गुजरात के करजन में साल 2021 में हुए स्वीटी पटेल हत्याकांड में अदालत ने पुलिस इंस्पेक्टर ए.ए. देसाई को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में सजा सुनाना इतना आसान नहीं था क्योंकि लाश मिली नहीं थी।
वडोदरा के पास एक होटल में जो हड्डियां मिली थीं वो इतनी जल चुकी थीं कि उनका डीएनए सैंपल नहीं लिया जा सका। 128 गवाहों में से 40 से ज्यादा अपने बयान से मुकर गए। इन गवाहों में शिकायत करने वाली महिला भी शामिल थी।
सोने की चूड़ियां बनीं अहम सबूत
पुलिस को जो सबूत मिले उनमें पिछला हुआ मंगलसूत्र और सोने की चूड़ियों का सेट अहम कड़ी साबित हुए। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने स्वीटी की पहचान उन चूड़ियों को पहने हुए तस्वीरों से की थी। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले स्वीटी के पति की गवाही भी अहम साबित हुई। स्वीटी के पूर्व पति ने कोर्ट को बताया कि तलाक के कई साल बाद स्वीटी ने उन्हें बताया था कि देसाई के साथ उसका रिश्ता कभी औपचारिक रूप नहीं ले पाएगा।
अदालत ने क्या कहा?
गुरुवार को वडोदरा के करजन में 8वीं एडिशनल सेशंस कोर्ट ने कहा कि घटनाओं का क्रम बताता है कि यह कोई इत्तेफाक नहीं था। अदालत ने कहा कि एक काली कंपास जीप का पुलिस इंस्पेक्टर के घर के अंदर अजीब तरह से उल्टी दिशा में पार्क होना (यह घटना उस सुबह हुई जब उनकी पत्नी कथित तौर पर रात में गायब हो गई थी) और उनके मोबाइल फोन की लोकेशन का एक बंद पड़े होटल उस होटल में मिलना जहां जली हुई लाश मिली थी। यह कोई इत्तेफाक नहीं था।
कोर्ट ने माना कि देसाई ने स्वीटी पटेल का गला उनके ही घर में घोंटा था और फिर दोस्त कीरितसिंह जडेजा की मदद से उनके शरीर के बचे हुए हिस्से को जला दिया था। ये बंद पड़ा होटल जडेजा का ही था।
72 पेज के एक आदेश में एडिशनल सेशंस जज एमबी कोटक ने देसाई को हत्या और सबूत मिटाने के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई और 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। उनके साथ आरोपी बनाए गए होटल मालिक और नेता कीरितसिंह जडेजा को सबूत मिटाने में मदद करने का दोषी पाया गया और उन्हें पांच साल की कड़ी सजा के साथ 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
एक ऐसी शादी जिसके बारे में किसी पता ही नहीं था
करजन पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से जुड़े इस मामले का केंद्र एक ऐसा रिश्ता था, जिसके बारे में देसाई के परिवार का कहना था कि उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर आर एम ज्ञानचंदानी के बयानों के अनुसार, स्वीटी की पहले दो बार शादी हो चुकी थी (पहली बार हेताश पांड्या से और बाद में कुछ समय के लिए एक ऐसे व्यक्ति से जिससे वह ऑनलाइन मिली थी)।
उसने 2017 में एक मंदिर में छोटे से समारोह में देसाई से शादी की। इस दौरान कुछ गवाहों की मौजूदगी में उन्होंने एक-दूसरे को माला पहनाई।
उस समय तक देसाई की शादी अहमदाबाद में एक दूसरी महिला से हो चुकी थी, जिससे उनकी एक बेटी भी थी। स्वीटी देसाई के साथ रहने के लिए वडोदरा चली गई, जहां 2019 में उनके बेटे का जन्म हुआ। फैसले में दर्ज जानकारी के मुताबिक, न तो देसाई के माता-पिता को और न ही समाज में उनकी पत्नी के तौर पर पहचानी जाने वाली महिला को स्वीटी के बारे में कुछ बताया गया था।
स्वीटी की मांग बनी मौत की वजह?
