नितिन गडकरी ने दी बड़ी मंजूरी, अब गाड़ियों में 100% एथेनॉल ईंधन के इस्तेमाल का रास्ता साफ

नई दिल्ली
 केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि उन्होंने ऑटोमोबाइल में ईंधन के रूप में ई-100 यानी लगभग 100 प्रतिशत एथेनॉल के इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाले नियमों को लागू करने की मंजूरी दे दी है। गडकरी ने बताया कि उन्होंने पिछली  इन नियमों को मंजूरी दी और यह कदम भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता तथा प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा। 

 नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, ‘कल रात 8:30 बजे मैंने उस फाइल पर हस्ताक्षर किए, जिसमें भारत में ऑटोमोबाइल ईंधन के रूप में 100% एथेनॉल के उपयोग को लेकर नियम लागू करने की कानूनी प्रक्रिया तय की गई है। 

गडकरी की यह घोषणा ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ मिलकर मारुति सुजुकी की वैगन-आर का एक ऐसा संस्करण लॉन्च किया था, जो सैद्धांतिक रूप से ई100 पर चल सकता है. इसे भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल यात्री कार बताया जा रहा है. ऐसे वाहनों को ई-20 से लेकर ई-100 तक विभिन्न एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों पर चलने के लिए तैयार किया जाता है। 

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इससे कुछ दिन पहले दोनों मंत्रियों ने हीरो द्वारा निर्मित फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलें भी लॉन्च की थीं, जो ई-85 तक के एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चल सकती हैं। अप्रैल में गडकरी के मंत्रालय ने एक मसौदा अधिसूचना जारी कर ई100 को अनुमोदित ऑटोमोबाइल ईंधन के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव रखा था। गडकरी ने कहा कि महिंद्रा, ह्युंडईऔर टोयोटा जैसी अन्य वाहन निर्माता कंपनियां भी जल्द ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बाजार में उतारेंगी। 

मंत्री ने कहा, ‘लोगों ने मेरी काफी आलोचना की. कहा गया कि यह बेकार की बातें करते हैं और यह संभव नहीं है, वाहन 100% एथेनॉल पर नहीं चल सकते. गलत जानकारी फैलाई गई, मुझे भी निशाना बनाया गया और एक पेड कैंपेन चलाया गया, जिसमें कहा गया कि एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियां खराब हो जाती हैं। 

उल्लेखनीय है कि पिछले साल जब सरकार ने पूरे देश में ई-20 ईंधन लागू किया था, तब कई वाहन चालकों ने इसका विरोध किया था. उनका कहना था कि नया ईंधन कम दक्षता वाला है और पुराने वाहन इसके अनुकूल नहीं हैं। 

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पिछले वर्ष ई-20 को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि एथेनॉल के उपयोग से माइलेज में मामूली कमी आती है. मंत्रालय के अनुसार, ई-10 के लिए डिज़ाइन किए गए और ई-20 के अनुरूप कैलिब्रेट किए गए चार पहिया वाहनों में माइलेज लगभग 1-2% तक घट सकता है, जबकि अन्य वाहनों में यह कमी 3-6% तक हो सकती है। 

ई-20 के विपरीत, ई-85 और ई-100 ईंधन के लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजन की आवश्यकता होती है. सरकार की योजना दिसंबर तक लगभग 500 पेट्रोल पंपों पर ई-85 उपलब्ध कराने और 2027 के अंत तक इसकी संख्या बढ़ाकर करीब 5,000 करने की है। 

पिछले सप्ताह फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि पेट्रोल पंप संचालक ई-85 की शुरुआत को लेकर चिंतित हैं. उनका कहना है कि पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त जगह नहीं है और इस हाई-एथेनॉल मिश्रण की मांग भी बहुत कम है। 

बातचीत में एक डीलर ने कहा, ‘फिलहाल ई-85 की उपभोक्ता मांग लगभग न के बराबर है. इसके बावजूद संचालकों से इसके लिए बुनियादी ढांचा और कीमती जगह अलग रखने को कहा जा रहा है. शुरुआती दौर में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की बिक्री सीमित रहने की उम्मीद है, खासकर दोपहिया वाहनों तक. जब तक ऐसे वाहनों की संख्या पर्याप्त स्तर तक नहीं पहुंचती, तब तक इस बुनियादी ढांचे का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल से बाहर रह सकता है। 

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