राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, जांच पर बढ़ा दबाव

अयोध्या
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे सवाल यही है कि सबूत सुरक्षित हैं या नहीं? शनिवार को तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के त्यागपत्र की पुष्टि के बाद घटनाक्रम की समयरेखा को देखें तो कई ऐसे बिंदु सामने आते हैं, जिन पर जवाब अब भी बाकी हैं। एफआईआर होने तक सभी आठ आरोपी भी मंदिर में पहले जैसे ही आते-जाते रहे। अंदर उनसे काम लिया जा रहा था या नहीं, इसकी भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। सवाल उठता है कि मंदिर के अंदर किसी की निगरानी थी या नहीं या जो कठघरे में हैं उन्हीं के हवाले छोड़कर सभी मौन हैं।

चंपत राय ने क्यों कहा- कुछ उल्लेखनीय नहीं
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, विशेषकर महामंत्री चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा को कथित अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, तो सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने या जांच की पहल करने में देरी क्यों हुई। अखिलेश यादव के बयान के बाद चंपत राय ने वीडियो जारी कर यहां तक कहा था कि ट्रस्ट में नियमित ऑडिट होता है। कोई उल्लेखनीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है। मगर अब रुपयों की बरामदगी और गिरफ्तारी ने साफ कर दिया कि गड़बड़ी तो थी।

See also  53 विद्यालयों में शिक्षकों का स्थानांतरण होने कारण 292 गांवो के अभिभावक अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर धरने पर बैठे

जांच के दौरान भी आरोपी कार्य करते रहे
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रारंभिक स्तर पर सब कुछ सामान्य था तो एसआईटी जांच की आवश्यकता क्यों महसूस हुई। जांच की निष्पक्षता को लेकर भी विपक्ष और कई सामाजिक कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि एसआईटी गठन से लेकर एफआईआर दर्ज होने तक जिन आठ कर्मचारियों पर आरोप लगे, वे अपने पदों पर कार्यरत रहे। साथ ही ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी भी अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे। 23 जून को आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में भी संबंधित पदाधिकारी व्यवस्थाओं की कमान संभालते दिखाई दिए।

राम भक्तों का विश्वास बनाए रखने की चुनौती
यहीं से एक और महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है-क्या जांच शुरू होने और एफआईआर दर्ज होने के बीच संबंधित लोगों की संस्थान तक निरंतर पहुंच से संभावित साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका थी। फिलहाल इसका कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है और न ही एसआईटी या सरकार ने ऐसा कोई निष्कर्ष जारी किया है। अब इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी चुनौती केवल दोषियों को सजा दिलाने की नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के विश्वास को बनाए रखने की है। आने वाले दिनों में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया ही तय करेगी कि कथित हेराफेरी की वास्तविक जिम्मेदारी किस पर है और क्या जांच के दौरान साक्ष्यों की सुरक्षा तथा ट्रस्ट की भूमिका पर उठे सवालों के संतोषजनक उत्तर मिल पाते हैं।

See also  चित्तौड़गढ़ शिक्षा विभाग में बड़ी कार्रवाई, पूरे स्कूल स्टाफ जांच के घेरे में

24 घंटे में बदली तस्वीर, पहले इनकार, फिर इकरार
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में आठ आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद अगले 24 घंटे में घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला कि अयोध्या से लेकर देशभर में इसकी चर्चा होने लगी। शुक्रवार दोपहर अचानक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, लेकिन शुरुआत में ट्रस्ट से जुड़े लगभग हर व्यक्ति ने इससे इनकार किया।

गोपाल राव का प्रचार माध्यम पर निशाना
कारसेवकपुरम से लेकर कार्यशाला तक मौजूद सेवादारों का कहना था कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यह भी बताया गया कि चंपत राय पूरे दिन कारसेवकपुरम स्थित अपने आवास 'भरत कुटी' से बाहर नहीं निकले। ट्रस्ट के व्यवस्था प्रभारी गोपाल राव ने भी मुस्कुराते हुए कहा, ‘प्रचार माध्यमों को देखकर लगता है कि ये लोग चंपत राय जी का इस्तीफा लेकर ही मानेंगे।’ उनके इस बयान के बाद भी अटकलों का दौर थमा नहीं।

उधर सोशल मीडिया पर इस्तीफे की चर्चा लगातार तेज होती गई। अयोध्या में लोग एक-दूसरे को फोन कर इसकी पुष्टि करने की कोशिश करते रहे। विपक्षी दलों ने भी इसे मुद्दा बनाते हुए सोशल मीडिया पर सरकार और ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया।

See also  बिहार में विकास की नई धारा: योगी बोले, विश्वास ही है असली आधार

नासिक से सबसे पहले इस्तीफे की पुष्टि
सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने इसे बड़े स्तर की कार्रवाई की शुरुआत बताते हुए दावा किया कि अब ‘बड़ी मछलियों’ पर भी कार्रवाई तय है। इसके बावजूद न तो ट्रस्ट और न ही विश्व हिंदू परिषद की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई। करीब 24 घंटे बाद शनिवार को घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। नासिक में मौजूद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरी ने कुछ पत्रकारों के व्हाट्सएप संदेशों का जवाब देते हुए चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र की पुष्टि कर दी।

इस्तीफे के बाद सोना-चांदी के सुरक्षित होने का दावा
इसके तुरंत बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। प्रेस विज्ञप्ति में केवल इस्तीफों की पुष्टि ही नहीं की गई, बल्कि पहली बार यह भी स्पष्ट किया गया कि रामलला को समर्पित चांदी की ईंटें, सोना-चांदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान समर्पण सुरक्षित हैं तथा उनका पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध है। इस तरह महज 24 घंटे में इनकार से आधिकारिक पुष्टि तक का घटनाक्रम पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।