प्रचंड गर्मी से बढ़ा ‘मेगा अल नीनो’ का खौफ, 149 साल पहले 4% आबादी का हुआ था सफाया

 नई दिल्ली

1877 के बाद अब तक का सबसे ताकतवर अल-नीनो बन रहा है. उस वक्त इसने पूरी दुनिया में गर्मी की लहरें, सूखा और महामारी फैलाकर पृथ्वी की 4 प्रतिशत आबादी को मार डाला था. अब वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि 2026-27 में यह दोहरा सकता है। 

अल-नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय यानी ट्रॉपिकल हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. सामान्य अल-नीनो हर 2-7 साल में आता है, लेकिन इस बार यह सुपर या मेगा स्तर का बन रहा है. कारण – समुद्री गर्मी की लहर, पॉजिटिव पैसिफिक मेरिडियनल मोड और गर्म दक्षिणी हवाएं। 

बेन नॉल जैसे मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लहर अल-नीनो को और मजबूत बना रही है. गर्मी और नमी बढ़ने से पश्चिमी देशों में गर्मी की लहरें और तेज हो सकती हैं. वैज्ञानिक कह रहे हैं कि यह पैटर्न 140 साल में सबसे ताकतवर हो सकता है। 

अभी प्रशांत महासागर में 8046 KM लंबी गर्मी की लहर फैली हुई है. यह माइक्रोनेशिया से शुरू होकर कैलिफोर्निया तक पहुंच चुकी है. कैलिफोर्निया के पास इसे 'द ब्लॉब' कहा जा रहा है. यहां समुद्री सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर है. NOAA की रिपोर्ट के मुताबिक यह जिस लेवल का है वो बेहद विशालकाय है।  

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यह लहर अल-नीनो को तेजी से मजबूत कर रही है. इससे समुद्री जीव-जंतुओं पर असर पड़ रहा है. मौसम के पैटर्न पूरी तरह बदल रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गर्मी की लहर अल-नीनो को और बढ़ावा देगी, जिससे पूरे साल मौसम अनियमित रहेगा। 

1877 के बाद सबसे बड़ा अल-नीनो?
1877-78 का अल-नीनो इतिहास का सबसे विनाशकारी था. उसने गर्मी की लहरें, सूखा और फसल नष्ट करके लाखों लोगों की जान ली. अब वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2026 का अल-नीनो उससे भी ताकतवर हो सकता है. अप्रैल 2026 के मौसम मॉडल्स में वैज्ञानिक हार्ट पल्पिटेशंस महसूस कर रहे हैं. अगर यह सुपर अल-नीनो बना तो 2027 में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड तोड़ सकता है. जलवायु परिवर्तन के साथ यह और खतरनाक बन रहा है। 

दुनिया भर में कहां-कहां क्या असर होगा?
अल-नीनो का असर पूरे विश्व पर पड़ेगा. ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी और मध्य अफ्रीका, भारत और अमेजन के जंगलों में सूखा और भयंकर गर्मी बढ़ेगी. आग लगने का खतरा ज्यादा होगा. अमेरिका के दक्षिणी हिस्से में भारी बारिश और बाढ़ आ सकती है. उत्तरी अमेरिका में गर्मी बढ़ेगी। 

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दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में सूखा पड़ेगा. एशिया और अफ्रीका के कई देशों में फसलें प्रभावित होंगी. समुद्री गर्मी की लहर से तूफान और भारी बारिश की संभावना बढ़ेगी. कुल मिलाकर मौसम के पैटर्न पूरी तरह उलट जाएंगे। 

भारत पर क्या होगा असर? गर्मी में तापमान बढ़ेगा?
भारत इस मेगा अल-नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है. वैज्ञानिकों के अनुसार 2026 की गर्मी में तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रहेगा. दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और उत्तर भारत में पहले ही अप्रैल में 40 डिग्री सेल्सियस पार हो चुका है. अल-नीनो की वजह से प्री-मानसून गर्मी और तेज होगी। 

जून-सितंबर का मानसून कमजोर हो सकता है, जिससे सूखा पड़ने का खतरा बढ़ेगा. उत्तर-पश्चिम भारत में सूखे की स्थिति बन सकती है. कृषि प्रभावित होगी, फसलें कम हो सकती हैं. गर्मी की लंबी और तेज होगी. नमी ज्यादा होने से गर्मी और ह्यूमिड महसूस होगी. कुल मिलाकर इस गर्मी में तापमान जरूर बढ़ेगा और लोगों को भारी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। 

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सरकार और लोग दोनों को तैयार रहना होगा. पानी की बचत, सूखा प्रबंधन और फसल बीमा पर जोर देना जरूरी है. किसानों को सूखा सहन करने वाली फसलें लगाने की सलाह दी जा रही है. स्वास्थ्य विभाग को हीट वेव अलर्ट जारी करने चाहिए. शहरों में कूलिंग सेंटर्स बनाए जाएं. वैज्ञानिक लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. अगर अल-नीनो सुपर लेवल का बना तो 2027 तक असर रहेगा।