अपने पालतू कुत्ते को बचाने के लिए 13 साल के बच्चे ने उफनती नदी में लगाई छलांग, कुत्ता को बच गया लेकिन बच्चा बह गया, माँ-पिता का इकलौता बच्चा था

असम में आई भयानक बाढ़ में दिल को झकझोरने वाली कई घटनाएं हुई हैं। ऊपरी असम के शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट में पानी ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया। राज्य में अभी तक 70 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और 7 लाख लोग प्रभावित हैं। बाढ़ में एक मौत नज़ीरा सब-डिस्ट्रिक्ट के बामुन पुखुरी गांव में हुई। यहां 13 साल के बच्चे हृदिप पनिका ने बाढ़ के पानी में बह रहे अपने पालतू पिल्ले को बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी। जब उसकी कहानी को कंटेंट क्रिएटर होमोय गोगोई ने शेयर किया तो लोग भावुक हो गए।

 

लोकल मॉडल स्कूल में 7वीं क्लास का स्टूडेंट हृदिप पनिका दीपक और पार्वती पनिका का इकलौता बच्चा था। उसने एक कुत्ते का बच्चा पाल रखा था। पिल्ले का नाम उसने बोरून रखा था। उसके बामुन पुखुरी गांव में भयानक बाढ़ आई थी।

 

अपने पालतू कुत्ते को बचाने के लिए 13 साल के बच्चे ने उफनती नदी में लगाई छलांग, पपी को बहता देख लगा दी छलांग

हृदिप ने देखा कि उसका तीन महीने का पिल्ला पानी की तेज धारा में बह रहा है। अपने पालतू जानवर को बचाने के लिए तुरंत वह पानी में कूद पड़ा। उसने पिल्ले की जान तो बचा ली, लेकिन खुद डूब गया। पानी की तेज धारा उसे बहा ले गई। बचाव दल ने लंबे खोजबीन के बाद हृदिप का शव बरामद किया।

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इस दुखद घटना ने दीपक और पार्वती को तोड़कर रख दिया है। बाढ़ में अपना घर और सामान गंवा चुके हृदिप के मां-बाप इकलौते बेटे को खोने के गम से जूझ रहे हैं। सोशल मीडिया पर जब कंटेंट क्रिएटर होमोय गोगोई ने हृदिप की पूरी कहानी बताई तो लोग रो पड़े। एक ने लिखा कि फरिश्ते सच में होते हैं, और वह उन्हीं में से एक था।

 

दूसरे यूजर ने लिखा कि लोगों को इतना दुख क्यों सहना पड़ता है? यह कोई कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है। यह दिल तोड़ने वाला है। भगवान तुम्हारी पवित्र आत्मा को शांति दे। एक अन्य ने हृदिप को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि कोई भी खुशी इस दुख को कम नहीं कर सकती। यह कितनी क्रूर बात है कि किस्मत ने इन माता-पिता से जीने की एकमात्र वजह छीन ली।

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