अभियोजन पक्ष का कहना था कि स्वीटी की लगातार यह मांग कर रही थी कि देसाई अपनी कानूनी पत्नी को तलाक दे और उसे सामाजिक मान्यता दे। यही बात 4 और 5 जून, 2021 की रात उनके बंद घर के अंदर झगड़े की वजह बनी, जिसके दौरान देसाई ने उसका गला घोंट दिया। इसके बाद देसाई स्वीटी की लाश को जडेजा के बंद पड़े होटल में ले गया और उसे जला दिया।
देसाई ने सिर्फ छह दिन बाद 11 जून को करजन पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। जब स्थानीय जांच से कोई नतीजा नहीं निकला तो डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस के आदेश पर मामला अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया।
गहनों से हुई स्वीटी की पहचान
एफएसएल गांधीनगर द्वारा देसाई का पॉलीग्राफ टेस्ट किए जाने से शक और गहरा गया और सेल-टावर व सीडीआर डेटा से पता चला कि 5 जून की शाम को देसाई और जडेजा दोनों अटाली में मौजूद थे। बाद के महीनों में घटनास्थल पर की गई जांच-पड़ताल (पंचनामा) में इंसानी हड्डियां, राख, एक फटा हुआ नाइटगाउन और आखिर में पिघले हुए सोने के गहने मिले। एफएसएल अधिकारी ने इन गहनों का मिलान उन गहनों से किया जो स्वीटी ने अपनी तस्वीरों में पहने हुए थे।
स्वीटी का भाई भी गवाही से मुकरा
इस फैसले को जो बात खास बनाती है वह है सबूतों का वह क्रम जिसे अपनाकर कोर्ट इस नतीजे पर पहुंची। इस मामले को और भी मुश्किल बनाने वाली बात यह थी कि जिन 40 गवाहों ने अपने बयान से पलटी मारी उनमें पीड़िता का भाई जयदीप पटेल भी शामिल था। वह इस मामले में शिकायतकर्ता और पहला मुखबिर भी था, जिसने बताया था कि देसाई ने उसकी बहन का गला घोंटकर हत्या कर दी थी।
अभियोजन पक्ष ने 128 गवाहों से पूछताछ की। वहीं सीनियर वकील के.एम. भट्ट, आर.डी. पटेल और नेहल दवे की अगुवाई में बचाव पक्ष ने बताया कि लगभग सभी स्वतंत्र गवाह यानी जब्ती पंचनामे के लिए बुलाए गए करीब 38 पंच गवाह और उस रात ड्यूटी पर मौजूद दो होम गार्ड कोर्ट में अपने बयान से मुकर गए।
जयदीप के भाई और उसकी पत्नी मनीषा ने उसका साथ दिया। यहां तक कि स्वीटी के सौतेले भाई भावदीप ने भी अपना बयान बदल लिया। जबकि मजिस्ट्रेट के सामने उसके बयान में देसाई की उस कथित कबूलनामे का जिक्र था जिसमें उसने अपनी बिना रजिस्ट्रेशन वाली शादी को लेकर हुई हाथापाई की बात मानी थी।
सुप्रीम कोर्ट के तय नियमों का हवाला देते हुए आदेश में कहा गया है कि अगर जांच अधिकारी की गवाही अडिग रहती है तो सिर्फ पंच गवाह के मुकर जाने से बरामदगी (रिकवरी) पर कोई असर नहीं पड़ता।
आदेश में कहा गया है, “लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि पंच गवाह मुकर गए हैं इसका मतलब यह नहीं है कि अभियोजन पक्ष का केस कमजोर हो गया है या उसकी विश्वसनीयता खत्म हो गई है। संबंधित जांच अधिकारी की गवाही को ध्यान में रखते हुए पंचनामा की बरामदगी और अन्य तथ्यात्मक पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।”
