परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में राजस्थान के अमृत लाल मीणा को मिली जगह

जयपुर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के परीक्षा तंत्र को पूरी तरह से पारदर्शी, तकनीक-संचालित और लीक-प्रूफ बनाने के लिए 6 सदस्यों की एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। इस ऐतिहासिक फैसले में राजस्थान के लिए सबसे गौरवान्वित करने वाला पहलू यह है कि इस हाई-प्रोफाइल कमेटी में देश के शीर्ष नौकरशाह और राजस्थान की माटी से ताल्लुक रखने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा (Amrit Lal Meena) को विशेष स्थान दिया गया है।

कोटा, जयपुर और जोधपुर समेत पूरे राजस्थान के लाखों छात्र जो सालों से नीट और जेईई जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं के लिए तैयारी करते हैं, उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पीएम मोदी ने देश के सबसे भरोसेमंद 6 दिग्गजों पर दांव खेला है।

राजस्थान से गहरा और सीधा संबंध
जन्म और पैतृक निवास : अमृत लाल मीणा का जन्म राजस्थान के करौली जिले के सपोटरा उपखंड के 'डाबरा' गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। वे मूल रूप से राजस्थान के ही निवासी हैं और उनका गृह राज्य राजस्थान ही है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा : उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान के ग्रामीण परिवेश में ही की। इसके बाद उन्होंने जयपुर के प्रतिष्ठित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT, Jaipur) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.ई. (Bachelor of Engineering) की डिग्री हासिल की।

See also  भारत में 5G सर्विस लॉन्च, स्मार्टफोन में आने लगे सिग्नल

शानदार प्रशासनिक करियर (IAS)
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और 1989 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी बने, जहां उन्हें बिहार कैडर आवंटित हुआ। वे केंद्र सरकार में कोयला सचिव और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इसके बाद उन्होंने बिहार के मुख्य सचिव के रूप में राज्य की नौकरशाही के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभाली।

पीएम मोदी के 'ट्रस्टेड कमांडर'
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा का प्रशासनिक अनुभव किसी मिसाल से कम नहीं है।

35 सालों का बेदाग और बेजोड़ अनुभव: अमृत लाल मीणा के पास जिला स्तर से लेकर केंद्र सरकार के मंत्रालयों और राज्य के सर्वोच्च मुख्य सचिव (Chief Secretary) पद तक काम करने का 35 वर्षों का समृद्ध अनुभव है।

नक्सल प्रभावित इलाकों में कानून व्यवस्था का लोहा: उन्होंने 1995 से 2004 के बीच सिवान, नालंदा, भोजपुर, गया और मुजफ्फरपुर जैसे अति-संवेदनशील और नक्सल प्रभावित 5 जिलों में लगातार 9 सालों तक जिलाधिकारी के रूप में काम कर कानून-व्यवस्था को संभाला।

See also  गोरखपुर गीडा: उद्योगों में बिजली समस्याओं पर कमिश्नर ने की सख्त कार्रवाई

नेशनल पॉलिसी के शिल्पकार: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स) रहते हुए उन्होंने पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट 'पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान' और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी को जमीनी धरातल पर उतारने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

कोयला क्षेत्र में ऐतिहासिक रिकॉर्ड: केंद्रीय कोयला सचिव (2022-2024) के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान भारत में कोयला उत्पादन में ऐतिहासिक दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई और सरकारी कोयला कंपनियों का मार्केट कैप 150% से अधिक बढ़ गया।

नंदन नीलेकणी के साथ करेंगे काम
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गठित इस 6-सदस्यीय पैनल में इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार (UIDAI) के जनक नंदन नीलेकणी को अध्यक्ष बनाया गया है। इस सुपर-टीम में अमृत लाल मीणा लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक सुरक्षा के सबसे बड़े विशेषज्ञ के रूप में काम करेंगे।

नंदन नीलेकणी (अध्यक्ष): इंफोसिस के सह-संस्थापक और यूआईडीएआई के पूर्व अध्यक्ष।
एस. सोमनाथ: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष।

तपन डेका: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक।

See also  कर्नाटका में माता-पिता गए थे घर से बाहर, 3 दरिंदे आए और लड़की को अगवा कर किया रेप

प्रो. वी. कामकोटी: आईआईटी मद्रास (IIT Chennai) के निदेशक।

अनिता करवल: पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव।

अमृत लाल मीणा (IAS Rtd): बिहार के पूर्व मुख्य सचिव, पूर्व कोयला सचिव और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में क्या होंगे बदलाव?
यह टास्क फोर्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पूरे ढांचे को नया रूप देने और परीक्षाओं में सेंधमारी रोकने के लिए एक सख्त और एक्शन-ओरिएंटेड रोडमैप तैयार करेगी:

लीक-प्रूफ डिजिटल और फिजिकल सिक्योरिटी: ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड की परीक्षाओं में डेटा सुरक्षा मजबूत करना ताकि किसी भी स्तर पर पेपर लीक न हो सके

लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन की कड़ाई: पेपर छपने से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की पूरी चेन को ट्रैक करने के लिए अमृत लाल मीणा के लॉजिस्टिक्स अनुभव का सीधा फायदा मिलेगा।

NTA का प्रशासनिक पुनर्गठन: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाना।

फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त कानून: केंद्र सरकार संसद में एंटी-पेपर लीक बिल (Public Examinations Amendment Bill) भी ला रही है, जिसके तहत पेपर लीक में शामिल अपराधियों पर भारी जुर्माना और तुरंत सजा का प्रावधान होगा।