राजस्थान ने रचा इतिहास, ‘मां योजना’ के तहत देशभर में मिलेगा कैशलेस इलाज

जयपुर

राजस्थान के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAA योजना) के तहत आउटबाउंड पोर्टेबिलिटी की शुरुआत की है। इसके साथ ही राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है, जहां के पात्र लाभार्थी अब दूसरे राज्यों में भी कैशलेस इलाज करा सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने वाले मरीजों को आर्थिक राहत देना है।

पहले ऐसे मामलों में मरीजों को इलाज का पूरा खर्च स्वयं उठाना पड़ता था, लेकिन अब यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। आउटबाउंड पोर्टेबिलिटी से अस्पतालों में पहचान, इलाज और भुगतान की प्रक्रिया आसान होगी। नई व्यवस्था के तहत राजस्थान के निवासी तमिलनाडु और कर्नाटक को छोड़कर देश के लगभग सभी राज्यों में सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज करा सकेंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। हालांकि, आरजीएचएस और सीजीएचएस योजना से जुड़े लोग इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होंगे, यानी सरकारी कर्मचारियों को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

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देशभर में 31 हजार से अधिक अस्पतालों में इलाज संभव
आउटबाउंड पोर्टेबिलिटी लागू होने के बाद देशभर के 31 हजार से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों में राजस्थान के लाभार्थियों को इलाज की सुविधा मिलेगी। योजना के अंतर्गत 1900 से अधिक उपचार पैकेज शामिल किए गए हैं, जिनमें हृदय रोग, कैंसर, न्यूरोलॉजी, किडनी समेत अन्य गंभीर बीमारियों का इलाज कैशलेस उपलब्ध होगा।

योजना की मुख्य विशेषताएं

-अन्य राज्यों में कैशलेस इलाज की सुविधा
-25 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार
-प्रति परिवार 850 रुपये का वार्षिक प्रीमियम

इन वर्गों को प्रीमियम सरकार जमा करवाएगी
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत सामान्य परिवारों को 850 रुपये का अंशदान जमा करना होता है, लेकिन कुछ श्रेणियों को इससे छूट दी गई है। इनमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत आने वाले परिवार, सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 के चयनित परिवार, संविदा कर्मी, लघु एवं सीमांत किसान, कोविड अनुदान प्राप्त परिवार, ईडब्ल्यूएस वर्ग तथा 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं।

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