UP में सड़क सुरक्षा की नई पहल: IIT खड़गपुर और परिवहन विभाग ने तैयार किया स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी का ड्राफ्ट

लखनऊ. 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर कई अभियान चला रही है। सड़क हादसों को रोकना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। इसी क्रम में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञ और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग मिलकर ‘उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी’ पर काम कर रहे हैं। इसके तहत हाईवे और एक्सप्रेसवे की तरह ही शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर भी वैज्ञानिक आधार पर गति सीमा निर्धारित करना है। इस पहल का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की रोकथाम कर लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है। पॉलिसी का फाइनल ड्राफ्ट जल्द ही प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

हाल में उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में स्टेट रोड सेफ्टी टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों द्वारा तैयार उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी के ड्राफ्ट पर विस्तृत चर्चा हुई। नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक और एविडेंस-बेस्ड अप्रोच के माध्यम से सड़कों पर सुरक्षित गति सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर को कम करना है।

See also  योगी सरकार बनी अन्नदाताओं की ढाल, किसानों को 873.58 करोड़ की बड़ी राहत

इसके तहत केवल राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों की व्यस्त सड़कों, बाजारों, स्कूल-कॉलेजों के आसपास के मार्गों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के लिए भी उपयुक्त गति सीमा तय की जाएगी। इससे अनियंत्रित गति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।

प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा ड्राफ्ट
आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों और परिवहन विभाग ने इस पॉलिसी के लिए प्रदेशभर में विस्तृत अध्ययन किया है। तैयार किए गए पॉलिसी ड्राफ्ट पर चर्चा के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें शामिल करते हुए संशोधन किया जाएगा। इसके बाद परिवहन विभाग उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी को प्रदेश सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजेगा। मंजूरी मिलने के बाद यह पॉलिसी प्रदेश के विभिन्न विभागों के सहयोग से लागू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों की प्रकृति और यातायात घनत्व के अनुरूप गति सीमा तय होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी।

See also  वंदे भारत स्लीपर का किराया क्या होगा? यात्री ध्यान दें, RAC टिकट नहीं मिलेगा

वहीं विभाग सेफ सिस्टम अप्रोच के तहत सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित गति, सुरक्षित सड़क यात्री, सुरक्षित वाहन और पोस्ट-क्रैश केयर पर भी ध्यान दे रहा है। साथ ही सुरक्षित गति ऑडिट, प्रवर्तन व्यवस्था, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, वाहन फिटनेस निरीक्षण, जनजागरूकता अभियान के जरिए भी सुरक्षित यातायात सुनिश्चित कर रहा है।