हम तो शहीद है हर युग में जन्म लेंगे, छात्रों के जख्म कहती लोकतंत्र की कहानी, विरोध को कुचलने जमकर चली लाठियां

हम तो शहीद है हर युग में जन्म लेंगे : भारत को एक लोकतांत्रिक देश कहा जाता है, लेकिन 20 जुलाई को जो राजधानी में छात्रों के साथ हुआ उसे देखकर नहीं लगता की यह एक लोकतांत्रिक देश होगा। जहाँ आवाम की आवाज़ को दबाने के लिए पुलिसिया बल का प्रयोग किया जाए| कहते है छात्र देश का भविष्य होते है लेकिन जब इनके भविष्य के साथ खेल खेला जाए तो गुस्सा होना सामान्य बात है, सरकार की पूरी जवादेही बनती है |

 

 

हम तो शहीद है हर युग में जन्म लेंगे : छात्र अपने भविष्य और अपनी की गई मेहनत के खिलाफ हुए आघात को लेकर महीने भर तक धरना प्रदर्शन के बाद सड़क पर मार्च करने निकले थे। न हीं उनके हाथों में हथियार थे और ना ही कोई ऐसी चीज जिससे कि लोकतंत्र खतरे में  हो। बावजूद इसके पुलिस की बर्बरता जिस प्रकार छात्रों पर देखने को मिली उससे पता चलता है कि प्रशासन किसी दुश्मन पर अपना गुस्सा निकाल रही हो।

 

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हम तो शहीद है हर युग में जन्म लेंगे : सड़क पर उतरने वाले सभी देश के कोने-कोने से आए हुए छात्र-छात्राएं थे । जो पिछले एक माह से अपने साथ हुए अन्य को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर बैठे हुए थे। वह इंतजार कर रहे थे की कब देश की सत्ता में बैठे सरकार आए और उनकी तकलीफें पूछे जिससे उनकी परेशानियों का समाधान निकल आए।

 

 

 

 

 

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हम तो शहीद है हर युग में जन्म लेंगे : सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आने पर छात्रों ने 20 जुलाई को सांसद मार्च निकालने की योजना बनाई। यह योजना पिछले एक सप्ताह से बनी हुई थी। इस दौरान भी सरकार की ओर से कोई बच्चों से बातचीत करने नहीं आया। बल्कि पुलिस द्वारा लगातार उनको परेशान करने लगे।

 

 

हम तो शहीद है हर युग में जन्म लेंगे : लोकतंत्र में जनता द्वारा बनाए गए प्रतिनिधि ही देश में राज करते हैं, पूरे देश के लिए वही जिम्मेदार होते हैं| लोगों को अपनी मांगे या बातों को सामने रखने के लिए धरना प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ता है। जो एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। देश की सत्ता में बैठे लोगों को छात्रों के सवालों का जवाब देना उनकी मज़बूरी है। और छात्रों को सवाल पूछना उनका अधिकार है।

जब सरकार अपनी जवाब दे ही से भागने लगे तब इस तरह की नौबत आना सामान्य से बात है। 20 जुलाई को जो हुआ वह इसी का ही नतीजा है। सरकार जवाब देने के बजाय छात्रों के प्रदर्शन से मुंह मोड़ रही है|

 

हम तो शहीद है हर युग में जन्म लेंगे : संसद मार्च के दौरान पुलिस और सादे भेष में पहुंचे कुछ तथाकथित लोगों द्वारा जिस बर्बरता से बच्चों पर लाठी चलाई है। वह लोकतंत्र को कलंकित करने वाला है। सोसल मिडिया के दौरान में आज हर किसी के पास कैमरावाला मोबाइल है, जिससे वह अपने आसपास की घटना कैद कर लेते हैं| लाठीचार्ज का हर एक दृश्य किसी ना किसी कैमरा में कैद हो चूका है|

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सराफत और नफरत से छात्रों पर लाठी मारने वाले सभी चेहरे बेनकाब हो गए है|अब लाठी खाए हुए बच्चे कल किसी क्षेत्र में जब देश का नाम रोशन करेंगे तब यह लाठी चलाने वाले किस मुंह से उनका सामना करेंगे| या फिर उनके मन में इनके या इनके परिवार के प्रति किस तरह का भाव जागेगा आप समझ सकते हैं| आज की नफरत की आग कल भी रहेगी|

 

हम तो शहीद है हर युग में जन्म लेंगे : पुलिस की लाठी से घायल हुए छात्रों को मदद देने के लिए पहुंचे अन्य छात्रों को जिस तरह से पुलिस ने बेरहमी से लाठियां से मारा यह शर्मसार कर देने वाला है। पुलिस की लाठियां तो आपराधियों पर चलाने के लिए होती है लेकिन शांतिपूर्ण ढंग से सड़क पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बरसाना भविष्य की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।

हम तो शहीद है हर युग में जन्म लेंगे : बच्चियों पर जिस बर्बरता से पुलिसकर्मियों ने लाठी चलाई उससे लग रहा है कि इस देश से इंसानियत खत्म हो चुकी है। लगता है लाठी चलाने वाले पुलिसकर्मी बच्चों को रोकने नहीं किसी आतंकवादी को रोक रहे हैं। जो देश के लिए खतरा हो | गौर करने वाली बात है की लाठी मारने से पहले सभी पुलिस वालों ने अपने नेम प्लेट निकाल दिए थे| इस संबंध में जब एक पत्रकार ने पूछा तो महिला पुलिस अधिकारी ने कहा नेम प्लेट से गर्मी लग रही थी इस लिए निकालनी पड़ी |

 

हम तो शहीद है हर युग में जन्म लेंगे : हम यह भी कह सकते हैं जब सत्ता बहरी हो जाती है सुनने से इंकार करती है, संवाद को विवाद में बदलती है तब लोकतंत्र में इस प्रकार की नौबत आती है | छात्रों मुफ्त में या खैरात में कुछ नहीं मांग रहे थे | वो तो बस पूरी ईमानदारी से परीक्षा कराने की ही मांग कर रहे थे | वो शांति तरीके से सरकार चाहती तो यह मसला महीने भर पहले ही खत्म हो सकता था| लेकिन सत्ता के अहंकार में डूबी यह सरकार सब कुछ जानते हुए आँख मूंदकर चुपचाप बैठी हुई है और देश के मुखिया बच्चों की मांगों को नज़र अंदाज़ कर देश विदेश का दौरा कर रहे है |