प्लेन क्रैश के बाद भी 40 दिनों तक कैसे अमेज़न के जंगलों में जिंदा रहे बच्चे

कोलंबिया में करीब 40 दिन पहले एक विमान हादसे में चार बच्चे लापता हो गए थे। इन बच्चों को ढूँढने के लिए बड़े पैमाने पर सरकार के द्वारा खोज अभियान भी चलाया गया था। जिसके बाद आखिरकार वह समय भी आ गया जब ये बच्चे अमेज़न के जंगल से सुरक्षित मिल गए। इन बच्चों के सुरक्षित पाए जाने के बारे में खुद कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने पत्रकारों को दी। उन्होंने कहा कि, विमान हादसे में लापता हुए बच्चों के लिए चलाया जा रहा खोज अभियान समाप्त किया जा रहा है, क्योंकि सभी बच्चे सुरक्षित मिल गए हैं। हालांकि शुरुआत में यह कहा जा रहा था कि इस हादसे में सभी यात्री मारे जा चुके हैं। ऐसे में इन बच्चों का मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है। चलिए जानते हैं कि आखिर यह पूरा वाकया क्या है?

कैसे हुआ हादसा?

दरअसल 1 मई के दिन सेना का एकल इंजन वाला एक विमान अपने साथ 6 यात्रियों को लेकर जा रहा था। लेकिन अचानक इंजम में कुछ खराबी के चलते वह रास्ते में में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा होने के बाद कुछ ही समय में विमान का राडार से सम्पर्क भी टूट गया। इन 6 यात्रियों में 4 बच्चे भी शामिल थे। इन सभी बच्चों की उम्र 11 महीने से 13 साल के बीच बताई जा रही है। घटना के बाद जब सरकार ने तलाश अभियान चलाया तो उन्हें 16 मई को अमेज़न के जंगल में विमान का मलबा मिला।

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लापता रहे बच्चे

इस तलाश अभियान में बचाव दल को विमान के मलबे से पायलट और दो अन्य यात्रियों के शव मिले। लेकिन उन्हें चारों बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इस स्थिति को देखते हुए कोलंबिया की सरकार ने बच्चों को ढूँढने के लिए सेना को लगा दिया। सेना के 150 जवान और खोजी कुत्तों ने जंगल का बड़ा इलाका बच्चों की तलाश में खोज डाला। हादसे के करीब 40 दिन बाद मिले बच्चे थोड़े कमजोर जरुर नजर आए, लेकिन अब वे सभी सुरक्षित हैं।

कैसे रहे जिंदा?

इस मामले में कोलंबिया के स्वदेशी लोगों के राष्ट्रीय संगठन ने बताया कि बच्चों के इतने दिनों तक जिंदा रहने के पीछे प्राकृतिक वातावरण काफी सहयोगी रहा है। बच्चों ने अपने सामने आने वाले जंगली फलों का सेवन किया। इसके अलावा वे बीज भी खाने लगे, जिसकी मदद से उनका शरीर काम करता रहा।

कीट-मकोड़ों ने किया परेशान

इसके अलावा गार्जियन के परिवार में से एक सदस्य ने जानकारी देते हुए बताया कि जब विमान हादसा हुआ, तब उन्हें विमान से कुछ खाने की चीजें भी मिली। हालांकि इस दौरान बच्चों के लिए खाना ढूँढने के साथ ही कीट और मकोड़ों से बचना भी एक बड़ा चैलेंज साबित हुआ। उनके शरीर पर कीट-मकोड़ों के काटने के कुछ निशान भी हैं, लेकिन घबराने जैसी कोई बात नहीं है। इतने दिनों में बच्चों ने इन कीड़ों से भी निपटना सीख लिया था।

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