बिना पेट्रोल और बिजली के दौड़ेगी गाड़ी, पेश हुई दुनिया की पहली सोलर एंबुलेंस Stella Juva

 नई दिल्ली

कई बार जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ एक एंबुलेंस का फासला होता है. दूर-दराज के इलाकों में पेट्रोल-डीजल और इलेक्ट्रिसिटी सहित तमाम संसाधनों की कमी इस मुश्किल को और भी बढ़ा देती है. सोचिए… एक ऐसी एंबुलेंस जो बिना तेल, बिना बिजली के और बिना किसी एक्सटर्नल सपोर्ट सिस्टम के सिर्फ सूरज की रोशनी से चलती हो. और इतना ही नहीं, उसी रोशनी से मिलने वाले एनर्जी से एंबुलेंस के अंदर मरीज का इलाज भी होता हो. यह साइंस-फिक्शन कहानी की कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बनने जा रही एक नई तकनीक है. इसका नाम है 'स्टेला जुवा' (Stella Juva), जो आने वाले समय में मेडिकल साइंस की दुनिया ही बदल सकती है। 

हम सभी जानते हैं कि, समय रहते इलाज न मिल पाने के कारण कई लोगों की मौत हो जाती है. इसमें एक बड़ा कारण सही समय पर मरीज तक एंबुलेंस का न पहुंच पाना भी है. नीदरलैंड के एक टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने इसी सवाल का जवाब ढूढ़ने की कोशिश की. उन्होंने सोचा कि दुनिया के उन हिस्सों में जहां सड़क तो है, लेकिन बिजली और अस्पताल नहीं हैं, वहां मरीजों तक इलाज कैसे पहुंचाया जाए. इसी सोच से जन्म हुआ एक ऐसी एंबुलेंस का, जो खुद ही अपनी एनर्जी पैदा करे और हर हाल में मरीज तक पहुंचे। 

See also  पत्नी का गला गमछे से दबाकर बेरहमी से किया कत्ल, फिर दोनों बच्चों का गला हाथों से दबाया, पत्नी के अवैध संबंधों के शक में ले ली सभी की जान 

उन्होंने दिन-रात मेहनत करके एक ऐसी गाड़ी तैयार की, जो पूरी तरह सौर उर्जा पर चलती है. इस गाड़ी का नाम रखा गया 'स्टेला जुवा'. यह सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि चलता-फिरता छोटा सा अस्पताल है. इस सपने को हकीकत बनाने में एक बड़ी सौर ऊर्जा कंपनी ने भी साथ दिया. इस कंपनी ने ऐसे खास सौर पैनल दिए, जो सामान्य पैनलों से कहीं ज्यादा पावरफुल और सस्टेनेबल हैं. इन पैनलों को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि वे सूरज की रोशनी का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा ऑब्जर्व करते हैं। 

क्या है स्टेला जुवा?
स्टेला जुवा को नीदरलैंड की आइंडहोवेन यूनिर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्रों ने तैयार किया है. यह एंबुलेंस पूरी तरह सोलर एनर्जी पर चलेगी और इसके अंदर लगे मेडिकल डिवाइसेज भी उसी से चलेंगे. इस प्रोजेक्ट को जुलाई 2026 तक सड़क पर उतारने की योजना है. इसका मकसद ऐसे इलाकों में इलाज पहुंचाना है जहां बिजली या फ्यूल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। 

See also  राजस्थान-जयपुर में एनर्जी प्री-समिट में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शामिल, ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना हमारा लक्ष्य

इस प्रोजेक्ट में दुनिया की मशहूर सोलर पैनल बनाने वाली कंपनी AIKO ने सोलर टीम आइंडहोवेन के साथ मिलकर काम किया है. AIKO अपने हाई एफिशिएंसी ABC यानी ऑल ब्लैक कॉन्टैक्ट सोलर सेल्स के लिए जानी जाती है, जिसका इस्तेमाल इस एंबुलेंस में भी किया जा रहा है. ये नई सोलर तकनीक ही इस एंबुलेंस की सबसे बड़ी ताकत है. इसमें सोलर सेल्स का डिजाइन ऐसा है कि ज्यादा से ज्यादा धूप को आब्जर्व कर सके. इसमें फ्रंट साइड पर कोई मेटल नहीं होता, जिससे रोशनी ज्यादा मिलती है। 

इन पैनल्स में सिल्वर का इस्तेमाल नहीं किया गया है, जिससे सेल्स ज्यादा मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले बनते हैं. इसके अलावा, यह तकनीक अलग-अलग मौसम और तापमान में भी अच्छी परफॉर्मेंस देती है. यानी गर्मी, ठंड या मुश्किल हालात में भी एंबुलेंस ठीक से काम करेगी. स्टेला जुवा एक मूविंग पावर सप्लाई की तरह भी काम करती है. जहां बिजली नहीं है, वहां भी यह मेडिकल डिवाइसेज चला सकती है. इसका मतलब है कि अब दूर-दराज के गांवों और मुश्किल इलाकों में भी समय पर इलाज पहुंचाया जा सकता है। 

See also  हमारी सरकार ने देश के हर व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश की : मोदी

यह प्रोजेक्ट क्लीन एनर्जी, बेहतर ट्रांसपोर्ट और हेल्थकेयर को एक साथ जोड़ता है. आइंडहोवेन सोलर टीम पहले भी कई बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स बना चुकी है. इस टीम ने वर्ल्ड सोलर चैलेंज क्रूजर क्लास को लगातार चार बार जीता है. इससे पहले यह टीम Stella Vita नाम की सोलर कैंपर वैन और Stella Terra नाम की ऑफ-रोड सोलर गाड़ी भी बना चुकी है, जो खराब रास्तों और दुर्गम इलाकों में भी आसानी से दौड़ सकती है।