धोखाधड़ी केस में बड़ा एक्शन: राइस मिलर्स एसोसिएशन अध्यक्ष समेत 6 पर FIR, कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई

दुर्ग.

कोर्ट के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कांतीलाल बोथरा की मां समेत 6 के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। मां की मौत के बाद उनके दायित्वों का निर्वहन करने की वजह से कांतिलाल को आरोपियों में शामिल किया गया है।

इस प्रकरण में मेसर्स रिद्धि सिद्धि बिल्डर ने फर्म में इन्वेस्ट कराकर फ्लैट देने और निर्माण होने तक रकम पर ब्याज देने का वादा किया इसलिए प्रार्थी के परिवार के चार लोगों ने मिलकर अलग-अलग किस्तों में कुल 24.5 लाख रुपए दिए। आरोपियों ने कुछ समय तक ब्याज दिया। इसके बाद न रकम लौटाई और न फ्लैट बनाकर दिया। मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल सोरी की अदालत ने आदेश पारित किया है।

दरअसल, वार्ड 32 जैन गली, जय आनंद परिसर निवासी प्रार्थी रितेश जैन ने अपनी पत्नी आरती जैन और रिश्तेदार अरिहंत हाइट्स निवासी पदम जैन, रेणु देवी जैन और रुपाली जैन के माध्यम से कोर्ट में परिवाद दायर किया था। जिसमें जय आनंद मधुकर परिसर दुर्ग निवासी रूपेश जैन, शनिचरी बाजार दुर्ग निवासी विश्वास गुप्ता, शिवपारा दुर्ग निवासी मनीष शर्मा, जय आनंद परिसर दुर्ग निवासी सजल जैन, खंडेलवाल कॉलोनी निवासी अमृता खंडेलवाल और ऋषभ कॉलोनी दुर्ग निवासी कमला देवी बोथरा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।

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ज्ञात हो कि, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने ‘चावल मिल घोटाला’ मामले में व्यवसायी दीपेन चावड़ा के खिलाफ पूरक आरोपपत्र पेश किया है। दीपेन चावड़ा, व्यवसायी अनवर ढेबर का साथी है और इस मामले में सहआरोपी भी है। ईओडब्ल्यू ने एक बयान में कहा है कि दीपेन चावड़ा के खिलाफ अपराध के पर्याप्त सबूत पाए जाने पर रायपुर स्थित भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विशेष अदालत में आरोपपत्र पेश किया गया है।

140 करोड़ की अवैध वसूली
राज्य के ईओडब्ल्यू और एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने पिछले वर्ष प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से मिली एक रिपोर्ट के आधार पर कथित चावल मिल घोटाले के संबंध में प्राथमिकी दर्ज किया था। ईडी इस मामले में धन शोधन की जांच कर रही है। राज्य की एजेंसी के अनुसार, जांच में इस मामले में चावल मिल मालिकों से लगभग 140 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का पता चला है। ईडी के अनुसार, 175 करोड़ रुपये का कथित घोटाला खरीफ विपणन सीजन 2021-22 के दौरान किया गया था, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का शासन था।

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