Operation Sindoor के बाद दूसरा सबसे बड़ा युद्धाभ्यास, दिन-रत गरजेंगे टैंक !

बीकानेर/जैसलमेर.

राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर भारतीय सेना की 'पश्चिमी कमान' (Western Command) अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवा रही है। दो सप्ताह तक चलने वाले इस उच्च तीव्रता वाले युद्ध अभ्यास 'खड़ग शक्ति 2026' में सेना की प्रसिद्ध 'खड़ग कोर' (स्ट्राइक कोर) अपनी पूर्ण युद्धक क्षमता के साथ भाग ले रही है।

आज सोमवार 23 फरवरी को जब महाजन रेंज में तोपें गरजेंगी और टैंक आग उगलेंगे, तो यह साफ़ हो जाएगा कि भारतीय सेना अब पारंपरिक युद्ध के बजाय 'टेक्नोलॉजी ड्रिवन' ऑपरेशंस पर फोकस कर रही है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद नया इतिहास
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह युद्धाभ्यास 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पश्चिमी कमान का पहला पूर्ण-स्तरीय कॉम्बैट ड्रिल है। यह केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि भारतीय सेना के बदलते हुए 'वॉरफेयर डॉक्ट्रिन' (युद्ध सिद्धांत) का प्रदर्शन है। अब सेना भारी सैनिकों की तैनाती के बजाय कम समय में, सटीक मारक क्षमता और आधुनिक उपकरणों के जरिए दुश्मन को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही है।

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नाइट फायरिंग: रात के अंधेरे में भी नहीं बचेगा दुश्मन
'खड़ग शक्ति' का एक प्रमुख हिस्सा 'नाइट कॉम्बैट' है। सोमवार की रात को सेना की बख्तरबंद (Armoured) और मशीनीकृत (Mechanized) इकाइयां अंधेरे में काल्पनिक ठिकानों पर सटीक गोलाबारी का अभ्यास करेंगी। वहीं थर्मल इमेजर और नाइट विजन उपकरणों से लैस टी-90 जैसे भीष्म टैंक रात के सन्नाटे को अपनी गूँज से भर देंगे।

हेलीबोर्न ऑपरेशंस और एयर सपोर्ट
अभ्यास के दौरान थल सेना और वायु सेना के बीच जबरदस्त समन्वय देखने को मिलेगा। हमलावर हेलीकॉप्टर दिन के उजाले में 'हेलीबोर्न ऑपरेशंस' को अंजाम देंगे, जिसमें सैनिकों को दुश्मन के पीछे के ठिकानों पर उतारा जाएगा। इसी तरह से तोपखाना (Artillery) और बख्तरबंद रेजिमेंट के साथ मिलकर ये हेलीकॉप्टर सघन हमले का भी प्रदर्शन करेंगे।

उच्च सैन्य नेतृत्व की निगरानी
इस युद्धाभ्यास की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि थल सेनाध्यक्ष और आर्मी कमांडर सहित कई उच्च सैन्य अधिकारी खुद महाजन फायरिंग रेंज पहुँचकर तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। पश्चिमी सीमा पर संभावित खतरों और पाकिस्तान के साथ लगने वाले बॉर्डर के पास इस तरह का युद्धाभ्यास भारत की सामरिक तैयारियों का सीधा संदेश है।

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