सावधान! डोसा बनाने में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां? सेहत पर पड़ सकता है भारी असर

अक्सर लोग जब हल्का या कुछ हेल्दी स्नैक्स की बात करते हैं, तो दक्षिण भारतीय डिश डोसा अधिकतर लोगों की पहली पसंद होती है. क्रिस्पी, पतला और गर्मागर्म डोसा के अलग-अलग प्रकार मार्केट में तो मौजूद हैं लेकिन कई लोग घर पर भी डोसा बनाना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि डोसा बनाना सिर्फ एक कुकिंग स्किल नहीं बल्कि एक विज्ञान है और इस बारे में IIT मद्रास के प्रोफेसर महेश पंचग्नूला ने भी इंटरव्यू में बताया था.

अक्सर लोग डोसा के स्वाद के चक्कर में कुछ ऐसी गलतियों को नजरअंदाज कर सकते हैं जो आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं. तो आइए डोसा के बैटर, तवे और उसमें इस्तेमाल किए गए तेल की उन गलतियों के बारे में जान लेते हैं जिन्हें करने से आपको बचना चाहिए.

फर्मेंटेशन का समय और तापमान
डोसा बनाने से पहले दाल और चावल को पीसकर उसमें फर्मेंटेशन यानी खमीर उठाना होता है. अधिकतर लोग इस प्रोसेस में ही गलती करते हैं जिससे बचना चाहिए. दरअसल, बैटर को बहुत ज्यादा देर तक गर्म स्थान या बाहर कहीं छोड़ देने से उसमें हेल्दी बैक्टीरिया के अलावा हानिकारक बैक्टीरिया भी पनपने लगते हैं जिससे उसमें स्मेल आने लगती है.

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गर्मियों में खमीर जल्दी उठता है जबकि सर्दियों में वक्त लगता है. अगर आप बहुत ज्यादा गर्म जगह पर बैटर रखते हैं तो वह खट्टा होकर खराब हो सकता है. इसलिए याद रखें कि डोसा बैटर को फर्मेंट करने के लिए आदर्श तापमान 25°C से 30°C है. गर्मी में फर्मेंटेशन का समय 6 से 8 घंटे और सर्दी में 12-14 घंटे तक हो सकता है.

आलू की स्टफिंग में क्वालिटी
मसाला डोसा में आलू की स्टपिंग का इस्तेमाल होता है लेकिन अधिकतर लोग ध्यान नहीं रखते कि आपको किस तरह के आलू का इस्तेमाल करना होता है. ध्यान दें कि यदि आलू में अंकुर (Sprouts) निकल आए हैं या वो कहीं से हरे दिख रहे हैं तो उनके इस्तेमाल से बचना चाहिए. जानकारी के मुताबिक, हरे आलू में सोलेनिन नामक जहरीले तत्व होते हैं जो सेहत के लिए सही नहीं होते.

साथ ही, स्टफिंग को ज्यादा देर तक कमरे के तापमान पर भी न छोड़ें क्योंकि उबले हुए आलू बहुत जल्दी खराब होते हैं और फूड पॉइजनिंग का सबसे बड़ा कारण बनते हैं.
बासी सामग्री और मिलावट से बचें

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डोसे के लिए चावल और दाल लेते समय देखें कि अधिक पुरानी दाव या चावल तो नहीं है क्योंकि समय के साथ ऐसे दाल-चावल में घुन या फंगस हो सकती है. इसके अलावा, बाजार से खरीदे हुए रेडी-टू-ईट बैटर में प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा अधिक हो सकती है. इसलिए आप कोशिश करें कि हमेशा फ्रेश सामग्री का ही उपयोग करें. अगर बैटर से खट्टी या सड़ी हुई गंध आए तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय फेंक देना बेहतर है.

नॉनस्टिक की कोटिंग देखें
अगर आप नॉनस्टिक तवे का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसकी कोटिंग पर नजर जरूर डालें. अगर तवे की टेफ्लॉन कोटिंग उखड़ रही है तो वह गर्म होने पर कैमिकल को डोसे में छोड़ सकता है जो सेहत के लिए सही नहीं होता. इसलिए कोशिश करें कि लोहे का तवा इस्तेमाल करें या फिर ऐसा नॉनस्टिक इस्तेमाल करें जिसकी कोटिंग पूरी तरह सही हो.

तेल और पानी की शुद्धता
डोसा बैटर में मिलाया जाने वाला पानी और तवे पर इस्तेमाल होने वाला तेल भी पेट की हेल्थ खराब कर सकता है. हमेशा साफ पानी के साथ डोसे का बैटर तैयार करें. इसके अलावा डोसे में ऊपर से जो तेल इस्तेमाल करें उसका भी ध्यान रखें कि वो बचा हुआ या फिर बार-बार गर्म किया हुआ तेल ना हो. क्योंकि बार-बार गर्म किया हुआ या घटिया क्वालिटी का तेल कोलेस्ट्रॉल और पेट की समस्याओं को दावत देता है.

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