महिलाओं के लिए कार लोन में बड़ा फायदा, 0.8% ब्याज और 90% तक लोन

नई दिल्ली

क्या आप अपनी ड्रीम कार खरीदने का सपना देख रही हैं? तो आपके लिए बड़ी खबर है! भारतीय बैंक अब महिला कार खरीदारों को खास तवज्जो दे रहे हैं, जिसका सीधा फायदा आपको लोन डील्स में मिल सकता है. एक समय था जब हर किसी के लिए लोन की शर्तें लगभग एक जैसी होती थीं, लेकिन अब जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा देने और महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ाने के लिए बैंकों ने अपने दरवाजे खोल दिए हैं, वह भी खास छूट के साथ.

महिलाओं को क्या खास फायदा मिल रहा है?
महिला कार लोन आवेदकों को मानक दरों की तुलना में लगभग 5-10 आधार अंक तक कम ब्याज दर की पेशकश की जा रही है. इसका मतलब है कि आपको कम ईएमआई भरनी पड़ेगी, जिससे आपकी जेब पर बोझ कम होगा.

लेकिन फायदा सिर्फ ब्याज दर तक सीमित नहीं है. बैंक प्रोसेसिंग फीस में भी कटौती कर रहे हैं और सबसे महत्वपूर्ण—लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात बढ़ा रहे हैं. कैनरा बैंक जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 0.50% तक कम दरें और सड़क पर कीमत (ऑन-रोड प्राइस) का 90% तक फंडिंग दे रहे हैं! कुछ मामलों में तो यह फंडिंग ऑन-रोड कीमत तक भी बढ़ सकती है, जिससे आपकी डाउन पेमेंट की चिंता काफी कम हो जाती है.

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इन लाभों का फायदा कैसे उठाएं?

अगर आप इन विशेष लाभों का फायदा उठाना चाहती हैं, तो कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी:

प्राथमिक आवेदक: लोन के लिए महिला को ही प्राथमिक आवेदक होना चाहिए.

रजिस्ट्रेशन: वाहन का रजिस्ट्रेशन भी महिला के नाम पर होना चाहिए.

एलिजिबिलिटी: एलिजिबिलिटी मानदंड लगभग सामान्य ही हैं.

उम्र: 21 से 65 वर्ष.

दस्तावेज: वैध केवाईसी (KYC) और आय का प्रमाण.

क्रेडिट स्कोर: 750 से ऊपर का अच्छा क्रेडिट स्कोर होना बेहतर है.

ये शर्तें यह सुनिश्चित करती हैं कि वित्तीय लाभ और स्वामित्व दोनों ही महिला उधारकर्ता के पास रहें. इसके अलावा, आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा रहा है, जिसमें कम दस्तावेज़ और तेज़ अनुमोदन शामिल हैं.

 

बैंक क्यों दे रहे हैं ये आकर्षक स्कीम?
अमित सेठिया बताते हैं कि इन विशेष योजनाओं को शुरू करने के पीछे बैंकों का मुख्य उद्देश्य वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देना है. बैंक महिलाओं की विश्वसनीयता को जिम्मेदार उधारकर्ता के रूप में पहचानते हैं. इन पहलों से महिलाओं को संपत्ति मालिक (Asset Owners) के रूप में सशक्तिकरण मिलता है और उनकी वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) में वृद्धि होती है. आरबीआई की रेपो दर स्थिर होने के बावजूद, बैंक इन लिंग-विशिष्ट ऑफर्स और त्योहारी छूट का उपयोग करके क्रेडिट पहुंच बढ़ा रहे हैं, जो सीधे तौर पर महिलाओं की आर्थिक गतिशीलता को समर्थन देता है.

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