PM मोदी और CM यादव की अपील का असर: उज्जैन में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, 6750 का सफर सिर्फ 250 रुपये में

उज्जैन 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ईंधन बचाओ' अपील और मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद प्रशासन ने काम करने का तरीका भी बदल दिया है। अब अधिकारी अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही बस में बैठकर सिंहस्थ कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं। करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के बीच प्रशासन का यह कदम चर्चा का विषय बन गया है।

जानकारी के अनुसार, कमिश्नर – अधिकारी निरिक्षण के लिए अलग वाहन नहीं बल्कि ट्रेवलर से पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान, आशीष सिंह ने मितव्ययिता के नियमों के अनुरूप, अन्य अधिकारियों के साथ एक ही बस में यात्रा करके सिंहस्थ से संबंधित कार्यों का नियमित निरीक्षण शुरू किया। इससे पहले, अधिकारी अलग-अलग वाहनों का उपयोग करते थे।

नियमित दौरे के हिस्से के रूप में, व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और नए घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच मार्गों के विकास की निगरानी करने हेतु गौ घाट से अन्य घाटों तक निरीक्षण किए गए।

सिंहस्थ के कार्यों का पिछले एक सप्ताह से अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। रोज कमिश्नर, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी अलग-अलग 15 वाहनों से पहुंचते थे। वे करीब 16 किमी का सफर करते हैं।

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अब समझिए कैसे हुई खर्च में कटौती
15 अधिकारी रोज सिंहस्थ क्षेत्र के 16 किमी का सफर तय करते हैं। उससे पहले अपने बंगले से घाट तक पहुंचते हैं, यह भी पांच से सात किमी होता है। ज्यादातर इनोवा कार हैं, जिनका एवरेज 10 किमी प्रति लीटर होता है। वहीं जब अधिकारी निरीक्षण करते हैं, वाहनों के एसी चालू रहते हैं। इस हिसाब से देखें तो प्रत्येक वाहन पर चार लीटर पेट्रोल या डीजल खर्च होता है। 450 रुपए प्रति कार के हिसाब से मानें तो 6750 रुपए प्रतिदिन खर्च होते थे।

अधिकारियों ने बुधवार से ट्रैवलर बस से सफर शुरू किया है। इस बस में पहले दिन वे 12 किमी गए। जिसमें ढाई लीटर डीजल खर्च हुआ, जो करीब 250 रुपए से भी कम का होता है। हालांकि ट्रैवलर बस 4100 रुपए प्रतिदिन के किराए पर ली गई है।

रोज सुबह किया जा रहा निरीक्षण
सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। घाटों से जुड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के स्थान चिन्हित करने के लिए अधिकारी रोज सुबह 6 बजे से निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान वे करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं।

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टीम भावना भी मजबूत होगी
मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले अलग-अलग विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी गाड़ियों से आते थे, जिससे अनावश्यक ईंधन और शासकीय धन का अपव्यय होता था। अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे, जिससे टीम भावना भी मजबूत होगी और ईंधन की खपत में भी भारी कमी आएगी।

कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि अलग-अलग गाड़ियों का काफिला बनने से ट्रैफिक पर भी असर पड़ता था। अब एक बस में सभी अधिकारियों के साथ जाने से ईंधन की बचत के साथ जाम जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी। उन्होंने इसे बेहतर और अनुकरणीय पहल बताया।

सिंहस्थ के लिए इतना बजट है प्रस्तावित
बता दें कि, आगामी सिंहस्थ के लिए, ₹3,060 करोड़ के विकास कार्यों का प्रस्ताव किया गया है। कंठल चौराहे से सती गेट तक सड़क चौड़ीकरण का काम पहले ही शुरू हो चुका है।

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निर्माण कार्य की समय सीमा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य 2027 तक, यानी सिंहस्थ आयोजन से 6 महीने पहले ही पूरे कर लिए जाएं, ताकि आखिरी समय में कोई समस्या न हो।

90 प्रवेश द्वारों से जुड़ेगा घाट क्षेत्र
शिप्रा नदी के बाएं तट पर निर्मित हो रहे 14.5 किमी लंबे नवीन घाटों पर श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन हेतु 65 प्रवेश-निर्गम मार्ग चिन्हित किए गए हैं। कुल 90 प्रवेश द्वारों को एप्रोच मार्गों और पार्किंग से जोड़ा जाएगा।