VIDEO : BREAKING पामगढ़ में गोठान की पूजा करने पहुंचे पंच, सरपंच प्रतिनिधियों की बेजा कब्ज़ाधारियों से मारपीट, उप सरपंच व सरपंच प्रतिनिधियों सहित 6 घायल  

सरपंच पति महेश्वर लहरे

Johar36garh (Web Desk)| जांजगीर जिला पामगढ़ के चोरभट्टी में गोठान की पूजा करने पहुंचे पंच व सरपंच प्रतिनिधियों की कब्ज़ाधारियों के साथ जमकर मारपीट हो गई |  जिसमें दोनों पक्ष के 6 लोग घायल हो गए |  घटना में घायल लोगों का उपचार कराने जा रहे प्रतिनिधियों पर बेजा कब्जाधारियों ने परिवार समेत 20-25 की झुण्ड में हमला कर दिया, जिसमें सरपंच पति और उपसरपंच सहित 5 लोग घायल हो गए | इसकी शिकायत मुलमुला थाना में की गई है |

बेजाकब्जाधारी दुकालू चौहान

पामगढ़ के ग्राम पंचायत जोगीडीपा में गोठान पूजा के दौरान आज दोपहर 1 बजे सरपंच प्रतिनिधियों पर पूर्व में किए बेज़ा कब्ज़ाधारियों ने विवाद शुरू कर दिया |  जिसके बाद दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया नौबत मारपीट तक पहुंच गई |  मारपीट में उप सरपंच रामायण पटेल, शीतल लहरे, सुखसागर पटेल और भरत पटेल घायल हो गए | वही बेजा कब्ज़ाधारी दुकालू चौहान भी घायल हो गया |  सरपंच पति महेश्वर लहरे घायलों का इलाज कराने के लिए गांव से मारुती वेन से हॉस्पिटल के लिए निकल रहे थे, इसी दौरान बेजा कब्जाधारियों ने फिर परिवार समेत 20-25 लोगों की संख्या में जिसमें महिलाएँ भी शामिल थी| उन्होंने उसके ऊपर फ़िल्मी अंदाज़ में धावा बोल दिया, उन लोगों ने गाड़ी का दरवाज़ा तोड़कर सरपंच पति को बाहर निकला और जमकर मारपीट की | इस मामले में दोनों पक्षों ने मुलमुला थाना में शिकायत दर्ज़ कराई है |

घटने की आंशका पहले से थी

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ग्राम जोगीडीपा में कुछ लोगों द्वारा पूर्व में इंदिरा हरेली-सहेली योजना के तहत पौधरोपण के लिए जमीन आंबटित की गयी थी | लेकिन यहां पर पौधरोपण न करके धान लगाना शुरू कर दिया गया |  ग्राम पंचायत ने उक्त भूमि को गोठान के लिए प्रस्तावित कर दिया, उक्त भूमि को खाली कराने के लिए सरपंच श्रीमती लता लहरे ने कलेक्टर, SDM, CEO और थाना प्रभारी को पत्र लिखा|  जिस पर कुछ दिनों पूर्व ही जनपद पंचायत सीईओ रतन लाल कौशिक और तहसीलदार श्रीमती जयश्री पथे की मौजूदगी में उक्त भूमि की बेजामुक्त कराया गया था |

 

 

 

 

अधिकांश गांव को यही स्थिति 
पामगढ़ क्षेत्र के अधिकांश गांव की यही स्थिति है शासन-प्रशासन की उदासीनता और मिली भगत से गांव की शासकीय भूमि को अपने कब्ज़े को अपने कब्जे में रखे हुए है | कई-कई गांव ऐसे भी है जहां विकास कार्य के लिए एक भी जगह नहीं बची है | अधिकारियों की मिली भगत से सभी शासकीय जमीनों पर कब्ज़ा जमाए हुए हैं | साथ ही गांव के चुनिंदा लोगों में जमीन का बाट भी दिया गया है |  यह सब शासन और प्रशासन के मिली भगत से हो रहा है |  जिसकी वजह से उन लोगों पर अधिकारीयों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती | वे शिकायत का इंतजार करते है और कोई शिकायत करता है तो उसके साथ यही अंजाम होता है |

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