भारत को रिकॉर्ड LPG सप्लाई कर रहा अमेरिका, क्या खत्म होगी सऊदी-कतर की बादशाहत?

  नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत की ऊर्जा खरीद व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है. इसी बदलाव का असर है कि मध्य-पूर्वी देशों से भारी मात्रा में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) आयात करने वाला भारत अमेरिका से यह पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहा है. अब अमेरिका पारंपरिक खाड़ी देशों को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है. वहीं, रूस भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों के बावजूद, भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। 

डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 55% रही, जबकि फरवरी में यह केवल 14% थी. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिका इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करना है। 

28 फरवरी को दोनों देशों ने ईरान पर हमला कर दिया था जिसके बाद शुरू हुए युद्ध ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई. इस युद्ध ने एनर्जी सप्लाई चेन पर बहुत बुरा असर डाला क्योंकि ईरान ने तेल-गैस की सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया. फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बेहद नाजुक युद्धविराम कायम है और युद्ध खत्म करने के लिए कोई भी बातचीत अपने आखिरी मुकाम तक नहीं पहुंच पा रही है। 

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LPG के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर भारत अब अमेरिका की तरफ मुड़ा 
भारत पारंपरिक रूप से अपनी अधिकांश LPG जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहा है. लेकिन युद्ध के कारण संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे देशों से आयात बहुत कम हुआ है. भारत के LPG आयात में इन देशों की संयुक्त हिस्सेदारी फरवरी में 81% से घटकर मई में केवल 16% रह गई। 

मई में अमेरिका से भारत को LPG निर्यात 73% बढ़कर लगभग 6.66 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया. इससे खाड़ी क्षेत्र से आने वाले कार्गो में आई भारी गिरावट की भरपाई करने में मदद मिली। 
 
सप्लाई में आई रुकावट के चलते भारत को घरेलू स्तर पर भी सख्त कदम उठाने पड़े. सरकार ने हाल ही में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए LPG सिलेंडर खरीदने पर रोक लगा दी और कुछ उद्योगों को LPG की सप्लाई कम कर दी ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके। 

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घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी ने भी स्थिति को कुछ हद तक संभालने में मदद की है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का LPG उत्पादन संघर्ष से पहले लगभग 35,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन था जो बढ़कर 50,000-52,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंच गया है. इससे आयात पर निर्भरता कुछ कम हुई है लेकिन देश की कुल मांग का लगभग 60% हिस्सा अब भी आयात से पूरा होता है। 

तेल आयात पर भी ईरान संघर्ष का असर
भारत के तेल आयात में भी संघर्ष का असर देखने को मिला है. मई में रूस से कच्चे तेल का आयात 24% बढ़कर 19.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जो भारत के कुल लगभग 49 लाख बैरल प्रतिदिन के कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा है। 

केप्लर के विश्लेषकों का कहना है कि रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों को सही कीमत पर मिल रहा है. भारत को यह तेल ऐसे वक्त में मिल रहा है जब खाड़ी देशों से सप्लाई लगभग रुकी हुई है। 

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इसके साथ ही भारत ने वेनेजुएला और ओमान से भी खरीद बढ़ाई है. मई में ओमान से कच्चे तेल का आयात 179% बढ़ा, जो यह दिखाता है कि भारतीय रिफाइनरियां ऐसे सप्लायरों की ओर रुख कर रही हैं जिन्हें समंदर के जरिए देश में लाना आसान हो।