Nifty को मिल सकती है नई ऊंचाई, साल के अंत तक इस रेंज में पहुंचने की उम्मीद

मुंबई 

भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन और अनुकूल नीतिगत वातावरण के चलते शेयर बाजार में आने वाले महीनों में मजबूती देखने को मिल सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्टी 2025 के अंत तक 26,300 से 27,500 की रेंज में रह सकता है। मार्च में बने निचले स्तर से बाजार में तेजी का रुझान देखा जा रहा है और 26,300 का स्तर एक महत्वपूर्ण अवरोध हो सकता है। यदि इसमें ब्रेकआउट होता है, तो निफ्टी 27,500 तक जा सकता है।

बर्नस्टीन के प्रबंध निदेशक और भारतीय शोध प्रमुख वेणुगोपाल गैरे ने निखिल अरेला के साथ लिखे नोट में कहा है, यह सीधे ही उस स्तर तक नहीं जाएगा। हमें अगले कदम से पहले इसके कुछ मजबूती लेने की उम्मीद है। सेक्टर के नजरिए से हम कुछ दांव यूटिलिटी से स्टेपल की ओर कर रहे हैं और थोड़े समय के लिए रणनीतिक रूप से ज्यादा वेटेज की ओर बढ़ रहे हैं। रणनीति के तौर पर उन्होंने यूटिलिटी सेक्टर को इक्वल वेट कर दिया है। वित्तीय, टेलिकॉम और डिस्क्रिशनरी उनके ओवरवेट सेक्टर बने हुए हैं।

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आर्थिक संकेतक

बर्नस्टीन ने आगाह किया कि इस बात के संकेत बढ़ रहे हैं कि आ​र्थिक रफ्तार नरम हो रही है और यह नियमित रूप से आने वाले हाल के संकेतकों में दिखता भी है। औद्योगिक गतिविधियों में नरमी लग रही है क्योंकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक मई में नौ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया और कोर सेक्टर में भी इसी तरह की गिरावट देखी गई। अप्रैल-मई में बिजली की मांग और तेल व गैस उत्पादन में नरमी आई है जबकि यात्री वाहनों की बिक्री सुस्त बनी हुई है। हवाई यातायात की वृद्धि भी नरमी के संकेत दे रही है। ऋण वृद्धि में भी नरमी आई है।

हालांकि, कुछ मजबूत रुझान भी हैं। इस्पात और कोयला उत्पादन ने हाल के औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। सीमेंट भी मज़बूत है। इसे आंशिक रूप से पेटकोक की बढ़ती खपत से सहारा मिला है। उपभोक्ता मोर्चे की बात करें तो एफएमसीजी और खुदरा क्षेत्र की कई उपभोक्ता कंपनियों ने वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही के बारे में सकारात्मक टिप्पणियां की हैं और उन्होंने बिक्री वृद्धि में तिमाही आधार पर सुधार की बात कही है।

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पिछले कुछ हफ़्तों में बिजली की मांग में तेजी आई है।

इन कारकों पर रहेगी नजर

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष की दूसरी छमाही में कुछ प्रमुख वैश्विक और घरेलू घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। इनमें शामिल हैं:

    अमेरिका की टैरिफ नीतियों पर स्पष्टता और उसका वैश्विक व्यापार पर प्रभाव
    हिंद-प्रशांत और मध्य पूर्व क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव का समाधान
    यूके-भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रगति
    अमेरिका में महंगाई के रुझान