आधार कार्ड में नाम बदलना हो या फिर पता, ऐसे कामों के लिए आपको सेंटर जाने की नहीं होगी जरूरत

नई दिल्ली

चाहे कोई सरकारी काम हो या फिर प्राइवेट, आजकल भारत में सभी जगहों पर लोगों को आधार कार्ड  की जरूरत होती है। इस कारण उन्हें हर जगह अपने साथ आधार कार्ड रखना होता है। कई जगहों पर आधार कार्ड की फोटो कॉपी भी देना पड़ती है। हालांकि, जल्द एक ऐसी सुविधा आने वाली है, जिसके बाद लोगों को अपने आधार की फोटो कॉपी की जरूरत नहीं होगी। जी हां, वे आधार कार्ड की फोटोकॉपी की जगह इलेक्ट्रॉनिक आधार कार्ड शेयर कर पाएंगे। ऐसा एक नए QR Code बेस्ड ऐप के जरिए हो पाएगा। आइये, इस नए तरह के आधार कार्ड की पूरी डिटेल जानते हैं।

इस नए ऐप से लोगों के कई काम आसान हो जाएंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नवंबर तक आपको अपना बायोमेट्रिक डिटेल जमा करने के अलावा, पता अपडेट करने और अन्य डिटेल जमा करने के लिए आधार सेंटर पर जाने की जरूरत नहीं होगी। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने एक नया प्रोटोकॉल तैयार किया है। यह जन्म प्रमाण पत्र, मैट्रिकुलेशन प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, पैन, पीडीएस और मनरेगा डेटाबेस से आपका पता और अन्य डिटेल ले लेगा। इससे न केवल लोगों का काम आसान होगा, बल्कि आधार बनवाने के लिए नकली दस्तावेजों के यूज होने पर भी काफी हद तक रोक लगेगा। इतना ही नहीं, UIDAI बिजली बिल डेटाबेस तक पहुंचने की कोशिश में लगा हुआ है। इससे और भी सुविधा होगी।

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एक रिपोर्ट के अनुसार, UIDAI के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर भुवनेश कुमार ने बताया है कि एजेंसी के द्नारा नया ऐप डेवलप किया जा रहा है और एक लाख मशीन में से लगभग 2 हजार मशीन अब नए टूल में मूव हो गई हैं।

घर बैठे ही दे पाएंगे फिंगरप्रिंट
अधिकारी का कहना है कि आप जल्द ही घर बैठे फिंगरप्रिंट और आईरिस देने के अलावा बाकी सभी काम कर सकेंगे। इसमें पता अपडेट करना, फोन नंबर, नाम बदलना और गलत जन्मतिथि में सुधार करना भी शामिल होगा। आधार के क्यूआर कोड बेस्ड मोबाइल-टू-मोबाइल या ऐप-टू-ऐप ट्रांसफर की सुविधा को, आधार के गलत उपयोग से रोकने के लिए जरूरी माना जा रहा है। इसका यूज कई उद्देश्यों के लिए किया जाना है, जिसमें होटलों में चेक-इन से लेकर चलती ट्रेन में आइडेंटिटी कार्ड तक, काफी कुछ शामिल है। कुमार ने कहा है कि यह आपके अपने डेटा पर अधिकतम यूजर्स कंट्रोल देता है। इसे केवल सहमति से ही शेयर किया जा सकता है।

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इतना ही नहीं, इसका यूज सब-रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार द्वारा प्रोपर्टी रजिस्ट्रेशन के समय भी किया जा सकता है। यहां अक्सर धोखाधड़ी होती है। कुमार ने कहा कि यूआईडीएआई राज्य सरकारों को प्रोपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए आने वाले लोगों की वेरिफिकेशन करने के लिए आधार का यूज करने के लिए जागरूक कर रहा है, ताकि धोखाधड़ी को रोका जा सके।