटे बच्चों को कार्यस्थल पर ही देखभाल की सुविधा होगी। इसके लिए पांच बच्चे होने अनिवार्य होगा। इसमें बच्चों के पीने के लिए साफ पानी व मामूली उपचार के सामान रखे जाएंगे।