PM RAHAT योजना लॉन्च: सड़क हादसे में 7 दिन इलाज मुफ्त, 1.5 लाख तक का खर्च सरकार देगी

नई दिल्ली

PM RAHAT Scheme: सड़क हादसे भारत में हर साल हजारों परिवारों की जिंदगी बदल देते हैं. कई बार हादसा जानलेवा इसलिए बन जाता है, क्योंकि घायल को समय पर अस्पताल नहीं मिल पाता या इलाज से पहले पैसों की बात आ जाती है. इसी बड़ी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने PM RAHAT योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना का मकसद साफ है, सड़क हादसे के शिकार लोगों को बिना किसी देरी और बिना पैसे की चिंता के सही और उचित समय पर इलाज मिल सके. 

क्या है PM RAHAT योजना
PM RAHAT यानी रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट स्कीम. इसके तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को दुर्घटना की तारीख से 7 दिन तक कैशलेस इलाज (Cashless Treatment) की सुविधा मिलेगी. इलाज पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का खर्च सरकार की तरफ से कवर किया जाएगा. मरीज की जेब से एक रुपया भी नहीं लिया जाएगा.

स्वास्थ्य आंकड़े बताते हैं कि, अगर घायल को पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो सड़क हादसों में होने वाली करीब आधी मौतों पर लगाम लगाई जा सकती हैं. इस समय को गोल्डन आवर कहा जाता है. अक्सर अस्पताल में भर्ती होने में देरी इसलिए होती है, क्योंकि पैसे और पेमेंट को लेकर असमंजस रहता है. PM RAHAT योजना इसी समस्या को खत्म करने की कोशिश है.

See also  लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रदेश में अलर्ट, आगरा की कोचिंग बिल्डिंग में एमसीबी से धुआं निकलते ही मची अफरा-तफरी

योजना में एक और बड़ी दिक्कत को माना गया है. हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग कानूनी झंझट के डर से मदद करने से कतराते हैं. PM RAHAT में ऐसे मददगारों को राहवीर या गुड समैरिटन कहा गया है. इसका मतलब है कि जो व्यक्ति घायल की मदद करेगा, उसे कानूनी परेशानियों से डरने की जरूरत नहीं होगी. न उसे किसी कानूनी पचड़े में पड़ना होगा और न ही उसके जेब से पैसे खर्च होंगे.

112 पर कॉल, सीधे मदद

हादसे के समय पीड़ित खुद, कोई राहगीर या मौके पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 नंबर पर कॉल कर सकता है. इस कॉल के जरिए नजदीकी तय अस्पताल की जानकारी मिलेगी और एंबुलेंस बुलाई जा सकेगी. यह पूरा सिस्टम इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम से जुड़ा है, जिससे पुलिस, एंबुलेंस और अस्पताल आपस में तालमेल से काम कर सकें.

योजना के तहत सभी तरह की सड़कों पर हादसे में घायल लोग कवर होंगे. चाहे वो किसी भी शहर की कोई भी सड़क होग. अगर चोट गंभीर नहीं है, तो 24 घंटे तक का स्टेबलाइजेशन इलाज मिलेगा. अगर जान को खतरा है, तो यह समय 48 घंटे तक बढ़ जाएगा. दोनों ही हालात में 7 दिन तक का पूरा इलाज कवर रहेगा. पुलिस की पुष्टि तय समय सीमा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जरूरी होगी.

See also  दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया, पूजा खेडकर अब होगी गिरफ्तार!

डिजिटल सिस्टम से होगा पूरा काम
PM RAHAT योजना दो मौजूदा सरकारी डिजिटल सिस्टम पर बेस्ड है. एक सिस्टम हादसे की पूरी जानकारी दर्ज करता है और दूसरा इलाज और भुगतान से जुड़ा काम संभालता है. पहला है इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट यानी eDAR, जिसे केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ऑपरेट करता है और दूसरा सिस्टम है ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम TMS 2.0, जिसकी जिम्मेदारी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के पास है. इन दोनों सिस्टम का मकसद यह है कि एक्सीडेंट की सूचना मिलते ही पूरी जानकारी एक ही लाइन में आगे बढ़े. 

हादसे की रिपोर्ट, अस्पताल में भर्ती, इलाज, क्लेम डालना और फिर अस्पताल को पेमेंट, सब कुछ इसी डिजिटल सिस्टम के जरिए किया जाए, ताकि इलाज में देरी न हो और किसी को बार बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें. अस्पतालों को इलाज का पैसा मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से मिलेगा. अगर हादसे में शामिल वाहन का बीमा है, तो पेमेंट बीमा कंपनियों के फंड से होगा. हिट एंड रन या बिना बीमा वाले मामलों में केंद्र सरकार बजट से पैसा देगी. क्लेम मंजूर होने के बाद 10 दिन के भीतर अस्पताल को भुगतान करने का वादा किया गया है.

See also  दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: अब बसों का संचालन सिर्फ DTC करेगी, 'नो PUC, नो फ्यूल' लागू रहेगा

अगर योजना से जुड़ी कोई शिकायत होती है, तो उसका निपटारा जिला सड़क सुरक्षा समिति के तहत किया जाएगा. इसकी जिम्मेदारी जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट के स्तर पर होगी. इससे लोगों को अलग से किसी दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

PM RAHAT योजना में परिवहन, स्वास्थ्य, बीमा और पुलिस विभाग को एक साथ लाया गया है. इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अस्पताल कितनी संख्या में जुड़ते हैं, 112 नंबर कितनी तेजी से काम करता है और पुलिस के कन्फर्मेशन में इलाज में देरी तो नहीं होती. जिला स्तर पर ये प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और इसे कैसे लागू किया जाता है. आने वाले समय में साफ हो जाएगा कि यह योजना सड़क हादसों में जान बचाने में कितनी कारगर साबित होती है.