कोर्ट ने परिवार के रुख में आए बदलाव को और भी अहम माना। आदेश में कहा गया है कि देसाई की गिरफ्तारी के समय जयदीपभाई ने जांच के समर्थन में एक अर्जी दी थी और उन पर गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में कोर्ट में उन्होंने अपना रुख पूरी तरह बदल लिया। फैसले में इस व्यवहार को बहुत अहम बात माना गया है, जिससे पता चलता है कि शिकायतकर्ता (देसाई) के कहने पर मुकर गया… जो अपराध में (उनकी) मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
लाश न मिलने के मामले में कोर्ट ने उन गवाहों की बात पर ज्यादा भरोसा किया जो पीड़िता के करीबी लोगों का हिस्सा नहीं थे। कोर्ट ने स्वीटी के पहले पति पांड्या और उनके बेटे रिधम की गवाही को खास अहमियत दी। दोनों ने बताया था कि स्वीटी ने देसाई के साथ अपनी शादी को कानूनी मान्यता न मिलने को लेकर अपनी चिंता उनसे जाहिर की थी।
जज ने इस गवाही को इसलिए भरोसेमंद माना क्योंकि यह उन लोगों की तरफ से आई थी जो उस परिवार का हिस्सा नहीं थे। देसाई के एक दोस्त प्रतीक दुगराना ने बताया कि देसाई ने उन्हें अगली ही सुबह फोन किया था। उन्होंने यह बताने के लिए फोन नहीं किया था कि स्वीटी गायब है, बल्कि घर बदलने के बहाने घर से कपड़े और सामान हटाने में मदद के लिए फोन किया था।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के आधार पर कॉर्पस डेलिक्टि के सिद्धांत के तहत शव न मिलने के मुद्दे को सीधे तौर पर सुलझाया गया। इस सिद्धांत के अनुसार, हत्या के मामले में दोषी ठहराने के लिए शव या उसके अवशेषों का मिलना जरूरी नहीं है, बल्कि सिर्फ सीधे या परिस्थितिजन्य सबूतों से यह साबित करना काफी है कि मौत हुई है।
अदालत ने माना कि देसाई और स्वीटी के दो साल के बेटे से लिए गए डीएनए का मिलान अटाली से मिली जली हुई हड्डियों के टुकड़ों से नहीं हो पाया क्योंकि हड्डियां इतनी बुरी तरह जल चुकी थीं कि उनकी प्रोफाइलिंग नहीं हो सकती थी लेकिन अदालत ने कहा कि इससे केस कमजोर नहीं होता क्योंकि उसी जगह से मिले पिघले हुए सोने के गहनों का मिलान एफएसएल ने स्वीटी की तस्वीरों में दिख रहे गहनों से किया था।
कीमती सामान सरकार के पास जाएगा
कोर्ट के फाइनल ऑर्डर के तहत जब्त की गई चीजों में से कीमती सामान सरकार के पास चला जाएगा, जबकि स्वीटी के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स (जैसे उसका पासपोर्ट) उसके बेटे रिधम को सौंप दिए जाएंगे। फैसले में कहा गया है कि यह ऑर्डर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले उसके पहले पति और रिधम को बताया जाएगा।
ऑर्डर में देसाई से हुए उसके छोटे बेटे की मौजूदा कस्टडी या उसके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन केस के रिकॉर्ड से सिर्फ इतना पता चलता है कि 2021 में स्वीटी के लापता होने के कुछ दिनों बाद उसके भाई के परिवार वाले उसे करजन से ले गए थे।
14 अगस्त, 2026 को फाइनल ऑर्डर सुनाने से पहले कोर्ट ने सजा तय करने के लिए उसी दिन सुनवाई की। कोर्ट ने बचाव पक्ष की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें देसाई को कम-से-कम सजा और जडेजा को नाममात्र की सजा देने की मांग की गई थी और साथ ही अभियोजन पक्ष की उस अलग अपील को भी खारिज कर दिया जिसमें दोनों के लिए ज्यादा-से-ज्यादा सजा की मांग की गई थी।