वाराणसी में 3 मुस्लिम परिवारों के 11 सदस्यों की ‘घर वापसी’, वैदिक रीति से अपनाया सनातन धर्म

वाराणसी

धर्मनगरी वाराणसी के सेवापुरी विकास खंड अंतर्गत बाराडीह भूसौला गांव में आस्था और भक्ति का एक अलग ही नजारा देखने को मिला। यहां तीन मुस्लिम परिवारों के 11 सदस्यों ने पूरी श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाज के साथ 'घर वापसी' करते हुए सनातन धर्म को स्वीकार किया। धर्म जागरण मंच काशी जिला द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में यज्ञ, हवन और मंत्रोच्चार के बीच इन लोगों ने हिंदू धर्म में लौटने की घोषणा की।

सनातन धर्म अपनाने वाले सभी लोग 'नट' बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। भुसवला पेट्रोल पंप के पीछे आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सफी नट, मुख्तार और वकील के परिवारों ने भाग लिया। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि उनके पूर्वजों ने करीब चार पीढ़ी पहले डर और प्रलोभन के वश में आकर सनातन धर्म को छोड़ दिया था और इस्लाम स्वीकार कर लिया था। लेकिन उनके मन में हमेशा से अपने मूल जड़ों के प्रति सम्मान बना रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम धर्म की मान्यताओं के बीच उन्हें एक 'घुटन' महसूस होती थी और वे लंबे समय से अपने आराध्य की शरण में लौटना चाहते थे।

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नटराज भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था
कार्यक्रम के दौरान इन परिवारों ने बताया कि नट बिरादरी सदियों से 'नटराज' भगवान शिव की उपासक रही है। उन्होंने कहा, "हम लोग जन्मजात नटराज शिव के भक्त हैं। चार पीढ़ियों का अंतराल भले ही रहा हो, लेकिन हमारी सांस्कृतिक विरासत और भक्ति भगवान शिव से ही जुड़ी है। अब हम भगवान नटराज शिव की शरण में वापस आ गए हैं और आजीवन उन्हीं की आराधना करेंगे।"

वैदिक अनुष्ठान और नए नामकरण
शुद्धि कार्यक्रम के दौरान पंडितों और धर्म जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य यज्ञ संपन्न कराया। 11 सदस्यों ने हवन कुंड में आहुति डाली, जिसके बाद उन्हें गंगाजल से पवित्र किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी को माथे पर तिलक-चंदन लगाया गया और कलाई पर रक्षा सूत्र (कलावा) बांधकर सनातन धर्म में उनका स्वागत किया गया। घर वापसी करने वाले सदस्यों ने अपने पुराने नामों को त्यागकर सनातन धर्म के अनुरूप नए नाम भी स्वीकार किए।

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सामाजिक संगठनों की मौजूदगी
इस धार्मिक अनुष्ठान के अवसर पर धर्म जागरण मंच के जिला संयोजक प्रदीप, रामाश्रय और आनंद समेत दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि इन परिवारों ने बिना किसी दबाव के अपनी स्वेच्छा से घर वापसी की है। बाराडीह भूसौला गांव और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना की खासी चर्चा है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय स्तर पर सतर्कता भी बरती गई।