जांजगीर जिले के नगर पंचायत पामगढ़ में संचालित देव वृद्धा आश्रम सेवा समिति द्वारा सेवा के नाम पर लाखों रुपये का झोल शासन को लगाया जा रहा है| 2 बुजुर्गों के लिए 1.67 लाख रुपए आहरण किए जाते हैं, लेकिन कर्मचारियों को केवल खानापूर्ति के लिए पैसे दिए जाते हैं जबकि बुजुर्गो पर सिर्फ 600 रुपए प्रतिमाह ही खर्च किए जाते हैं और सारा पैसा खुद डकार लिया जाता है| चौंकाने वाली बात यह है कि इस आश्रम का संचालन समाज कल्याण विभाग में पदस्थ एक लिपिक की पत्नी अगम बर्मन द्वारा किया जा रहा है।
पामगढ़ के इस वृद्धा आश्रम में पिछले 2 साल से बुजुर्गों की संख्या 4 से 5 ही रही है। वर्तमान में यहां केवल 2 बुजुर्ग निवासरत हैं। इसके बावजूद समिति द्वारा हर महीने लगभग 1.67 लाख रुपये का खर्च दिखाया जा रहा है। जब वृद्धा आश्रम संचालन समिति के मुखिया अगम बर्मन से खर्च का ब्योरा मांगा गया तो उन्होंने बताया कि प्रति वृद्धजन के लिए 20 रुपये प्रतिदिन यानी 600 रुपये महीने का खर्च आता है। उन्होंने यह भी कहा कि 6 महीने में जो चेक कर्मचारियों के नाम पर काटे जाते हैं, उसी राशि से पूरा राशन का खर्च भी उठाया जाता है।
यहाँ मौजूद कर्मचारियों ने मिडिया को बताया की आश्रम में 2 कर्मचारी रखे गए हैं जिन्हें 3000-3000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। लेकिन 6-6 महीने में एक कर्मचारी के नाम पर 90,000 रुपये और दूसरे के नाम पर 77,000 रुपये का चेक काटा जाता है। दोनों कर्मचारी इस राशि में से अपना 6 महीने का वेतन यानी 18,000 रुपये रखकर बाकी पूरी रकम अगम बर्मन को वापस कर देते हैं। कलेक्टर दर पर वेतन भुगतान न कर बंदरबांट की जा रही है।
देव वृद्धा आश्रम समिति, पंजीयन क्रमांक 2832, के नाम पर आश्रम चलाने का टेंडर लिया गया है। नियमानुसार चेक समिति के नाम से जारी होने चाहिए, न कि कर्मचारियों के व्यक्तिगत नाम से। यहां सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग कर शासन को लाखो रुपए का चुना लगाया जा रहा है| समाज कल्याण विभाग के लिपिक की पत्नी द्वारा आश्रम संचालित करने के कारण समिति को प्रशासनिक कार्रवाई का कोई डर नहीं है। इसलिए वह बड़े आराम से इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है |
इस पूरे झोलझाल की पोल खुलने के बाद अब देखने वाली बात है की प्रशासन कोई कार्यवाही करती है या फिर पामगढ़ के अन्य मामलों की तरह ठंढे बस्ते में डाल देती है |