प्री डायबिटीज को किया जा सकता है रिवर्स

केवल शकर खाने से ही कोई प्री-डायबिटिक नहीं हो जाता, बल्कि जिन लोगों में सामान्य से अधिक मात्रा में हेल्दी ब्लड शुगर पाया जाता है उनमें भी टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा 5 से 15 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इतना ही नहीं प्री-डायबिटिक में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, डिमेंशिया, किडनी और आंखों के डैमेज होने, रक्तसंचार सुचारू नहीं होने से पैरों में दर्द का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्री-डायबिटीज की पहचान करना जरूरी हो जाता है।

वजन से डायबिटीज पर कंट्रोल
अधिकांश प्री-डायबिटिक को इस बात की जानकारी ही नहीं होती कि उन्हें यह समस्या है। इस वजह से वे समय पर सही कदम नहीं उठा पाते और डायबिटीज के मरीज बन जाते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च के अनुसार दवाओं की तुलना में लाइफस्टाइल में परिवर्तन करने से अधिक लाभ मिलता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पांच चीजें ऐसी हैं जो कैंसर की आशंका को महिलाओं में 84 प्रतिशत और पुरुषों में 72 प्रतिशत तक कम कर सकती है, जैसे- पोषण युक्त आहार, नियमित व्यायाम, संतुलित वजन, अल्कोहल का कम सेवन और धूम्रपान पर रोक।

See also  21 मार्च से बुध की चाल बदलेगी खेल!, इन राशियों के लिए बढ़ सकता है तनाव

पॉइंटर
-केवल 7 प्रतिशत तक वजन कम कर लेने से शरीर इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया करने में सक्षम हो जाता है।
-इंसुलिन हॉर्मोन शरीर को 57 प्रतिशत तक ब्लड शुगर उपयोग कर लेने का संकेत देता है।

कैलोरी पर कंट्रोल
कुछ आसान उपायों से प्री-डायबिटीज को रिवर्स किया जा सकता है जिसमें आहार की मात्रा पर नियंत्रण, सैचुरेटड फैट कम करना, जोकि डेयरी प्रोडक्ट और वसायुक्त मांस में पाया जाता है, फलों, सब्जियों और साबुत अनाजों के जरिए पर्याप्त मात्रा में फाइबर प्राप्त करना, हर दिन कम से कम 30 मिनट का व्यायाम या एक्टिविटी में शामिल होना। डायबिटीज के कारण चूंकि हार्ट अटैक और स्ट्रोक, किडनी फेल्यिर, नर्व डैमेज, सेक्सुअल समस्याओं, असामान्य रक्तसंचार का खतरा भी बढ़ जाता है इसलिए उपरोक्त उपायों के जरिए इन खतरों से भी दूर रहा जा सकता है।

इन खतरों के बारे में अपने डॉक्टर से करें बात…

-यदि आप 45 साल के हो चुके हैं।

See also  थाइरॉएड में शुगर और सोया से बचें

-वजन अधिक है।

-माता-पिता या भाई या बहन में से किसी को डायबिटीज की समस्या है।

-गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की समस्या रही हो या अधिक वजन वाले बच्चे को जन्म दिया हो।

-शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय ना रहते हों।

कुछ बातें हो सकती हैं कारगर…

-फैट और कैलोरी पर नजर रखना सबसे बड़ा टास्क होता है। इसके लिए एप की मदद ली जा सकती है, जो प्री-डायबिटिक के खाने के रूटीन को ट्रैक करता रहे। इसके जरिए फैट और कैलोरी पर नियंत्रण करना संभव हो सकता है।

-रोगी को प्रोत्साहित करने के लिए परिवार का साथ भी बेहद जरूरी है। यदि घर में ही खाने-पीने और व्यायाम का हेल्दी माहौल हो तो इससे तालमेल बिठाने में अधिक परेशानी नहीं होगी। परिवार का कोई सदस्य वॉक पर या जिम में रोगी का साथ दे सकता है।

-टेलीविजन देखने के दौरान खाते रहना भी डायबिटीज को आमंत्रण दे सकते हैं। इस दौरान न तो हमें अपने खाने की मात्रा का ध्यान रहता है और न ही इस बात का कि हम क्या खा रहे हैं?

See also  300 मीटर लंबी गुफा, 4 फुट पानी में पैदल यात्रा… नरसिंह मंदिर के रहस्यलोक का अद्भुत सच

-पोषक तत्वों के बारे में सही-सही जानकारी के लिए किसी आहार विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है और उनके निर्देशों के मुताबिक डाइट चार्ट तैयार किया जा सकता है।